स्टेज 1 फेफड़ों के कैंसर के क्या लक्षण हैं? जानिए खांसी और सांस फूलने समेत सभी संकेत

World Lung Cancer 2026: फेफड़ों का कैंसर दुनियभार में कैंसर से जान जाने के सबसे बड़े कारणों में से एक है. इस कैंसर के शुरुआती लक्षण ना पहचान पाने से ट्यूमर तेजी से बढ़ता चला जाता है. इसीलिए इसे शुरुआती स्टेज में ही कंट्रोल करना जरूरी है.

World Lung Cancer Day

फेफड़ों के कैंसर के क्या लक्षण और कारण हैं?

Lung Cancer Stage 1: हर साल 1 अगस्त के दिन विश्व फेफड़ा कैंसर दिवस (World Lung Cancer Day) मनाया जाता है. इस दिन को मनाने का मकसद दुनियाभर के लोगों को फेफड़ों के कैंसर के प्रति जागरुक करना है. फेफड़े के कैंसर की पहचान अगर समय रहते ना की जाए तो ट्यूमर लगातार बढ़ता जाता है और जानलेवा हो सकता है. इसीलिए फेफड़ों के कैंसर के लक्षणों (Fefdo Ke Cancer) को जल्द से जल्द पहचानना और इलाज शुरू करना जरूरी है. यहां जानिए कैंसर की पहली स्टेज और इस स्टेज से पहले शरीर में कौन-कौन से लक्षण नजर आ सकते हैं जिन्हें इग्नोर नहीं करना चाहिए.

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फेफड़ों के कैंसर की पहली स्टेज के लक्षण | Stage 1 Lung Cancer Symptoms

सांस फूलना – थोड़ा सा भी चलने-फिरने पर या कोई काम करने पर सांस फूलने लगती है. ऐसा श्लसन नली में फ्लुइड के बिल्डअप के कारण होता है.

छाती और हड्डियों में दर्द – इस कैंसर में छाती, पीठ और कंधों में दर्द महसूस हो सकता है. फेफड़ों का कैंसर जब हड्डियों में फैल जाता है तो ऐसा होता है.

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खांसी आना – हर समय खांसी आना और हफ्तों तक भी खांसी का ठीक ना होना फेफड़ों की विफलता का संकेत हो सकता है. फेफड़ों के कैंसर में अगर फेफड़े ठीक तरह से काम नहीं कर पाते हैं तो ऐसा होता है.

आवाज बदल जाना – फेफड़ों का कैंसर होने पर आवाज बदल जाती है. आवाज ज्यादा गहरी या खराश भरी सुनाई दे सकती है. ऐसा जुकाम लगने पर भी होता है लेकिन अगर दिक्कत कई हफ्तों से बनी रहे तो डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है.

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भूख ना लगना, वजन घटना और थकान – अगर भूख नहीं लगती है, वजन बिना किसी कारण के तेजी से कम हो रहा है और शरीर में हर समय थकान महसूस होती है तो यह कैंसर का लक्षण हो सकता है. इसे इग्नोर ना करें.

किन लोगों में फेफड़ों के कैंसर का खतरा ज्यादा होता है

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  • जो लोग धूम्रपान करते हैं उनमें फेफड़ों के कैंसर का खतरा सबसे ज्यादा रहता है.
  • जो लोग सेकंडहैंड स्मोक की चपेट में आते हैं उन्हें फेफड़ों का कैंसर हो सकता है.
  • हार्मफुल सब्सटैंस जैसे रेडोन, यूरेनियम, डीजल, सिलिका या कोल प्रोडक्ट्स और टॉक्सिंस के संपर्क में आने से फेफड़ों के कैंसर का खतरा बढ़ता है.
  • अगर परिवार में किसी को फेफड़ों का कैंसर हुआ हो तो व्यक्ति को भी हो सकता है.

