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हेल्थ

महिला के लिवर में पल रहा था बच्चा… आइए जानते हैं इंट्राहेपैटिक एक्टोपिक प्रेगनेंसी के बारे में

Rare Pregnancy Case: प्रेग्नेंसी, महिला के साथ होने वाली एक ऐसी गतिविधि है जिसमें वह नए जीवन को दुनिया में लाने का काम करती है। गर्भावस्था में जो भ्रूण होता है वह आमतौर पर मां के पेट या गर्भ में पलता है, लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि कोई बच्चा मां के लिवर में पलने लगे? जी हां, यूपी के बुलंदशहर का यह मामला आपको भी हैरान कर देगा। आइए जानते हैं किस मेडिकल कंडीशन में ऐसा होता है।

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Written By: Namrata Mohanty Updated: Aug 14, 2025 09:56

Rare Pregnancy Case: उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक महिला के लिवर में भ्रूण का विकास हो रहा था। जी हां, यह बिल्कुल सच है। प्रेग्नेंसी एक ऐसा पल है, जो किसी भी महिला के लिए बेहद खास होता है। मगर क्या हो जब ये उस महिला की जान पर बन आएं? बुलंदशहर के दस्तूरा गांव की रहने वाली 35 वर्ष की सर्वेश के साथ बीते 12 हफ्तों से ऐसी स्थिति बनी हुई है, जो सोचने और समझने में भी अलग है। वे इंट्राहेपैटिक एक्टोपिक प्रेग्नेंसी की शिकार है, जो गर्भावस्था की एक रेयर कंडीशन होती है।

महिला के साथ क्या हुआ था?

दरअसल, 35 वर्षीय सर्वेश बीते 12 हफ्तों से प्रेग्नेंट थी लेकिन उसके पीरियड्स मिस नहीं हुए थे। ऐसे में इस बात का अंदाजा लगाना कि वह गर्भवती है मुश्किल था क्योंकि सही समय पर पीरियड्स आ रहे थे, इसलिए डॉक्टरों ने उसके प्रेग्नेंट होने के बारे में सोचा भी नहीं था। उसे हमेशा अपने पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द होता था, जहां लिवर होता है। इस दर्द को गैस समझकर नजरअंदाज किया जा रहा था और डॉक्टर भी पेनकिलर्स के साथ उसका इलाज कर रहे थे। एक दिन जब उसे तेज दर्द हुआ तो डॉक्टर ने उसे अल्ट्रासाउंड करने को कहा। उस अल्ट्रासाउंड की रिपोर्ट ने डॉक्टरों को चौंका दिया। उसमें साफ-साफ देखा जा रहा था कि महिला के लिवर में एक शिशु का विकास हो रहा था।

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क्या होती है ये कंडीशन?

डॉक्टरों के मुताबिक, यह मामला इंट्राहेपैटिक एक्टोपिक प्रेग्नेंसी का है, जो दुनियाभर में एक दुर्लभ गर्भवती की स्थिति मानी जाती है। आमतौर पर प्रेग्नेंसी के दौरान भ्रूण का विकास गर्भाशय में होता है, लेकिन एक्टोपिक प्रेग्नेंसी में भ्रूण का विकास शरीर के किसी और अंग या हिस्से में होने लगता है। इस केस में शिशु का विकास महिला के लिवर में हो रहा था, जो न सिर्फ चौंकाने वाला था बल्कि उस महिला की जान के लिए भी बेहद खतरनाक था।

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इंट्राहेपैटिक एक्टोपिक प्रेग्नेंसी का बचाव क्या है?

सर्वेश की डॉक्टर, डॉक्टर सानिया जेहरा के मुताबिक, उसे इस प्रेग्नेंसी से छुटकारा पाना बहुत जरूरी हो गया था क्योंकि 12 हफ्तों की देरी हो चुकी थी। अगर उससे ज्यादा समय अब और लिया गया तो उसका लिवर फट सकता था और उसकी जान भी जा सकती थी। हालांकि, फिलहाल सर्वेश की सर्जरी हो चुकी है और उसे पेट के हिस्से में 21 टांके भी लगे हैं। सर्जरी के बाद न वो कोई भारी सामान उठा सकती है और न ही भारी खाना खा सकती है।

कैसे थे सर्वेश के लक्षण?

