Oral Cancer Signs: मुंह का छाला कब बन सकता है कैंसर? ओनकोलॉजिस्ट डॉ. पुनीत गुप्ता ने बताए मुंह के कैंसर के लक्षण

Oral Cancer Symptoms: मुंह का कैंसर एक खतरनाक कैंसर है जिसका समय रहते पता लगाना जरूरी होता है. ऐसे में डॉ. पुनीत गुप्ता, चेयरमैन, ऑन्कोलॉजी सर्विसेज, एशियन हॉस्पिटल, बता रहे हैं मुंह का कैंसर होने पर किस तरह के लक्षण कभी इग्नोर नहीं करने चाहिए.

Oral Cancer Symptoms In Hindi:

Oral Cancer Symptoms In Hindi: कैंसरयुक्त मुंह के छाले कैसे दिखते हैं?

Oral Cancer: मुंह में छाले होना एक आम समस्या है और आयदिन लोगों को छाले हो जाया करते हैं. आमतौर पर ये छाले कुछ दिनों में अपने आप ठीक भी हो जाते हैं. लेकिन, अगर मुंह का घाव लंबे समय तक बना रहे, बार-बार हो या उसके साथ कुछ अन्य लक्षण भी दिखाई दें तो इसे नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है. कुछ मामलों में यह ओरल कैंसर यानी मुंह के कैंसर का शुरुआती संकेत (Oral Cancer Symptoms) भी हो सकता है. डॉ. पुनीत गुप्ता, चेयरमैन, ऑन्कोलॉजी सर्विसेज, एशियन हॉस्पिटल ने बताया कैसे जानें कि छाला साधारण है या फिर कैंसर के कारण दिख रहा है.

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मुंह में छाला होना कैंसर है या नहीं

डॉक्टर के अनुसार, सामान्य मुंह के छाले (Mouth Ulcer) अक्सर तनाव, पोषण की कमी, मसालेदार भोजन, मुंह में चोट लगने या हार्मोनल बदलाव के कारण होते हैं. ये दर्दनाक हो सकते हैं लेकिन आमतौर पर 7 से 14 दिनों के भीतर ठीक हो जाते हैं. हालांकि, समस्या तब गंभीर मानी जाती है जब मुंह का कोई घाव या छाला 2 सप्ताह से अधिक समय तक बना रहे. इसके अलावा अगर घाव से खून निकल रहा हो, मुंह में सफेद (White Spots) या लाल धब्बे दिखाई दें, निगलने में परेशानी हो, आवाज में बदलाव आए या गर्दन में गांठ महसूस हो तो तुरंत विशेषज्ञ से जांच करानी चाहिए.

डॉ. पुनीत गुप्ता कहते हैं, “अधिकांश मुंह के छाले सामान्य होते हैं और कुछ दिनों में ठीक हो जाते हैं. लेकिन, कोई घाव 14 दिनों से अधिक समय तक बना रहे या बार-बार उसी जगह पर हो तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए. ओरल कैंसर के शुरुआती लक्षण अक्सर साधारण छाले जैसे दिखाई दे सकते हैं. समय पर जांच और बायोप्सी से बीमारी का पता शुरुआती चरण में लगाया जा सकता है.”

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कैसे होता है ओरल कैंसर

भारत में ओरल कैंसर सबसे आम कैंसरों में से एक है. तंबाकू, गुटखा, पान मसाला, धूम्रपान और अत्यधिक शराब का सेवन कैंसर के मुख्य कारणों में शामिल है. विशेषज्ञों के मुताबिक इन आदतों से मुंह की कोशिकाओं में बदलाव आने लगता है जो समय के साथ कैंसर का रूप ले सकता है. कुछ लोगों में जोखिम और भी अधिक होता है. जिन लोगों को लंबे समय से तंबाकू सेवन की आदत है, जिनकी ओरल हाइजीन खराब है या जिनके परिवार में कैंसर का इतिहास रहा है उन्हें विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए.

