Arif Khan
आरिफ खान मंसूरी को डिजिटल मीडिया में करीब 15 वर्षों का अनुभव है . वर्तमान में न्यूज24 की डिजिटल विंग में कार्यरत हैं. इससे पहले देश के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं.
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अमेरिका-इजरायल और ईरान में जारी युद्ध के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य का रास्ता बंद कर दिया गया है. इस रास्ते से ग्लोबल ऑयल एंड गैस का पांचवां हिस्सा सप्लाई होता है. इजरायल और अमेरिका के हमले के बाद ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) ने जहाजों को मैसेज भेजा कि जलडमरूमध्य बंद कर दिया गया है. इसके बाद से जहाज इस रास्ते से नहीं जा रहे हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, सैकड़ों टैंकरों ने खाड़ी जल में लंगर डाले हुए हैं.
होर्मुज जलडमरूमध्य, ईरान और ओमान के बीच एक संकरा जलमार्ग है. यह रास्ता फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है. इसे दुनिया का तेल सप्लाई के लिए अहम चेकपॉइंट माना जाता है. इस रास्ते के जरिए ग्लोबल ऑयल एंड गैस कंजम्पशन का करीब पांचवां हिस्सा सप्लाई होता है. रोजाना करीब 15 मिलियन बैरल क्रूड ऑयल इस रास्ते के जरिए सप्लाई होता है. हालांकि, खाड़ी देशों में जलमार्ग को बायपास करने के लिए कुछ पाइपलाइनें मौजूद हैं, लेकिन उनकी क्षमता सीमित है.
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इस जलडमरूमध्य के बंद होने का असर भारत सहित कई देशों पर पड़ेगा. यह असर उन पर सबसे ज्यादा पड़ेगा, जो तेल और गैस इंपोर्ट के के बड़े हिस्से के लिए इस रास्ते पर निर्भर हैं. यह रूट जितने लंबे समय तक बंद रहेगा, संकट उतना ज्यादा गहराता जाएगा.
इस रूट के लंबे समय तक बंद रहने की सूरत में भारत के पास दूसरे विकल्प भी हैं. हालांकि, युद्ध की वजह से कीमत ज्यादा चुकानी पड़ सकती है. भारत की क्रूड ऑयल के लिए इस रास्ते पर ज्यादा निर्भरता नहीं है. लेकिन एलपीजी और एलएनजी गैस के लिए भारत इस रास्ते पर ज्यादा निर्भर है. ऐसे में भारत के सामने बड़ी चुनौती इनकी सप्लाई सुनिश्चित करना है.
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भारत के कुल ऑयल इंपोर्ट का आधा हिस्सा (करीब 2.5-2.7 मिलियन बैरल प्रति दिन) इराक, सऊदी अरब, यूएई और कुवैत जैसे देशों से इस रास्ते से आता है. भारत दुनिया में क्रूड ऑयल का तीसरा सबसे बड़ा कंजूमर है. जिसमें से 88 फीसदी ऑयल इंपोर्ट करना पड़ता है. देश में खपत होने वाली गैस भी ज्यादातर दूसरे देशों से इंपोर्ट की जाकती है.
भारतीय रिफाइनरों के पास पहले से ही 10 दिनों से ज्यादा खपत के लिए क्रूड ऑयल है. इसके अलावा करीब एक सप्ताह का फ्यूल स्टॉक है. इंपोर्ट की कमी पूरी करने के लिए भारत अपने स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व्स का इस्तेमाल कर सकता है. गैर-होर्मुज क्षेत्रों से स्पॉट खरीद में तेजी ला सकता है और दूसरे सप्लायर्स के साथ कॉन्ट्रेक्ट कर सकता है. रूस, अमेरिका, पश्चिम अफ्रीका और लैटिन अमेरिका से तेल खरीद बढ़ा सकता है.
हिंद महासागर और अरब महासागर क्षेत्र में मौजूद रूस के ऑयल कार्गों से ऑयल सप्लाई में मदद ली जा सकती है. रशियन ऑयल का ये स्टोरेज इसलिए इस क्षेत्र में है, क्योंकि भारत काफी कम मात्रा में रशियन क्रूड ऑयल ले रहा है.
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भारत के पास LNG और LPG के लिए कोई स्ट्रक्चरल बफर्स नहीं हैं. भारत का करीब 60% LNG इंपोर्ट इसी रास्ते से आता है. LPG और LNG की स्पॉट कार्गो अवेलेबिलिटी भी कम है, यानी कमी होने के सूरत में इसकी दूसरे स्रोत या तरीके से इसकी सप्लाई नहीं हो सकती. होर्मुज के लंबे समय तक बंद रहने पर इन दोनों की सप्लाई के लिए मुश्किल हो सकती है.
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