फेफड़ों की कैंसर की कितनी स्टेजेस होती हैं

स्टेज 0 – फेफड़ों के कैंसर की स्टेज 0 में एब्नोरम्ल सेल्स फैफड़ों की लाइनिंग में पनपना शुरू हो जाती हैं.
स्टेज 1 – ट्यूमर का साइज 3 सेंटीमीटर से कम होता है और यह फेफड़ों से बाहर अबतर नहीं निकला होता.
स्टेज 2 – स्टेज 2 में ट्यूमर 3 सेंटीमीटर से 7 सेंटीमीटर के बीच होता है और फेफड़ों के पास के लिम्फ नोड्स, स्ट्रक्चर्स और टिशूज में फैल जाता है. लेकिन, यह अबतक किसी और अंग या दूसरे फेफड़े तक नहीं फैला है.

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स्टेज 3 – ट्यूमर (Tumor) का आकार 5 सेंटीमीटर से ज्यादा बड़ा हो जाता है या आसपास की निम्फ नॉड्स, स्ट्रक्चर्स और ऑर्गंस में फैल चुका है.

स्टेज 4 – इस स्टेज में कैंसर दूसरे फेफड़े तक फैल चुका होता है, फेफड़ों और दिल के आस-पास के फ्लुइड में फैल जाता है और शरीर के अन्य अंगों तक पहुंच जाता है.

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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.

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लेखक के बारे में

Seema Thakur

Seema Thakur

सीमा ठाकुर पत्रकारिता से पिछले 7 सालों से जुड़ी हैं. न्यूज24 में सीमा बतौर चीफ सब एडिटर काम कर रही हैं. सीमा हेल्थ और लाइफस्टाइल बीट पर लिखती हैं और कॉन्टेन्ट क्रिएशन के साथ ही टीम लीड की भूमिका भी निभा रही हैं. न्यूज24 में सीमा ने अपनी बीट से हटकर इलेक्शंस की स्टोरीज पर भी काम किया है. हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़ी स्टडीज, लेटेस्ट न्यूज और एक्सपर्ट्स/डॉक्टर्स से बातचीत पर आधारित लेख लिखने में सीमा की मजबूत पकड़ है. सीमा हेल्थ की खबरों और लेटेस्ट अपडेट के लिए AIIMS, ICMR, WHO,  स्वास्थ्य मंत्रालय जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों और डॉक्टरों के संपर्क में रहती हैं. अनुभव सीमा ने पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली प्रेस ग्रुप से की थी जहां वे सरिता, मुक्ता और गृहशोभा मैग्जीन में वुमेन ओरिएंटेड, सोशल, लाइफस्टाइल, हेल्थ और बॉलीवुड के अलावा पॉलिटकल आर्टिकल्स लिखती थीं. सीमा को प्रूफरीडिंग और एडिटिंग का भी खासा अनुभव है. प्रिंट में काम करने के दौरान सीमा की हिंदी भाषा में अच्छी पकड़ है. दिल्ली प्रेस के बाद सीमा डायमंड पब्लिशिंग हाउस से जुड़ी थीं जहां उन्होंने मैग्जीन और वेबसाइट दोनों के लिए काम किया. डायमंड पब्लिशिंग हाउस के बाद सीमा ने NDTV के साथ डिजिटल मीडिया में अपना करियर शुरू किया. NDTV में सीमा ने राइटर के साथ ही वीडियो प्रोड्यूसर, एंकर और पॉडकास्टर के तौर पर भी काम किया. लाइफस्टाइल वीडियोज और बॉलीवुड गोल्ड सीरीज को प्रोड्यूस और एंकर करने के साथ ही वे बॉलीवुड पॉडकास्ट किया करती थीं. वीडियो प्रोडक्शन में सीमा का इंटरेस्ट और पकड़ यहीं से आई है. शिक्षा सीमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज से बी.ए किया है. इसके बाद जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. जामिया की पीजी डिप्लोमा इन जर्नलिज्म डिपार्टमेंट की मैग्जीन में सीमा स्टूडेंट एडिटर और अपने बैच की कॉन्टेंट हेड रह चुकी हैं.
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