Sprouts vs Microgreens: स्प्राउट्स और माइक्रोग्रीन्स में क्या है अंतर? यहां जानिए कितने दिन में हो सकते हैं तैयार

अगर आप हेल्दी खाने के शौकीन हैं तो यकीनन स्प्राउट्स आपकी डाइट का हिस्सा रहे होंगे, लेकिन क्या कभी माइक्रोग्रीन्स का स्वाद चखा है? अगर नहीं, तो एक बार जरूर ट्राई करें क्योंकि यह भी पोषक तत्वों से भरपूर एक तरह का सुपरफूड है.

what is difference between sprouts and microgreens

इन चीजों को बनाने और इस्तेमाल करने का तरीका काफी अलग होता है. आप नीचे बताए गए टिप्स की मदद से दोनों के बीच में बेसिक अंतर समझ सकते हैं. Image Credit- AI

आजकल हेल्दी डाइट में स्प्राउट्स और माइक्रोग्रीन्स दोनों को काफी पसंद किया जा रहा है. हालांकि, ज्यादातर लोग स्प्राउट्स खाना पसंद करते हैं, जिसका इस्तेमाल सलाद, सैंडविच, पोहा या दूसरी डिशेज में किया जाता है. माइक्रोग्रीन्स का इस्तेमाल भी इन चीजों को हेल्दी बनाने के लिए किया जाता है, लेकिन स्प्राउट्स से इसका स्वाद काफी अलग होता है. इन दोनों को उगाने का तरीका, तैयार होने में लगने वाला समय और इस्तेमाल करने का तरीका अलग होता है. यह कहना गलत नहीं होगा कि स्प्राउट्स पहला स्टेप है और माइक्रोग्रीन्स उसके बाद बनना होना शुरू होता है. अगर आपको इन दोनों में अंतर नहीं मालूम को यह लेख आपके लिए मददगार साबित हो सकता है. 

विज्ञापन
विज्ञापन

स्प्राउट्स क्या होते हैं?

स्प्राउट्स बीजों को अंकुरित करने के बाद मिलने वाले छोटे पौधे होते हैं. इन्हें आमतौर पर मिट्टी की जरूरत नहीं होती, जिसे मूंग, चना, अल्फाल्फा और दूसरी दालों या बीजों को पानी में भिगोकर कुछ समय के लिए अंकुरित किया जाता है. सही वक्त और जगह मिलने से इनमें छोटी जड़ और अंकुर निकल आते हैं. आमतौर पर स्प्राउट्स 2 से 5 दिनों में खाने के लिए तैयार हो सकते हैं. 

माइक्रोग्रीन्स क्या होते हैं?

माइक्रोग्रीन्स पौधों की बहुत छोटी और कोमल पत्तियां होती हैं. इनके लिए बीजों को मिट्टी या किसी दूसरे ग्रोइंग मीडियम में लगाया जाता है. जब पौधे में पत्तियां निकल कर आने लगती हैं तब इन्हें काटकर इस्तेमाल किया जाता है. बता दें कि इसे मूली, सरसों, धनिया, मटर, ब्रोकोली और सूरजमुखी जैसे कई पौधों के माइक्रोग्रीन्स घर पर उगाए जा सकते हैं. आमतौर पर 7 से 21 दिनों के बीच काटा जा सकता है.

विज्ञापन

क्या है स्प्राउट्स और माइक्रोग्रीन्स में अंतर?

स्प्राउट्स और माइक्रोग्रीन्स में काफी अंतर होता है. इन चीजों को बनाने और इस्तेमाल करने का तरीका काफी अलग होता है. हम नीचे बताए गए टिप्स की मदद से दोनों के बीच में बेसिक अंतर समझ सकते हैं.  

  • स्प्राउट्स को पानी और गर्मी की मदद से अंकुरित किया जाता है, जबकि माइक्रोग्रीन्स को आमतौर पर मिट्टी या ग्रोइंग मीडियम में उगाया जाता है. 
  • स्प्राउट्स कुछ ही दिनों में तैयार हो सकते हैं, जबकि माइक्रोग्रीन्स को तैयार होने में आमतौर पर एक से तीन हफ्ते तक लग सकते हैं. 
  • स्प्राउट्स में अंकुर के साथ बीज और जड़ भी खाई जा सकती है. माइक्रोग्रीन्स में तने और उसकी शुरुआती पत्तियां इस्तेमाल की जाती हैं. 
  • स्प्राउट्स को सलाद, चाट और सैंडविच में शामिल किया जा सकता है. माइक्रोग्रीन्स को सलाद, सूप, पोहा, सैंडविच या दूसरी डिशेज के ऊपर गार्निशिंग के लिए इस्तेमाल किया जाता है. 