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ओरल कैंसर का इलाज

ओरल कैंसर की पहचान जितनी जल्दी हो जाए, इलाज की सफलता उतनी ही अधिक होती है. शुरुआती चरण में सर्जरी, रेडिएशन या अन्य उपचारों के माध्यम से रोगी पूरी तरह स्वस्थ जीवन जी सकता है. वहीं देर से पता चलने पर इलाज जटिल हो सकता है

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डॉक्टर कहते हैं, “लोग अक्सर दर्द न होने पर घाव को नजरअंदाज कर देते हैं. लेकिन, ओरल कैंसर के शुरुआती घाव कई बार दर्दरहित भी हो सकते हैं. इसलिए किसी भी असामान्य बदलाव को गंभीरता से लेना चाहिए. नियमित डेंटल और ओरल चेकअप से भी बीमारी का समय रहते पता लगाया जा सकता है.”

कब तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें?

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  • छाला या घाव 2 सप्ताह से अधिक समय तक रहे
  • मुंह में सफेद या लाल धब्बे दिखाई दें
  • घाव से बार-बार खून निकले
  • निगलने या बोलने में परेशानी हो
  • गर्दन में गांठ महसूस हो
  • बिना कारण वजन कम होने लगे.

इस बात का ध्यान रखें कि हर मुंह का छाला कैंसर नहीं होता, लेकिन लंबे समय तक बने रहने वाले घाव को सामान्य मानकर छोड़ देना भी सही नहीं है. समय पर जांच ही गंभीर बीमारी से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है.

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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.  

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लेखक के बारे में

Seema Thakur

Seema Thakur

सीमा ठाकुर पत्रकारिता से पिछले 7 सालों से जुड़ी हैं. न्यूज24 में सीमा बतौर चीफ सब एडिटर काम कर रही हैं. सीमा हेल्थ और लाइफस्टाइल बीट पर लिखती हैं और कॉन्टेन्ट क्रिएशन के साथ ही टीम लीड की भूमिका भी निभा रही हैं. न्यूज24 में सीमा ने अपनी बीट से हटकर इलेक्शंस की स्टोरीज पर भी काम किया है. हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़ी स्टडीज, लेटेस्ट न्यूज और एक्सपर्ट्स/डॉक्टर्स से बातचीत पर आधारित लेख लिखने में सीमा की मजबूत पकड़ है. सीमा हेल्थ की खबरों और लेटेस्ट अपडेट के लिए AIIMS, ICMR, WHO,  स्वास्थ्य मंत्रालय जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों और डॉक्टरों के संपर्क में रहती हैं. अनुभव सीमा ने पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली प्रेस ग्रुप से की थी जहां वे सरिता, मुक्ता और गृहशोभा मैग्जीन में वुमेन ओरिएंटेड, सोशल, लाइफस्टाइल, हेल्थ और बॉलीवुड के अलावा पॉलिटकल आर्टिकल्स लिखती थीं. सीमा को प्रूफरीडिंग और एडिटिंग का भी खासा अनुभव है. प्रिंट में काम करने के दौरान सीमा की हिंदी भाषा में अच्छी पकड़ है. दिल्ली प्रेस के बाद सीमा डायमंड पब्लिशिंग हाउस से जुड़ी थीं जहां उन्होंने मैग्जीन और वेबसाइट दोनों के लिए काम किया. डायमंड पब्लिशिंग हाउस के बाद सीमा ने NDTV के साथ डिजिटल मीडिया में अपना करियर शुरू किया. NDTV में सीमा ने राइटर के साथ ही वीडियो प्रोड्यूसर, एंकर और पॉडकास्टर के तौर पर भी काम किया. लाइफस्टाइल वीडियोज और बॉलीवुड गोल्ड सीरीज को प्रोड्यूस और एंकर करने के साथ ही वे बॉलीवुड पॉडकास्ट किया करती थीं. वीडियो प्रोडक्शन में सीमा का इंटरेस्ट और पकड़ यहीं से आई है. शिक्षा सीमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज से बी.ए किया है. इसके बाद जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. जामिया की पीजी डिप्लोमा इन जर्नलिज्म डिपार्टमेंट की मैग्जीन में सीमा स्टूडेंट एडिटर और अपने बैच की कॉन्टेंट हेड रह चुकी हैं.
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