तंबाकू नहीं लेते फिर भी हो रहा है ओरल कैंसर? ऑन्कोलॉजिस्ट ने बताया कौन-से हैं नए रिस्क 

आवाज में बदलाव या निगलने में परेशानी के रूप में दिखाई देते हैं. कई लोग इन्हें गंभीरता से नहीं लेते, जिसके कारण बीमारी का पता देर से चलता है. इसलिए अगर मुंह में कोई घाव, गांठ या बदलाव दो सप्ताह से अधिक समय तक बना रहे, तो तुरंत विशेषज्ञ से जांच करानी चाहिए. 

Why Does Tobacco Cause Oral Cancer

ओरल कैंसर होने का मुख्य कारण क्या है? 

Why Does Tobacco Cause Oral Cancer: लंबे समय तक यह माना जाता रहा कि ओरल कैंसर मुख्य रूप से तंबाकू और गुटखा सेवन करने वाले लोगों में ही होता है. हालांकि, इसको लेकर एक्सपर्ट डॉक्टर मनदीप सिंह (ऑन्कोलॉजिस्ट और आर्ट ऑफ हीलिंग कैंसर के संस्थापक) का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में ऐसे मामलों की संख्या बढ़ी है, जिनमें मरीजों ने कभी तंबाकू का सेवन नहीं किया, फिर भी उन्हें ओरल या ऑरोफेरिंजियल कैंसर का निदान हुआ. इस बदलते रुझान ने विशेषज्ञों का ध्यान उन नए जोखिम कारकों की ओर आकर्षित किया है, जो इस बीमारी के पीछे भूमिका निभा सकते हैं.

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ओरल कैंसर होने का मुख्य कारण क्या है? 

आज ओरल कैंसर के बढ़ते मामलों में ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV), विशेष रूप से HPV-16, एक महत्वपूर्ण कारण के रूप में उभरकर सामने आया है. यह वायरस मुंह और गले की कोशिकाओं को प्रभावित कर सकता है और कई साल बाद कैंसर का कारण बन सकता है. विशेष रूप से युवा और गैर-धूम्रपान करने वाले लोगों में HPV से जुड़े कैंसर के मामलों में तेजी देखी जा रही है. 

सेकेंड हैंड स्मोकिंग है जिम्मेदार 

कई एक्सपर्ट का यह भी मानना है कि सेकेंड हैंड स्मोकिंग यानी दूसरों के तंबाकू या सिगरेट के धुएं के लगातार संपर्क में रहना भी जोखिम को बढ़ा सकता है. भले ही व्यक्ति स्वयं धूम्रपान न करता हो, लेकिन लंबे समय तक धुएं में मौजूद हानिकारक रसायनों के संपर्क में रहने से मुंह और गले की कोशिकाओं को नुकसान पहुंच सकता है. ऐसे लोगों में भी ओरल कैंसर का खतरा बढ़ सकता है. 

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सिर और गर्दन के कैंसर क्यों बढ़ रहा है? 

वायु प्रदूषण भी एक उभरता हुआ जोखिम कारक माना जा रहा है. हवा में मौजूद सूक्ष्म कण (PM2.5 और PM10) शरीर में लगातार सूजन और कोशिकीय क्षति को बढ़ावा दे सकते हैं.कुछ अध्ययनों में लंबे समय तक प्रदूषित हवा के संपर्क को सिर और गर्दन के कैंसर के बढ़े हुए जोखिम से जोड़ा गया है. हालांकि, इस विषय पर अभी और शोध की जरूरत है, लेकिन इसे नजरअंदाज न करने की सलाह देते हैं. 

मुंह की खराब होना 

मुंह की खराब स्वच्छता और लंबे समय तक रहने वाली सूजन भी जोखिम को बढ़ा सकती है. टूटे हुए दांतों से बार-बार होने वाली चोट, खराब फिटिंग वाले डेंचर, मसूड़ों की बीमारी और लगातार संक्रमण मुंह की कोशिकाओं में बदलाव पैदा कर सकते हैं. कुछ शोधों में खराब ओरल हेल्थ को ओरल कैंसर के बढ़ते जोखिम से जोड़ा गया है. 

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खानपान संबंधी आदतें भी ओरल कैंसर के लिए जिम्मेदार 

आहार और जीवनशैली से जुड़े कारक भी चर्चा में हैं. फलों और हरी सब्जियों की कमी वाला आहार, अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड का सेवन तथा अधिक मात्रा में शर्करा युक्त पेय पदार्थों का सेवन शरीर में सूजन और कोशिकीय क्षमता को बढ़ा सकता है. हाल के अध्ययनों ने संकेत दिया है कि कुछ खानपान संबंधी आदतें भी ओरल कैंसर के जोखिम को प्रभावित कर सकती हैं. 

ओरल कैंसर का वक्त पर पता ना लग पाना 

ओरल कैंसर की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि शुरुआती लक्षण अक्सर सामान्य समस्याओं जैसे मुंह के छाले, सफेद या लाल धब्बे, जीभ में दर्द, आवाज में बदलाव या निगलने में परेशानी के रूप में दिखाई देते हैं. कई लोग इन्हें गंभीरता से नहीं लेते, जिसके कारण बीमारी का पता देर से चलता है. इसलिए अगर मुंह में कोई घाव, गांठ या बदलाव दो सप्ताह से अधिक समय तक बना रहे, तो तुरंत विशेषज्ञ से जांच करानी चाहिए.

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लेखक के बारे में

Shadma Muskan

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शादमा मुस्कान न्यूज 24 डिजिटल में सीनियर सब एडिटर हैं और हेल्थ व लाइफस्टाइल बीट कवर करती हैं. शादमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के डॉ. भीमराव अंबेडकर कॉलेज से BJMC और दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस से पीजी डिप्लोमा किया है. उन्होंने गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय, हिसार से MJMC की पढ़ाई भी की है. शादमा को पत्रकारिता के क्षेत्र में 5 साल से ज्यादा का अनुभव है. शादमा ने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका और हरिभूमि में इंटर्नशिप से की. इसके बाद, उन्होंने जागरण न्यू मीडिया की वेबसाइट हरज़िंदगी के साथ 4 साल से अधिक समय तक काम किया, जहां उन्होंने हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लेखन किया. इस दौरान उन्होंने ब्यूटी, फैशन, फूड, होम रेमेडीज, गार्डनिंग, होम डेकोर और पेरेंटिंग जैसे विषयों पर भी काम किया. इस अनुभव के दौरान शादमा ने अलग-अलग क्षेत्रों के कई विशेषज्ञों के साथ काम किया है. एक्सपर्ट ओपीनियन के आधार पर वह रीडर्स तक सटीक और आसान शब्दों में चीजों को पहुंचाने का काम कर रही हैं. कुल अनुभव - 5 साल पिछला अनुभव- शादमा ने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की. इसके बाद तहजीब टीवी, हरिभूमि और जागरण न्यू मीडिया की वेबसाइट के साथ चार साल तक हेल्थ और लाइफस्टाइल पर लिखा. किस क्षेत्र में महारत शादमा मुस्कान को लाइफस्टाइल, ट्रैवल, फूड और हेल्थ से जुड़े विषयों के बारे में काफी अच्छी जानकारी है. इसके अलावा शादमा को फूड रिव्यू, किचन गाइड, फैशन टिप्स, शॉपिंग गाइड, ब्यूटी, रिलेशनशिप और इंटीरियर पर वह विशेषज्ञों से बातचीत के आधार पर लिखती हैं.
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