कितने दिन में हो सकते हैं तैयार?

स्प्राउट्स और माइक्रोग्रीन्स तैयार होने में अलग-अलग वक्त लगता है. स्प्राउट्स को तैयार होने में 1 हफ्ता या इससे कम वक्त लग सकता है. माइक्रोग्रीन्स को तैयार होने में 7 से 10 दिनों का वक्त आराम से लग सकता है. हालांकि, इन दोनों का वक्त जगह के हिसाब से भी बदल सकता है तो आपको इस बात पर खास ध्यान देना चाहिए. 

विज्ञापन

स्प्राउट्स और माइक्रोग्रीन्स में कौन ज्यादा हेल्दी है?

स्प्राउट्स और माइक्रोग्रीन्स दोनों ही पोषक तत्वों से भरपूर हो सकते हैं, लेकिन इनमें से किसी एक को हर इंसान के लिए ज्यादा हेल्दी कहना सही नहीं होगा.  हालांकि, कई रिसर्च बताती हैं कि माइक्रोग्रीन्स हेल्थ के लिए ज्यादा हेल्दी होती हैं. अगर आप इन्हें डाइट में शामिल करना चाहते हैं तो अलग-अलग तरह के स्प्राउट्स और माइक्रोग्रीन्स को अपनी डाइट का हिस्सा बना सकते हैं.

विज्ञापन

न्यूज 24 पर पढ़ें देश,राष्ट्रीय समाचार (National News),खेल,मनोरंजन,धर्म,लाइफ़स्टाइल,हेल्थ,शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।

First published on:

और पढ़ें: हमारे संपादकीय दिशानिर्देश और मानक यहाँ देखें।

लेख समाप्त

लेखक के बारे में

Shadma Muskan

Shadma Muskan

शादमा मुस्कान न्यूज 24 डिजिटल में सीनियर सब एडिटर हैं और हेल्थ व लाइफस्टाइल बीट कवर करती हैं. शादमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के डॉ. भीमराव अंबेडकर कॉलेज से BJMC और दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस से पीजी डिप्लोमा किया है. उन्होंने गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय, हिसार से MJMC की पढ़ाई भी की है. शादमा को पत्रकारिता के क्षेत्र में 5 साल से ज्यादा का अनुभव है. शादमा ने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका और हरिभूमि में इंटर्नशिप से की. इसके बाद, उन्होंने जागरण न्यू मीडिया की वेबसाइट हरज़िंदगी के साथ 4 साल से अधिक समय तक काम किया, जहां उन्होंने हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लेखन किया. इस दौरान उन्होंने ब्यूटी, फैशन, फूड, होम रेमेडीज, गार्डनिंग, होम डेकोर और पेरेंटिंग जैसे विषयों पर भी काम किया. इस अनुभव के दौरान शादमा ने अलग-अलग क्षेत्रों के कई विशेषज्ञों के साथ काम किया है. एक्सपर्ट ओपीनियन के आधार पर वह रीडर्स तक सटीक और आसान शब्दों में चीजों को पहुंचाने का काम कर रही हैं. कुल अनुभव - 5 साल पिछला अनुभव- शादमा ने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की. इसके बाद तहजीब टीवी, हरिभूमि और जागरण न्यू मीडिया की वेबसाइट के साथ चार साल तक हेल्थ और लाइफस्टाइल पर लिखा. किस क्षेत्र में महारत शादमा मुस्कान को लाइफस्टाइल, ट्रैवल, फूड और हेल्थ से जुड़े विषयों के बारे में काफी अच्छी जानकारी है. इसके अलावा शादमा को फूड रिव्यू, किचन गाइड, फैशन टिप्स, शॉपिंग गाइड, ब्यूटी, रिलेशनशिप और इंटीरियर पर वह विशेषज्ञों से बातचीत के आधार पर लिखती हैं.
... और पढ़ें

/ताज़ा खबरें

विज्ञापन
होम पेज पर वापस जाएँ