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बाइपोलर डिसऑर्डर के होते हैं ये 5 संकेत, जानें क्या कहते हैं एक्सपर्ट

बाइपोलर डिसऑर्डर एक ऐसी बीमारी है, जो आपके दिमाग को बुरी तरह से प्रभावित करता है। ये दो तरह के होते हैं, जो शारीरिक रूप से भी आपकी समस्या को बढ़ा सकते हैं। आइए जानते हैं कि इसके क्या-क्या संकेत होते हैं? 

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बाइपोलर डिसऑर्डर एक मानसिक स्थिति है, जिसमें व्यक्ति का मूड अचानक और ज्यादा बदलाव से प्रभावित होता है। यह मनोवैज्ञानिक रोग दो प्रमुख चरणों में होता है। मैनिक और डिप्रेसिव। इसके कारण कई सारी शारीरीक समस्या भी होती है। बाइपोलर डिसऑर्डर के दौरान, व्यक्ति लंबे समय तक उदासी, एक्टिव न रहना, थकान  असहायता और निराशा जैसे नकारात्मक विचारों का अनुभव करते हैं। साथ ही नींद न आना और भूख न लगना भी शामिल है। एक इंटरव्यू में  मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, साकेत के मानसिक स्वास्थ्य और व्यवहार विज्ञान विभाग के वरिष्ठ निदेशक और प्रमुख डॉ समीर मल्होत्रा ने बाइपोलर डिसऑर्डर के संकेतों के बारे में जानकारी दी।

मैनिक या हाइपोमेनिक एपिसोड के संकेत

1. बहुत खुश या उत्साहित महसूस करना।

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2. बिना किसी स्पष्ट कारण के ज्यादा बात करना या जल्दी-जल्दी बोलना।

3. विचारों का तेजी से आना या ध्यान का एक जगह से दूसरी जगह शिफ्ट होना।

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4. ज्यादा आत्मविश्वास या अभिमान।

5. नींद की जरूरत कम होना, जैसे कि बहुत कम सोना या बिल्कुल न सोना।

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6.  बिना सोचे-समझे फैसले लेना।

7. हर किसी के साथ गलत व्यवहार करना।

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डिप्रेसिव एपिसोड के संकेत

1. एनर्जी की कमी और थकान महसूस करना।

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2. रोजमर्रा के कामों में रुचि का न लगना।

4. आत्म-संवेदना में कमी।

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5. नींद की समस्याएं।

6. भूख में बदलाव, जैसे कि ज्यादा खाना या न खाना।

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7. आत्महत्या के विचार या फिर खुद को नुकसान पहुंचाना।

अन्य संकेत

1. मूड में अचानक और ज्यादा बदलाव होना।

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2. चिंता, घबराहट, और मानसिक तनाव महसूस होना।

4. सामाजिक संपर्क से बचने की प्रवृत्ति।

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बाइपोलर डिसऑर्डर से बचाव

तनाव से बचें- ज्यादा मानसिक तनाव या भावनात्मक उतार-चढ़ाव एपिसोड को ट्रिगर कर सकते हैं। इसके लिए आप मेडिटेशन, योग, या ध्यान जरूर करें।

रुटीन बनाएं- सोने और जागने का समय नियमित रखें। खाना, काम और आराम करने का समय तय करें

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सही नींद लें- नींद की कमी मैनिक एपिसोड को ट्रिगर कर सकती है। इसके लिए रोज रोज कम से कम 7 से 8 घंटे की नींद लें।

थेरेपी और काउंसलिंग- इस बीमारी से बचने के लिए CBT (Cognitive Behavioral Therapy) जैसी थेरेपी ले सकते हैं। इससे विचारों और भावनाओं को बेहतर समझने में मदद मिलती है।

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Disclaimer: ऊपर दी गई जानकारी पर अमल करने से पहले विशेषज्ञों से राय अवश्य लें। News24 की ओर से जानकारी का दावा नहीं किया जा रहा है।

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First published on: Apr 08, 2025 09:05 AM

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