Explainer : युद्ध के बीच बंद हुआ दुनिया का सबसे बड़ा 'ऑयल रूट', भारत में LPG पर संकट; मोदी सरकार के पास क्या है 'प्लान-B'?

होर्मुज जलडमरूमध्य, ईरान और ओमान के बीच एक संकरा जलमार्ग है. यह रास्ता फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है. इसे दुनिया का तेल सप्लाई के लिए अहम चेकपॉइंट माना जाता है.

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अमेरिका-इजरायल और ईरान में जारी युद्ध के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य का रास्ता बंद कर दिया गया है. इस रास्ते से ग्लोबल ऑयल एंड गैस का पांचवां हिस्सा सप्लाई होता है. इजरायल और अमेरिका के हमले के बाद ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) ने जहाजों को मैसेज भेजा कि जलडमरूमध्य बंद कर दिया गया है. इसके बाद से जहाज इस रास्ते से नहीं जा रहे हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, सैकड़ों टैंकरों ने खाड़ी जल में लंगर डाले हुए हैं.

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क्या है होर्मुज जलडमरूमध्य?

होर्मुज जलडमरूमध्य, ईरान और ओमान के बीच एक संकरा जलमार्ग है. यह रास्ता फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है. इसे दुनिया का तेल सप्लाई के लिए अहम चेकपॉइंट माना जाता है. इस रास्ते के जरिए ग्लोबल ऑयल एंड गैस कंजम्पशन का करीब पांचवां हिस्सा सप्लाई होता है. रोजाना करीब 15 मिलियन बैरल क्रूड ऑयल इस रास्ते के जरिए सप्लाई होता है. हालांकि, खाड़ी देशों में जलमार्ग को बायपास करने के लिए कुछ पाइपलाइनें मौजूद हैं, लेकिन उनकी क्षमता सीमित है.

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किस पर पड़ेगा ज्यादा असर?

इस जलडमरूमध्य के बंद होने का असर भारत सहित कई देशों पर पड़ेगा. यह असर उन पर सबसे ज्यादा पड़ेगा, जो तेल और गैस इंपोर्ट के के बड़े हिस्से के लिए इस रास्ते पर निर्भर हैं. यह रूट जितने लंबे समय तक बंद रहेगा, संकट उतना ज्यादा गहराता जाएगा.

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भारत के पास क्या हैं विकल्प?

इस रूट के लंबे समय तक बंद रहने की सूरत में भारत के पास दूसरे विकल्प भी हैं. हालांकि, युद्ध की वजह से कीमत ज्यादा चुकानी पड़ सकती है. भारत की क्रूड ऑयल के लिए इस रास्ते पर ज्यादा निर्भरता नहीं है. लेकिन एलपीजी और एलएनजी गैस के लिए भारत इस रास्ते पर ज्यादा निर्भर है. ऐसे में भारत के सामने बड़ी चुनौती इनकी सप्लाई सुनिश्चित करना है.

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तीसरा बड़ा क्रूड ऑयल कंजूमर

भारत के कुल ऑयल इंपोर्ट का आधा हिस्सा (करीब 2.5-2.7 मिलियन बैरल प्रति दिन) इराक, सऊदी अरब, यूएई और कुवैत जैसे देशों से इस रास्ते से आता है. भारत दुनिया में क्रूड ऑयल का तीसरा सबसे बड़ा कंजूमर है. जिसमें से 88 फीसदी ऑयल इंपोर्ट करना पड़ता है. देश में खपत होने वाली गैस भी ज्यादातर दूसरे देशों से इंपोर्ट की जाकती है.

रूस बन सकता है ‘संकटमोचक’!

भारतीय रिफाइनरों के पास पहले से ही 10 दिनों से ज्यादा खपत के लिए क्रूड ऑयल है. इसके अलावा करीब एक सप्ताह का फ्यूल स्टॉक है. इंपोर्ट की कमी पूरी करने के लिए भारत अपने स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व्स का इस्तेमाल कर सकता है. गैर-होर्मुज क्षेत्रों से स्पॉट खरीद में तेजी ला सकता है और दूसरे सप्लायर्स के साथ कॉन्ट्रेक्ट कर सकता है. रूस, अमेरिका, पश्चिम अफ्रीका और लैटिन अमेरिका से तेल खरीद बढ़ा सकता है.

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हिंद महासागर और अरब महासागर क्षेत्र में मौजूद रूस के ऑयल कार्गों से ऑयल सप्लाई में मदद ली जा सकती है. रशियन ऑयल का ये स्टोरेज इसलिए इस क्षेत्र में है, क्योंकि भारत काफी कम मात्रा में रशियन क्रूड ऑयल ले रहा है.

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गैस सप्लाई बड़ी चुनौती

भारत के पास LNG और LPG के लिए कोई स्ट्रक्चरल बफर्स नहीं हैं. भारत का करीब 60% LNG इंपोर्ट इसी रास्ते से आता है. LPG और LNG की स्पॉट कार्गो अवेलेबिलिटी भी कम है, यानी कमी होने के सूरत में इसकी दूसरे स्रोत या तरीके से इसकी सप्लाई नहीं हो सकती. होर्मुज के लंबे समय तक बंद रहने पर इन दोनों की सप्लाई के लिए मुश्किल हो सकती है.

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लेखक के बारे में

Arif Khan

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आरिफ खान मंसूरी न्यूज 24 में बतौर डिप्टी न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. आरिफ को डिजिटल पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा अनुभव हैं. उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लगातार तीन लोकसभा चुनाव के अलावा पिछले 15 सालों में देशभर में हुए विधानसभा चुनावों की भी व्यापक कवरेज की है. न्यूज 24 से पहले उन्होंने देश के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की थी, यहां देश, दुनिया और पॉलिटिक्स की खबरों पर काम किया. आरिफ ने इसके बाद इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप की हिंदी वेबसाइट जनसत्ता के साथ अपनी पारी शुरू की. इसके बाद उन्होंने हिंदुस्तान टाइम्स की हिंदी न्यूज वेबसाइट लाइवहिंदुस्तान ज्वाइन कर लिया. लाइवहिंदुस्तान.कॉम के बाद वह एनडीटीवी ग्रुप के साथ जुड़ गए. एनडीटीवी में करीब छह साल तक काम करने के बाद न्यूज24 के साथ जुड़ गए. न्यूज24 में भी होमपेज की जिम्मेदारी संभालते हैं. शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से कला संकाय में स्नातक और मास्टर ऑफ जर्नलिज्म की डिग्री हासिल की है. आरिफ देश, विदेश और राजनीति से जुड़ी खबरों के अलावा एक्सप्लेनर लिखने में भी माहिर हैं.
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