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Varun Dhawan की बेटी को क्या हुआ है? जानिए किस वजह से नन्ही लारा को होती है चलने में दिक्कत

Varun Dhawan Daughter News: एक्टर वरुण धवन ने हाल ही में एक पोडकास्ट के दौरान इस बात का जिक्र किया कि उनकी बेटी एक बड़ी दिक्कत से जूझ रही थी जिसके कारण अब भी उसे चलने में दिक्कत होती है.

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Written By: Seema Thakur Updated: Mar 30, 2026 13:50
Varun dhawan daughter news
वरुण धनव की बेटी को क्या हुआ है, जानिए यहां.

Varun Dhawan Daughter News: एक्टर वरुण धवन और पत्नी नताशा दलाल साल 2024 में बेटी लारा (Lara Dhawan) के माता-पिता बने थे. हाल ही में एक पोडकास्ट के दौरान वरुण ने बेटी की तबीयत के बारे में बताया. वरुण ने बताया कि डेढ़ साल की उम्र में लारा को डेवलपमेंटल डिस्प्लेसिया ऑफ द हिप (DDH) हुआ था. यह एक ऐसी कंडीशन है जिसमें हिप्स अपने सॉकेट से निकल जाते हैं. इसी वजह से नन्ही लारा को चलने में दिक्कत होती थी और वह ठीक तरह से नहीं चल पाती थी. यहां जानिए, क्या है डेवलपमेंटल डिस्प्लेसिया ऑफ द हिप (Developmental Dysplasia of the Hip) और इसके शुरुआती लक्षण कैसे नजर आते हैं.

क्या है डेवलपमेंटल डिस्प्लेसिया ऑफ द हिप | What Is Dysplasia Of The Hip

वरुण धवन ने बताया कि डेढ़ साल की उम्र में उनकी बेटी लारा को DDH हुआ था. इस कंडीशन में हिप अपने सॉकेट से निकल जाती है जिससे आप ठीक तरह से चल या दौड़ नहीं पाते हैं. इससे आर्थराइटिस हो सकता है और स्लिप डिस्क का खतरा बढ़ता है. डीडीएच के इलाज के लिए लारा को सर्जरी की जरूरत नहीं पड़ी और एक प्रोसीजर से ही उसकी हिप को सॉकेट में वापस ला दिया गया. लेकिन, उसे ढाई महीनों तक स्पाइका कास्ट में रहना पड़ा था. ऐसे में वरुन धवन की सभी पैरेंट्स को यही सलाह है कि पैरेंट्स को छोटी उम्र से ही बच्चे की मूवमेंट को देखते रहना चाहिए जिससे समय रहते DDH जैसी कंडीशंस का पता लगाया जा सके.

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बच्चों में DDH होने के क्या लक्षण होते हैं

  • बच्चे को डीडीएच होने पर अपनी सॉकेट से निकली हिप बाहर की तरह नजर आती है.
  • बच्चे के दोनों पैरों की लंबाई एकदूसरे से अलग हो सकती है.
  • जांघों पर स्किन फॉल्ड्स नजर आने लगते हैं.
  • पैरों की मोबिलिटी और फ्लेक्सिबिलिटी कम हो जाती है.
  • बच्चा लंगड़ाता हुआ नजर आता है.
  • बच्चे को चलने में दिक्कत होती है और वह आम बच्चों की तरह एक्टिवीज नहीं कर पाता है.

DDH का पता कैसे लगता है

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बच्चे की स्क्रीनिंग करने पर हिप जॉइंट्स को देखकर डीडीएच का पता लगाया जा सकता है. जन्म के बाद अगर लग रहा है कि बच्चे की कमर स्टेबल नहीं है तो 4 से 6 महीनों में अल्ट्रासाउंड स्कैन करवाया जा सकता है. इसके अलावा, परिवार में अगर हिप की दिक्कतें रही हों, बच्चा उलटा पैदा हुआ हो या फिर बच्चा जुड़वा हो तो डीडीएच की जांच करवाई जा सकती है.

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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.

First published on: Mar 30, 2026 01:50 PM

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