Explainer : क्या है IAEA… जिसकी हो रही मिडिल ईस्ट युद्ध के बीच चर्चा; कौन देता है इसे फंड और क्या है इसका काम?

IAEA में ईरान के राजदूत ने कहा कि इजरायल और अमेरिका ने नतान्ज न्यूक्लियर फैसिलिटी पर हमला किया है. हालांकि, IAEA का कहना है कि अब तक किसी भी परमाणु ठिकाने पर हमला नहीं हुआ है.

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अमेरिका-इजरायल के हमलों के बीच ईरान ने दावा किया है कि हमारे परमाणु ठिकानों पर हमला किया गया है. हालांकि, अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने कहा है कि अब तक ईरान के किसी भी परमाणु ठिकाने पर हमला नहीं हुआ है, लेकिन ‘रेडियोएक्टिव लीकेज’ की संभावना को टाला नहीं जा सकता. आईएईए के महानिदेशक राफेल ग्रोसी ने गहरी चिंता व्यक्त करते हुए सभी पक्षों से संयम बरतने और परमाणु ठिकानों पर किसी भी तरह के हमले से बचने की अपील की है.

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IAEA में ईरान के राजदूत रेजा नजाफी ने कहा कि इजरायल और अमेरिका ने नतान्ज न्यूक्लियर फैसिलिटी पर हमला किया है. बता दें, अमेरिका और इजरायल का कहना है कि ईरान परमाणु हथियार बनाना चाहता है. हालांकि, ईरान इसका बार-बार खंडन करता रहा है.

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इस बीच वियना में इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की इमरजेंसी मीटिंग हुई. रूस के अनुरोध पर बुलाई गई मीटिंग में US और इजरायली हमलों पर चर्चा की गई. मिडिल ईस्ट में जारी भीषण युद्ध के बीच ‘परमाणु ऊर्जा’ की निगरानी करने वाली संस्था IAEA की भूमिका सबसे अहम हो गई है. आखिर यह संस्था क्या है, यह कैसे बनी और युद्ध के इस दौर में इसके क्या मायने हैं?

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‘एटम्स फॉर पीस’ के साथ स्थापना

8 दिसंबर 1953 को अमेरिकी राष्ट्रपति आइजनहावर ने संयुक्त राष्ट्र में ‘Atoms for Peace’ भाषण दिया, जिसने इस संस्था की नींव रखी. दूसरे विश्व युद्ध के बाद परमाणु तकनीक को लेकर दुनिया में गहरा डर था, लेकिन साथ ही इसके शांति के मकसद से इसके इस्तेमाल की उम्मीदें भी थीं. आइजनहावर ने तब कहा था कि परमाणु विखंडन बंटी हुई दुनिया को एकजुट करने का जरिया बन सकता है. इस संस्था की स्थापना के प्रस्ताव पर अक्तूबर 1956 में 81 देशों ने निर्विरोध मंजूरी दी थी. 29 जुलाई 1957 को IAEA की स्थापना पर अंतिम मुहर लगी थी.

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क्या करती है ये काम?

IAEA का काम केवल निगरानी करना नहीं है. यह संस्थान दुनिया भर में परमाणु ऊर्जा के इस्तेमाल को स्वास्थ्य, शांति और समृद्धि के लिए बढ़ावा देना. इसके साथ ही ये एजेंसी यह भी सुनिश्चित करती है कि एजेंसी की मदद या देखरेख में चलने वाली किसी भी परमाणु सामग्री का इस्तेमाल सैन्य एक्शन के लिए ना हो.

कहां है इसका हेडक्वार्टर?

IAEA का मुख्य कार्यालय ऑस्ट्रिया की राजधानी वियना में है. साल 1957 में पहली जनरल कॉन्फ्रेंस में वियना को मुख्यालय चुना गया था. इसके अलावा इसके रीजनल ऑफिस जापान के टोक्यो और कनाडा के टोरंटो में है. इसके अलावा इस संस्था वियना, सीबर्सडॉर्फ (ऑस्ट्रिया) और मोनाको में एडवांस लैब हैं, जो न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी पर रिसर्च करती हैं.

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कौन उठाता है इसका खर्च?

युद्ध और शांति के अभियानों के लिए IAEA को भारी फंड की जरूरत होती है. इसके फंड के लिए तीन सोर्स हैं, पहला संस्था के सदस्य देश इसके लिए मैंडेटरी फंड देते हैं. इसका इस्तेमाल ऑपरेशनल खर्च और इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए होता है. दूसरा सोर्स है, टेक्निकल कॉर्पोरेशन फंड, इसके लिए सदस्य देश अपनी मर्जी से संस्था को पैसे देते हैं. इसके अलावा साल 2010 में एक पहल ‘पीसफुल यूजेस इनिशिएटिव’ (PUI) शुरू की गई थी, जिसके जरिए भी फंड जुटाया जाता है.

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लेखक के बारे में

Arif Khan

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आरिफ खान मंसूरी न्यूज 24 में बतौर डिप्टी न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. आरिफ को डिजिटल पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा अनुभव हैं. उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लगातार तीन लोकसभा चुनाव के अलावा पिछले 15 सालों में देशभर में हुए विधानसभा चुनावों की भी व्यापक कवरेज की है. न्यूज 24 से पहले उन्होंने देश के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की थी, यहां देश, दुनिया और पॉलिटिक्स की खबरों पर काम किया. आरिफ ने इसके बाद इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप की हिंदी वेबसाइट जनसत्ता के साथ अपनी पारी शुरू की. इसके बाद उन्होंने हिंदुस्तान टाइम्स की हिंदी न्यूज वेबसाइट लाइवहिंदुस्तान ज्वाइन कर लिया. लाइवहिंदुस्तान.कॉम के बाद वह एनडीटीवी ग्रुप के साथ जुड़ गए. एनडीटीवी में करीब छह साल तक काम करने के बाद न्यूज24 के साथ जुड़ गए. न्यूज24 में भी होमपेज की जिम्मेदारी संभालते हैं. शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से कला संकाय में स्नातक और मास्टर ऑफ जर्नलिज्म की डिग्री हासिल की है. आरिफ देश, विदेश और राजनीति से जुड़ी खबरों के अलावा एक्सप्लेनर लिखने में भी माहिर हैं.
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