सर्वेश को इस प्रेग्नेंसी के दौरान तेज दर्द खासतौर पर पेट के ऊपरी हिस्से में होता था। उसे बेहिसाब उल्टियां होती थी। हमेशा दस्त, बुखार और दर्द बना रहता था। जब उसे पता चला कि वह गर्भवती है और उसका बच्चा लिवर में पल रहा है तो वो और उसका पति भी दंग रह गए। इस प्रेग्नेंसी का इलाज सिर्फ और सिर्फ सर्जरी है। ऐसे में लोकल डॉक्टरों ने उसका इलाज करने से भी मना कर दिया था क्योंकि इस स्थिति में बच्चा और मां, दोनों की जान खतरे में थी।

कैसे इंट्राहेपैटिक एक्टोपिक प्रेग्नेंसी होती है?

इस प्रकार की प्रेग्नेंसी की बात करें तो महिला की सर्जरी करने वाली डॉक्टरों की टीम का हिस्सा रहने वाली डॉक्टर पारुल दहिया बताती हैं कि ऐसे मामलों को बिना सर्जन के हैंडल नहीं किया जा सकता था। इसलिए, उन्हें सबसे पहले इस केस के लिए एक अच्छे सर्जन को ढूंढना पड़ा था। वह बताती हैं कि दुनिया की ये दुर्लभ प्रकार की प्रेग्नेंसी भी सामान्य रूप से पुरुष का स्पर्म और महिला के एग के फैलोपियन ट्यूब में मिलन से होती है और वहीं फर्टीलाइज भी होती है।

इस स्थिति में जो फर्टिलाइज्ड एग्स होते हैं, वह पेट की जगह शरीर के किसी अन्य अंग में इंप्लांट हो जाता है। इसमें फ्री-फ्लोटिंग एग किसी अन्य अंग से चिपक जाता है जैसे की इस महिला के लिवर में चिपक गया था।

अन्य एक्सपर्ट क्या बोलें?

बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, बीएचयू के स्त्री एवं प्रसूति विभाग की डॉक्टर ममता सिंह बताती हैं कि कई मामलों में फर्टिलाइज्ड एग शरीर के ऐसे अंगों पर चिपक जाता है, जहां एक समय के बाद स्थिति ऐसी पैदा होती है कि मां और बच्चे दोनों की जान खतरे में पड़ जाती है। ये जगह फैलोपियन ट्यूब, पेट, लिवर या कोई और अंग भी हो सकता है। लिवर में शरीर के खून का हिस्सा बहुत अच्छी मात्रा में होता है, इसलिए वहां ये बच्चा जल्दी से ग्रो भी हो जाता है।

क्यों दुर्लभ है इंट्राहेपैटिक प्रेगनेंसी?

इंट्राहेपैटिक प्रेगनेंसी के बारे में बात करते हुए डॉक्टर मोनिका बताती हैं कि दुनियाभर की 70 में से 80 लाख महिलाओं में से किसी 1 को ऐसी प्रेग्नेंसी होती है। पूरी दुनिया में अब तक इसके 45 मामले मिले हैं, जिसमें से भारत के अंदर बुलंदशहार वाले मामले को जोड़कर कुल 4 केस हो जाते हैं। इससे पहले साल 2012 में दिल्ली में इंट्राहेपैटिक प्रेगनेंसी का पहला केस मिला था। इसके बाद साल 2022 में गोवा में ऐसा केस रिपोर्ट किया गया था और फिर साल 2023 में पटना में एक महिला ऐसी प्रेग्नेंसी को झेल रही थी।

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First published on: Aug 14, 2025 09:56 AM

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