दवाओं की बिक्री पर सख्ती! 12% से ज्यादा अल्कोहल वाली मेडिसिन के लिए डॉक्टर की पर्ची होगी जरूरी
High Alcohol Oral Drugs: ड्रग्स रूल्स को लेकर केंद्र सरकार का बड़ा फैसला आया है. 1945 में संशोधन कर 30 मिली से बड़ी और 12 प्रतिशत से अधिक इथाइल अल्कोहल वाली सभी ओरल दवाओं को 'Schedule H1' श्रेणी में डाल दिया गया है.
Edited By : Shadma Muskan|Updated: Jul 10, 2026 11:03
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क्या है सरकार का नया फैसला? Image Credit- AI
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What Is Schedule H1: केंद्र सरकार का कफ सिरप और टॉनिक जैसी दवाओं को लेकर बड़ा फैसला आया है. सरकार ने यह फैसला देश में कफ सिरप और टॉनिक का नशे के रूप में हो रहे गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए लिया गया है. बता दें, सरकार ने ड्रग्स रूल्स 1945 में बड़ा संशोधन करते हुए ज्यादा अल्कोहल वाली ओरल दवाओं को शेड्यूल H1 की लिस्ट में डाल दिया गया है. इस फैसले के बाद अब खुलेआम ओरल दवाएं नहीं बेची जा सकेंगी. सरकार के इस फैसले से नशे के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले सिरप पर रोक लगेगी और दवाओं का सही इस्तेमाल किया जा सकेगा.
सरकार ने 12% से अधिक अल्कोहल वाली ओरल दवाओं को शेड्यूल H1 में शामिल करने का निर्णय लिया है. बता दें शेड्यूल H1 के तहत आने वाली दवाएं केवल डॉक्टर की पर्ची पर ही बेची जा सकती हैं. मेडिकल स्टोर इन दवाओं की बिक्री का रिकॉर्ड भी निर्धारित नियमों के अनुसार रखना होगा.
क्यों लिया गया यह फैसला?
विशेषज्ञों और न्यूज एजेंसियों के अनुसार, कुछ अल्कोहल युक्त सिरप और ओरल दवाओं का दुरुपयोग नशे के उद्देश्य से किया जा रहा था. सरकार का मानना है कि सख्त निगरानी से ऐसे मामलों में कमी आएगी और दवाओं का इस्तेमाल सिर्फ इलाज के लिए जरूरी है.
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शेड्यूल H1 क्या होता है?
शेड्यूल H1 में भारत में उन दवाओं को शामिल किया जाता है जिनकी बिक्री और इस्तेमाल पर विशेष निगरानी रखी जाती है. इन दवाओं को खरीदने के लिए डॉक्टर का प्रिस्क्रिप्शन अनिवार्य होता है. इसके अलावा, दवाओं की बिक्री का रिकॉर्ड रखना पड़ता है ताकि जरूरत पड़ने पर उसकी जांच की जा सके.
मरीजों पर क्या असर पड़ेगा?
12% से अधिक अल्कोहल वाली ओरल दवा खरीदने के लिए डॉक्टर का प्रिस्क्रिप्शन जरूरी होगा.
मेडिकल स्टोर बिना वैध पर्चे के ऐसी दवाएं नहीं बेच सकेंगे.
जिन मरीजों को हेल्थ से संबंधित परेशानियों की वजह से इन दवाओं की जरूरत है, उन्हें डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवा मिलती रहेगी.
इस कदम से दवाओं का गलत इस्तेमाल कम होगा और लोग बिना वजह के इन दवाओं को खरीदने से बच सकेंगे.