Arif Khan
आरिफ खान मंसूरी को डिजिटल मीडिया में करीब 15 वर्षों का अनुभव है . वर्तमान में न्यूज24 की डिजिटल विंग में कार्यरत हैं. इससे पहले देश के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं.
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अमेरिका-इजरायल के हमलों के बीच ईरान ने दावा किया है कि हमारे परमाणु ठिकानों पर हमला किया गया है. हालांकि, अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने कहा है कि अब तक ईरान के किसी भी परमाणु ठिकाने पर हमला नहीं हुआ है, लेकिन ‘रेडियोएक्टिव लीकेज’ की संभावना को टाला नहीं जा सकता. आईएईए के महानिदेशक राफेल ग्रोसी ने गहरी चिंता व्यक्त करते हुए सभी पक्षों से संयम बरतने और परमाणु ठिकानों पर किसी भी तरह के हमले से बचने की अपील की है.
IAEA में ईरान के राजदूत रेजा नजाफी ने कहा कि इजरायल और अमेरिका ने नतान्ज न्यूक्लियर फैसिलिटी पर हमला किया है. बता दें, अमेरिका और इजरायल का कहना है कि ईरान परमाणु हथियार बनाना चाहता है. हालांकि, ईरान इसका बार-बार खंडन करता रहा है.
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इस बीच वियना में इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की इमरजेंसी मीटिंग हुई. रूस के अनुरोध पर बुलाई गई मीटिंग में US और इजरायली हमलों पर चर्चा की गई. मिडिल ईस्ट में जारी भीषण युद्ध के बीच ‘परमाणु ऊर्जा’ की निगरानी करने वाली संस्था IAEA की भूमिका सबसे अहम हो गई है. आखिर यह संस्था क्या है, यह कैसे बनी और युद्ध के इस दौर में इसके क्या मायने हैं?
8 दिसंबर 1953 को अमेरिकी राष्ट्रपति आइजनहावर ने संयुक्त राष्ट्र में ‘Atoms for Peace’ भाषण दिया, जिसने इस संस्था की नींव रखी. दूसरे विश्व युद्ध के बाद परमाणु तकनीक को लेकर दुनिया में गहरा डर था, लेकिन साथ ही इसके शांति के मकसद से इसके इस्तेमाल की उम्मीदें भी थीं. आइजनहावर ने तब कहा था कि परमाणु विखंडन बंटी हुई दुनिया को एकजुट करने का जरिया बन सकता है. इस संस्था की स्थापना के प्रस्ताव पर अक्तूबर 1956 में 81 देशों ने निर्विरोध मंजूरी दी थी. 29 जुलाई 1957 को IAEA की स्थापना पर अंतिम मुहर लगी थी.
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IAEA का काम केवल निगरानी करना नहीं है. यह संस्थान दुनिया भर में परमाणु ऊर्जा के इस्तेमाल को स्वास्थ्य, शांति और समृद्धि के लिए बढ़ावा देना. इसके साथ ही ये एजेंसी यह भी सुनिश्चित करती है कि एजेंसी की मदद या देखरेख में चलने वाली किसी भी परमाणु सामग्री का इस्तेमाल सैन्य एक्शन के लिए ना हो.

IAEA का मुख्य कार्यालय ऑस्ट्रिया की राजधानी वियना में है. साल 1957 में पहली जनरल कॉन्फ्रेंस में वियना को मुख्यालय चुना गया था. इसके अलावा इसके रीजनल ऑफिस जापान के टोक्यो और कनाडा के टोरंटो में है. इसके अलावा इस संस्था वियना, सीबर्सडॉर्फ (ऑस्ट्रिया) और मोनाको में एडवांस लैब हैं, जो न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी पर रिसर्च करती हैं.
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युद्ध और शांति के अभियानों के लिए IAEA को भारी फंड की जरूरत होती है. इसके फंड के लिए तीन सोर्स हैं, पहला संस्था के सदस्य देश इसके लिए मैंडेटरी फंड देते हैं. इसका इस्तेमाल ऑपरेशनल खर्च और इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए होता है. दूसरा सोर्स है, टेक्निकल कॉर्पोरेशन फंड, इसके लिए सदस्य देश अपनी मर्जी से संस्था को पैसे देते हैं. इसके अलावा साल 2010 में एक पहल ‘पीसफुल यूजेस इनिशिएटिव’ (PUI) शुरू की गई थी, जिसके जरिए भी फंड जुटाया जाता है.
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