क्या स्मार्टफोन कमजोर कर रहा है आपकी याद्दाश्त? जानिए क्या है गूगल इफेक्ट

Memory Loss Study: आजकल हर छोटी-बड़ी जानकारी के लिए लोग तुरंत गूगल का सहारा लेते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि हर बात के लिए फोन और इंटरनेट पर निर्भर रहना आपकी याद्दाश्त को कैसे प्रभावित करता है?

Memory Loss

फोन किस तरह याद्दाश्त पर असर डालता है, जानिए यहां.

What Is Google Effect: इस बात से कोई अनजान नहीं है कि हर चीज हमारे फोन पर उपलब्ध रहने के कारण हमने उन चीजों को याद करना ही छोड़ दिया है, चाहे किसी का फोन नंबर हो या घर का पता और आइडी नंबर. लेकिन, यह आम सी लगने वाली चीज असल में आपकी याद्दाश्त (Memory) से खिलवाड़ कर रही है. हर चीज के लिए फोन पर निर्भरता इंसान की याद रखने की क्षमता को कम कर रहा है. यही है गूगल इफेक्ट जिसपर साल 2011 में एक स्टडी भी आई थी.

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क्या है गूगल इफेक्ट

साल 2011 में एक स्टडी आई थी जिसमें इस बात पर चर्चा की गई थी कि किस तरह गूगल या इंटरनेट और फोन पर पूरी तरह निर्भर हो जाना इंसानी मेमोरी को प्रभावित कर रहा है. कोलंबिया यूनिवर्सिटी की साइकोलॉजी प्रोफेसल बेट्सी स्पैरो ने यह स्टडी की थी जिसमें उन्होंने पाया कि जब लोगों को पता होता है कि कोई जानकारी उन्हें ऑनलाइन मिल जाएगी तो वह उसे याद रखने की जरूरत नहीं समझते बल्कि इस बात पर फोकस करते हैं कि वो जानकारी उन्हें कहां से मिली है. यही गूगल इफेक्ट है. गूगल इफेक्ट को डिजिटल एमनेशिया भी कहते हैं.

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इसमें व्यक्ति को लगता है कि जब उसे सारी जानकारी आसानी से मिल ही रही है तो वह भला उन चीजों को याद रखने की मेहनत क्यों करे. रिसर्चर्स के अनुसार, इंटरनेट ने इंसानी दिमाग तो आउटसोर्स मेमोरी की तरह काम करने पर मजबूर कर दिया है, यानी दिमाग खुद चीजें याद रखने के बजाय तकनीक पर भरोसा करने लगा है. हालांकि, तकनीक पूरी तरह खराब नहीं है लेकिन इसपर जरूरत से ज्यादा निर्भरता मानसिक क्षमता को प्रभालित कर सकती है.

कीबोर्ड का प्रेडिक्टेबल हो जाना

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लेकिन, फोन से जुड़ी अब एक और दिक्कत दिखने लगी है, यह है मोबाइल कीपैड का हर चीज को प्रेडिक्ट करना. आप जो लिख रहे हैं आपका कीबोर्ड आपके पूरा वाक्य लिखने से पहले ही आपको सजेशन देने लगता है कि आपको आगे क्या लिखना चाहिए. ऐसे में अगर फोन का कीबोर्ड ही हमारी जगह सोचने का काम करने लगेगा तो हम क्या सोचेंगे? इससे ना सिर्फ व्यक्ति की याद्दाश्त कमजोर होगी बल्कि उसे नई चीजें सीखने की जरूरत भी महसूस नहीं होगी. ऐसे में फोन पर पूरी तरह निर्भरता याद्दाश्त पर असर डाल सकती है.

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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.

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लेखक के बारे में

Seema Thakur

Seema Thakur

सीमा ठाकुर पत्रकारिता से पिछले 7 सालों से जुड़ी हैं. न्यूज24 में सीमा बतौर चीफ सब एडिटर काम कर रही हैं. सीमा हेल्थ और लाइफस्टाइल बीट पर लिखती हैं और कॉन्टेन्ट क्रिएशन के साथ ही टीम लीड की भूमिका भी निभा रही हैं. न्यूज24 में सीमा ने अपनी बीट से हटकर इलेक्शंस की स्टोरीज पर भी काम किया है. हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़ी स्टडीज, लेटेस्ट न्यूज और एक्सपर्ट्स/डॉक्टर्स से बातचीत पर आधारित लेख लिखने में सीमा की मजबूत पकड़ है. सीमा हेल्थ की खबरों और लेटेस्ट अपडेट के लिए AIIMS, ICMR, WHO,  स्वास्थ्य मंत्रालय जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों और डॉक्टरों के संपर्क में रहती हैं. अनुभव सीमा ने पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली प्रेस ग्रुप से की थी जहां वे सरिता, मुक्ता और गृहशोभा मैग्जीन में वुमेन ओरिएंटेड, सोशल, लाइफस्टाइल, हेल्थ और बॉलीवुड के अलावा पॉलिटकल आर्टिकल्स लिखती थीं. सीमा को प्रूफरीडिंग और एडिटिंग का भी खासा अनुभव है. प्रिंट में काम करने के दौरान सीमा की हिंदी भाषा में अच्छी पकड़ है. दिल्ली प्रेस के बाद सीमा डायमंड पब्लिशिंग हाउस से जुड़ी थीं जहां उन्होंने मैग्जीन और वेबसाइट दोनों के लिए काम किया. डायमंड पब्लिशिंग हाउस के बाद सीमा ने NDTV के साथ डिजिटल मीडिया में अपना करियर शुरू किया. NDTV में सीमा ने राइटर के साथ ही वीडियो प्रोड्यूसर, एंकर और पॉडकास्टर के तौर पर भी काम किया. लाइफस्टाइल वीडियोज और बॉलीवुड गोल्ड सीरीज को प्रोड्यूस और एंकर करने के साथ ही वे बॉलीवुड पॉडकास्ट किया करती थीं. वीडियो प्रोडक्शन में सीमा का इंटरेस्ट और पकड़ यहीं से आई है. शिक्षा सीमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज से बी.ए किया है. इसके बाद जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. जामिया की पीजी डिप्लोमा इन जर्नलिज्म डिपार्टमेंट की मैग्जीन में सीमा स्टूडेंट एडिटर और अपने बैच की कॉन्टेंट हेड रह चुकी हैं.
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