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‘धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा तो सिर्फ…’, राजघाट पहुंचकर क्या बोले सोनम वांगचुक?

Sonam Wangchuk On Raj Ghat: सोनम वांगचुक ने कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन खत्म होने के बाद अस्पताल से निकलकर सीधे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की समाधि राजघाट को अपनी पहली मंजिल के तौर पर चुना. इस दौरान उन्होंने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के अलावा एजुकेशन सिस्टम में सुधार की बात की.

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Sonam Wangchuk On Dharmendra Pradhan: एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने सोमवार, 27 जुलाई 2026 को कहा कि पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी चिंताओं को दूर करने की दिशा में सिर्फ पहला कदम है. गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद राजघाट पहुंचकर वांगचुक ने उम्मीद जताई कि सार्थक बातचीत से स्थायी सुधार होंगे.


इस्तीफे पर बोले वांगचुक

सोनम वांगचुक के मुताबिक, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को किसी मुद्दे के अंत के बजाय एक बड़े प्रॉसेस की शुरुआत के तौर पर देखा जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि अगर उठाए गए मसले को माना जाए और रचनात्मक बातचीत से उनका समाधान किया जाए, तो देश एक मजबूत और ज्यादा असरदार शिक्षा व्यवस्था की तरफ बढ़ सकता है. उन्होंने कहा कि मौजूदा बातचीत का नतीजा राष्ट्रीय हित में लिए गए फैसलों के तौर पर सामने आना चाहिए.

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छात्रों पर कार्रवाई न करने की अपील

सोनम वांगचुक ने अधिकारियों से ये भी अपील की कि वे शांतिपूर्ण विरोध के अपने लोकतांत्रिक अधिकार का इस्तेमाल करने वाले नागरिकों का सम्मान करें. उन्होंने जोर दिया कि अहिंसक प्रदर्शनों में हिस्सा लेने वालों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई नहीं होनी चाहिए, साथ ही ये भी कहा कि गैर-कानूनी गतिविधियों में शामिल लोगों से कानून को अलग तरह से निपटना चाहिए.

गांधी जी को श्रद्धांजलि

अस्पताल से निकलने के तुरंत बाद सोनम वांगचुक अपनी पत्नी गीतांजलि आंगमो के साथ महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देने नई दिल्ली के राजघाट गए. महात्मा गांधी की समाधि पर फूल चढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि 26 दिन की भूख हड़ताल और विरोध प्रदर्शन खत्म करने के बाद उन्होंने जान-बूझकर राजघाट को अपनी पहली मंजिल के तौर पर चुना.

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राजघाट को क्यों चुना?

सोनम वांगचुक ने कहा कि इस विजिट का मकसद महात्मा गांधी के प्रति आभार जताना और ये दोहराना था कि सत्य और अहिंसा के सिद्धांत आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने एक सदी पहले थे. वांगचुक ने पूरे विरोध प्रदर्शन के दौरान अनुशासन बनाए रखने के लिए समर्थकों को बधाई दी और कहा कि जो भी प्रगति हुई, वो जोर-जबरदस्ती या हिंसा के बजाय धैर्य, त्याग और शांतिपूर्ण प्रतिरोध से हासिल हुई.

लद्दाख लौटे वांगचुक

अपने एक्सपीरिंस के बारे में बात करते हुए वांगचुक ने कहा कि वो और उनके साथी कई सालों से लद्दाख में गांधीवादी तरीकों का पालन कर रहे हैं और उन्हें ये देखकर अच्छा लगा कि इसी तरह का नजरिया पूरे देश में देखने को मिल रहा है. उन्होंने भारत और दुनिया भर के लोगों से शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीकों से अपनी मांगें रखने की गुजारिश की और भरोसा जताया कि बातचीत औसे ही आखिरकार सार्थक बदलाव आते हैं. वांगचुक को हाल ही में जंतर-मंतर से उठाकर अस्पताल में भर्ती कराया गया था, क्योंकि कथित NEET-UG 2026 पेपर लीक को लेकर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान लंबे समय तक अनशन करने से उनकी सेहत बिगड़ गई थी. वांगचुक अब दिल्ली से अपने घर लद्दाख लौट गए हैं.

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First published on: Jul 27, 2026 07:53 PM

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