नीट पेपर लीक के बाद छात्रों के प्रदर्शन की वजह से मानसून सत्र के पहले सप्ताह में संसद नहीं चल पाई. पूरे सप्ताह संसद में इस मामले को लेकर हंगामा देखने को मिला. छात्रों की मांग थी कि धर्मेंद्र प्रधान शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दें. शनिवार को धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था. इसके बाद भी सोमवार को लोकसभा और राज्यसभा में हंगामा देखने को मिला. दोनों सदन विपक्षी सांसदों के विरोध और नारेबाजी की वजह से कई बार स्थगित करने पड़े.
जहां एक ओर छात्रों के प्रदर्शन का नेतृत्व कर रही कॉकरोच जनता पार्टी ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अपना धरना-प्रदर्शन वापस लेने का ऐलान कर दिया है. वहीं, विपक्षी पार्टियां अब 20 जुलाई को प्रदर्शन के दौरान दिल्ली और देश के दूसरे हिस्सों में छात्रों की पिटाई का मुद्दा उठा रही है.
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संसद में हंगामा तब हुआ जब सरकार ने लोकसभा में एंटी पेपर लीक बिल पेश किया. इस प्रस्तावित कानून का मकसद संगठित पेपर लीक और परीक्षा से जुड़ी धोखाधड़ी पर नकेल कसना है, जिसमें दोषियों के लिए 10 साल तक की जेल और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है. वहीं, राज्यसभा में राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026 पर चर्चा का प्रस्ताव रखा गया था, लेकिन हंगामे की वजह से दोनों सदन नहीं चल पाए.
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अब क्या मांग रहा विपक्ष?
विपक्ष ने सरकार पर छात्रों के खिलाफ पुलिस की बर्बरता को लेकर निशाना साधा है. लोकसभा में कांग्रेस के डिप्टी लीडर गौरव गोगोई ने कहा, '20 जुलाई को दिल्ली में बच्चों पर हुए हमले की जिम्मेदारी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की है. आज भी छात्रों के मन में डर का माहौल है. विरोध करने वाले छात्रों पर पुलिस कार्रवाई क्यों की जा रही है? हम चाहते हैं कि गृह मंत्री इस पर जवाब दें.'
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उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विपक्षी नेताओं को अस्पतालों में इलाज करा रहे घायल छात्रों से मिलने से रोका जा रहा है.
वहीं, राज्यसभा में कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने कहा कि विपक्ष की मांग साफ है कि गृह मंत्री सदन में आकर छात्रों पर हुए हमलों पर बयान दें, लेकिन सरकार इस पर तैयार नहीं है.
पवन खेड़ा ने कहा, 'हमारी मांग बिल्कुल साफ है. केंद्रीय गृह मंत्री को सदन में आकर बयान देना चाहिए. विपक्ष के जरिए उठाई जा रही छात्रों की आवाज सुनी जानी चाहिए. लेकिन सरकार ऐसा करने से इनकार कर रही है. इसीलिए संसद एक बार फिर नहीं चल सकी.'
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क्या कह रही सरकार?
दूसरी तरफ, सरकार ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह छात्रों और परीक्षा सुधारों से जुड़े अएहम कानूनों पर बहस में बाधा डाल रहा है. संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने लोकसभा में कहा कि सभी दलों के सांसदों ने इस बिल पर चर्चा की तैयारी की थी.
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उन्होंने कहा, 'यह एक अहम विधेयक है, जो युवाओं और छात्रों के जीवन से सीधे जुड़ा है. फिर भी कांग्रेस और उसके सहयोगी दल जानबूझकर इस पर चर्चा रोक रहे हैं. पहले विपक्ष परीक्षा सुधार पर चर्चा मांग रहा था, और अब जब बिल लाया गया है तो वे हंगामा कर रहे हैं.'