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Monkeypox: एक सप्ताह में 20 फीसदी मामले बढ़े, देश में 35 हजार केस

जिनेवा: मंकीपॉक्स के चलते अब तक कुल 92 देशों में कुल 12 मौत हो चुकीं हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस एडनॉम घेब्रेयसस के अनुसार अब तक मंकीपॉक्स के कुल 35 हजार से अधिक मामले सामने आ चुके हैं। आगे महानिदेशक बोले पिछले सप्ताह करीब 7500 मामले सामने आए हैं। जो उससे […]

जिनेवा: मंकीपॉक्स के चलते अब तक कुल 92 देशों में कुल 12 मौत हो चुकीं हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस एडनॉम घेब्रेयसस के अनुसार अब तक मंकीपॉक्स के कुल 35 हजार से अधिक मामले सामने आ चुके हैं। आगे महानिदेशक बोले पिछले सप्ताह करीब 7500 मामले सामने आए हैं। जो उससे पहले सप्ताह की तुलना में 20 फीसदी अधिक हैं।

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महानिदेशक ने कहा की मंकीपॉक्स की रोकथाम के लिए टीका बेहद कारगार है। टीका मंकीपॉक्स के प्रकोप को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। यहीं वजह है कि कई प्रभावित देशों में टीकों की अधिक मांग है। इससे पहले

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नाम बदलने पर राय

WHO ने मंकीपॉक्स का नाम बदलने के लिए लोगों से उनकी राय मांगी थी। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी थी कि नाम उन लोगों के लिए कलंक हो सकता है जिनके नाम पर इसका नाम रखा गया था। जबकि वह लोग इसके प्रसार में बहुत कम भूमिका निभाते हैं। हाल ही में ब्राजील में मंकीपॉक्स के डर से लोगों द्वारा बंदरों पर हमला करने के मामले सामने आए हैं।

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वायरस की पहचान 1958 में

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मंकीपॉक्स को इसका नाम इसलिए मिला क्योंकि वायरस की पहचान मूल रूप से 1958 में डेनमार्क में अनुसंधान के लिए रखे गए बंदरों में हुई थी। लेकिन यह रोग कई जानवरों में पाया जाता है। अधिकांश यह चूहे, गिलहरी आदि में पाया जाता है। यह रोग पहली बार 1970 में कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य में मनुष्यों में खोजा गया था। तब से यह मनुष्यों में फैल गया था। तब से यह मुख्य रूप से कुछ पश्चिम और मध्य अफ्रीकी देशों तक सीमित है जहां यह स्थानिक है।

 

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First published on: Aug 17, 2022 07:42 PM

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About the Author

Amit Kasana

अमित कसाना: पत्रकारिता की दुनिया में एक सिद्धहस्त कहानीकार अमित कसाना सिर्फ खबरें नहीं लिखते बल्कि उन्हें बारीकी से संवारते हैं ताकि पाठकों तक सटीक, ताजा और प्रभावी जानकारी पहुंचे. News 24 में न्यूज एडिटर के रूप में उनकी भूमिका समाचारों को प्रस्तुत करने से कहीं अधिक है, वह उन्हें संदर्भ और दृष्टिकोण के साथ गढ़ते हैं. 2008 में 'दैनिक जागरण' से अपनी यात्रा शुरू करने वाले अमित ने 'दैनिक भास्कर' और 'हिंदुस्तान' जैसे प्रतिष्ठित प्रकाशनों में भी अपनी पहचान बनाई. 17 वर्षों के लंबे अनुभव के साथ उन्होंने पत्रकारिता के हर पहलू को बारीकी से समझा, चाहे वह प्रिंट, टेलीविजन या डिजिटल मीडिया हो. राजनीति, अपराध, खेल, मनोरंजन, कानून, ऑटोमोबाइल, लाइफस्टाइल और अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़े विषयों की रिपोर्टिंग में उनकी गहरी पकड़ है. ब्रेकिंग न्यूज की रोमांचक दुनिया, खोजी पत्रकारिता की गहराई और तथ्यपूर्ण रिपोर्टिंग का संयोजन अमित की कार्यशैली की पहचान है. News 24 में उनका लक्ष्य स्पष्ट है समाचारों को त्वरितता और सटीकता के साथ प्रस्तुत करना ताकि पाठकों को भरोसेमंद और सार्थक जानकारी मिल सके.

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