लोकसभा ने बुधवार को आंध्र प्रदेश पुनर्गठन (संशोधन) बिल, 2026 को पास कर दिया है. इस बिल के जरिए अमरावती को रज्य की एकमात्र और स्थायी राजधानी का कानूनी दर्जा मिलेगा. गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने यह बिल पेश किया था. इस पर एक घंटे से ज्यादा बहस हुई, जिसके बाद इसे वॉयस वोट से मंजूरी दे दी गई.
इससे पहले बुधवार को कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने विदेशी अंशदान संशोधन बिल को लेकर हंगामा किया. उन्होंने FCRA बिल वापस लो के नारे लगाए. स्पीकर ओम बिरला ने सांसदों से शांत रहने की अपील की, लेकिन विपक्षी सदस्य अपनी सीटों पर खड़े होकर विरोध करते रहे.
यह बिल गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने पेश किया था. इस बिल का समर्थन करते हुए कांग्रेस सांसद मणिक्कम टैगोर ने कहा कि अमरावती एक कैपिटल नहीं, करोड़ों लोगों की आकांक्षा है. उन्होंने कहा कि अमरावती को विकास के लिए लोन नहीं, स्पेशल सपोर्ट दिया जाना चाहिए. इस बिल पर लोकसभा में करीब दो घंटे तक चर्चा हुई. विपक्षी समाजवादी पार्टी और अन्य दलों के सदस्यों ने भी बिल का समर्थन किया और अपनी जमीन देने वाले किसानों को भरपूर मुआवजा देने की मांग की.
गृह मंत्री नित्यानंद राय ने सदन में हुई चर्चा का संक्षिप्त जवाब दिया. उन्होंने सदन में इस बात की जानकारी भी दी कि आंध्र प्रदेश की विधानसभा ने इस संबंध में 28 मार्च को ही प्रस्ताव पारित कर अमरावती को राजधानी का दर्जा देने की मांग भेजी है. इस बिल में संशोधन कर अमरावती को राजधानी का दर्जा देने की बात जोड़ी गई है.
इस बिल पर चर्चा में सत्तापक्ष और विपक्ष के 13 सदस्यों ने हिस्सा लिया. ध्वनिमत से मतदान के दौरान इस बिल का किसी भी सदस्य ने विरोध नहीं किया. लोकसभा से यह बिल ध्वनिमत से पारित हो गया. इसके साथ ही अमरावती को आंध्र प्रदेश की राजधानी के रूप में मान्यता देने का रास्ता साफ हो गया है.
वोटिंग के समय चेयर पर थे आंध्र प्रदेश के ही सांसद
अमरावती को आंध्र प्रदेश की राजधानी के रूप में कानूनी दर्जा देने से संबंधित संशोधन बिल लोकसभा से पारित हो गया है. यह बिल जब सदन से पारित हुआ, तब चेयर पर आंध्र प्रदेश के ही सांसद थे. वोटिंग के समय चेयर पर आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी जिले राजोल निवासी कृष्णा प्रसाद तेन्नेटी थे. कृष्णा प्रसाद तेन्नेटी आंध्र प्रदेश की बापटला सीट से भारतीय जनता पार्टी के सांसद हैं. कृष्णा प्रसाद तेन्नेटी डिप्टी स्पीकर पैनल में शामिल हैं.
क्या है FCRA संशोधन बिल में?
इसमें विदेशी फंडिंग से जुड़े नियमों को और स्पष्ट और सख्त करने का प्रस्ताव है, ताकि NGO को मिलने वाले विदेशी चंदे में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाई जा सके.
बिल में यह भी प्रावधान है कि जिन NGO का पंजीकरण रद्द, सरेंडर या समाप्त हो जाता है, उनकी विदेशी फंडिंग और संपत्तियों के प्रबंधन व निपटान के लिए एक नामित प्राधिकरण बनाया जा सकता है.
लोकसभा ने बुधवार को आंध्र प्रदेश पुनर्गठन (संशोधन) बिल, 2026 को पास कर दिया है. इस बिल के जरिए अमरावती को रज्य की एकमात्र और स्थायी राजधानी का कानूनी दर्जा मिलेगा. गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने यह बिल पेश किया था. इस पर एक घंटे से ज्यादा बहस हुई, जिसके बाद इसे वॉयस वोट से मंजूरी दे दी गई.
इससे पहले बुधवार को कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने विदेशी अंशदान संशोधन बिल को लेकर हंगामा किया. उन्होंने FCRA बिल वापस लो के नारे लगाए. स्पीकर ओम बिरला ने सांसदों से शांत रहने की अपील की, लेकिन विपक्षी सदस्य अपनी सीटों पर खड़े होकर विरोध करते रहे.
यह बिल गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने पेश किया था. इस बिल का समर्थन करते हुए कांग्रेस सांसद मणिक्कम टैगोर ने कहा कि अमरावती एक कैपिटल नहीं, करोड़ों लोगों की आकांक्षा है. उन्होंने कहा कि अमरावती को विकास के लिए लोन नहीं, स्पेशल सपोर्ट दिया जाना चाहिए. इस बिल पर लोकसभा में करीब दो घंटे तक चर्चा हुई. विपक्षी समाजवादी पार्टी और अन्य दलों के सदस्यों ने भी बिल का समर्थन किया और अपनी जमीन देने वाले किसानों को भरपूर मुआवजा देने की मांग की.
गृह मंत्री नित्यानंद राय ने सदन में हुई चर्चा का संक्षिप्त जवाब दिया. उन्होंने सदन में इस बात की जानकारी भी दी कि आंध्र प्रदेश की विधानसभा ने इस संबंध में 28 मार्च को ही प्रस्ताव पारित कर अमरावती को राजधानी का दर्जा देने की मांग भेजी है. इस बिल में संशोधन कर अमरावती को राजधानी का दर्जा देने की बात जोड़ी गई है.
इस बिल पर चर्चा में सत्तापक्ष और विपक्ष के 13 सदस्यों ने हिस्सा लिया. ध्वनिमत से मतदान के दौरान इस बिल का किसी भी सदस्य ने विरोध नहीं किया. लोकसभा से यह बिल ध्वनिमत से पारित हो गया. इसके साथ ही अमरावती को आंध्र प्रदेश की राजधानी के रूप में मान्यता देने का रास्ता साफ हो गया है.
वोटिंग के समय चेयर पर थे आंध्र प्रदेश के ही सांसद
अमरावती को आंध्र प्रदेश की राजधानी के रूप में कानूनी दर्जा देने से संबंधित संशोधन बिल लोकसभा से पारित हो गया है. यह बिल जब सदन से पारित हुआ, तब चेयर पर आंध्र प्रदेश के ही सांसद थे. वोटिंग के समय चेयर पर आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी जिले राजोल निवासी कृष्णा प्रसाद तेन्नेटी थे. कृष्णा प्रसाद तेन्नेटी आंध्र प्रदेश की बापटला सीट से भारतीय जनता पार्टी के सांसद हैं. कृष्णा प्रसाद तेन्नेटी डिप्टी स्पीकर पैनल में शामिल हैं.
क्या है FCRA संशोधन बिल में?
इसमें विदेशी फंडिंग से जुड़े नियमों को और स्पष्ट और सख्त करने का प्रस्ताव है, ताकि NGO को मिलने वाले विदेशी चंदे में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाई जा सके.
बिल में यह भी प्रावधान है कि जिन NGO का पंजीकरण रद्द, सरेंडर या समाप्त हो जाता है, उनकी विदेशी फंडिंग और संपत्तियों के प्रबंधन व निपटान के लिए एक नामित प्राधिकरण बनाया जा सकता है.