Explainer: भारत में कौन कराता है जनगणना, क्या है इतिहास और कौन था जनक? पढ़ें Census से जुड़े 9 बड़े घटनाक्रम

भारत में जनगणना का इतिहास अंग्रेजों के राज से जुड़ा है और 1881 से हर 10 साल बाद जनगणना कराई जा रही है. 1881 से अब तक देश में 15 बार जनगणना हो चुकी है और 16वीं जनगणना के आंकड़े साल 2027 में जारी किए जाएंगे. आइए भारत में जनगणना के बारे में विस्तार से बात करते हैं…

Census 2027 | Indian Constitution | Home Ministry

कोरोना काल के कारण साल 2021 में जनगणना नहीं कराई जा सकी थी. (Credit- AI)

भारत में 16वीं जनगणना चल रही है, जिसके आंकड़े साल 2027 में जारी किए जाएंगे. दरअरल, जनगणना 2021 में कराई जानी थी, लेकिन कोरोना महामारी फैलने के कारण संभव नहीं हुई, इसलिए अब कराई जा रही है. 1947 में आजादी मिलने के बाद 8वीं और पहली ऑनलाइन जनगणना कराई जा रही है. वहीं जनगणना 2 चरणों में होगी, जिसमें पहले चरण में देशभर में मकानों की लिस्टिंग की जाएगी और दूसरे चरण में लोगों की कैटेगरीवाइज संख्या काउंट की जाएगी. पहला चरण अप्रैल 2026 में शुरू हुआ था और दूसरा चरण फरवरी 2027 में शुरू होगा. पहली बार मोबाइल ऐप और ऑनलाइन पोर्टल के जरिए डेटा कलेक्ट किया जा रहा है और पहली बार जातिगत जनगणना भी की जा रही है, यानी पहली बार देश में जातियां भी गिनी जाएंगी.

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भारत में कौन कराता है जनगणना?

भारत में जनगणना केंद्रीय गृह मंत्रालय के द्वारा कराई जाती है, जिसके लिए महारजिस्ट्रार एवं जनगणना आयुक्त नियुक्त किए जाते हैं. वर्तमान रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त उत्तर प्रदेश कैडर के 1995 बैच के IAS मृत्युंजय कुमार नारायण हैं, जिन्होंने नवंबर 2022 में पद संभाला था. इनका काम जनगणना की योजना बनाना, अधिकारियों की नियुक्ति करना, आंकड़े जुटाना और रिपोर्ट के रूप में सरकार के सामने पेश करना है. भारत में जनगणना के लिए जनगणना अधिनियम 1948 में नियम बनाए गए हैं. भारतीय संविधान के अनुच्छेद-246 के अनुसार जनगणना संघ (केंद्र सरकार) का विषय है, जो संविधान की 7वीं अनुसूची में दर्ज है. जनगणना में जुटाए गए आंकड़े इतने सीक्रेट होते हैं कि कोर्ट को भी उपलब्ध नहीं होते.

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भारत में जनगणना का जनक कौन?

रिकॉर्ड के अनुसार, भारत में जनगणना के जनक हेनरी वाल्टर हैं, जिन्होंने 1830 में ढाका में प्लानिंग के तहत जनगणना कराई थी, लेकिन ढाका आज बांग्लादेश की राजधानी है, जो भारत के बंटवारे से अलग देश बना है. 1830 के बाद 1872 में ब्रिटिश वायसराय लॉर्ड मेयो ने पहली बार भारत में जनगणना कराई थी. 1881 से रेगुलर हर 10 साल बाद जनगणना कराई जा रही है. इस सिस्टम के तहत सबसे पहले 1881 में डब्ल्यू.सी. प्लोडेन के नेतृत्व में जनगणना कराई गई थी.

भारत में जनगणना का इतिहास क्या है?

भारत में जनगणना का इतिहास ‘ऋग्वेद’ में मिलता है. भारत में 800-600 ईसा पूर्व के दौरान जनसंख्या कराई जाती थी, ताकि पता चले कि कितने लोग एक देश छोड़कर दूसरे में गए और क्यों गए? ‘कौटिल्य’ के द्वारा लिखे गए ‘अर्थशास्त्र’ ने टैक्स लगाने और स्टेट पॉलिसी बनाने के लिए जनसंख्या कराई जाती थी. मुगल बादशाह अकबर के राज में ‘आइन-ए-अकबरी’ नामक रिपोर्ट में जनसंख्या, उद्योग और अन्य जानकारियां शामिल होती थीं.

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भारत की जनगणना संबंधी प्रमुख घटनाएं

पहली जनगणना (वर्ष 1881) में कराई गई थी, जिसमें कश्मीर, फ्रेंच तथा पुर्तगाली उपनिवेशों को छोड़कर ब्रिटिश भारत का जनसांख्यिकीय, आर्थिक और सामाजिक विशेषताओं के आधार पर वर्गीकरण किया गया था.

दूसरी जनगणना (वर्ष 1891) में कराई गई थी, जिसमें 1881 की जनगणना के पैटर्न से जनसंख्या गिनी गई थी, लेकिन इसमें बर्मा के ऊपरी हिस्से, कश्मीर और सिक्किम को भी शामिल किया गया था.

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तीसरी जनगणना (वर्ष 1901) में जिसमें बलूचिस्तान, राजपूताना, अंडमान निकोबार, बर्मा, पंजाब और कश्मीर के सुदूर इलाकों को भी शामिल किया गया था.

5वीं जनगणना (वर्ष 1921) में हुई थी, जिसमें 1911-21 के दशकों में जनसंख्या में 0.31% की गिरावट आई थी. 1918 में फ्लू महामारी फैली थी, जिसमें करीब 12 मिलियन लोगों की जान गई थी. 1921 के जनगणना वर्ष को द ग्रेट डिवाइड या महान विभाजक वर्ष कहा जाता है. इस वर्ष के बाद आज तक देश की जनसंख्या बढ़ रही है.

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11वीं जनगणना (वर्ष 1971) में हुई थी, जिसमें शादीशुद महिलाओं की बच्चे पैदा करने की क्षमता के बारे में जानकारी के लिए प्रश्न पूछे गए थे.

13वीं जनगणना (वर्ष 1991) में हुई आजाद भारत की 5वीं जनगणना थी. इस जनगणना के बाद 7 से ज्यादा उम्र के बच्चों को साक्षर माना गया था, जबकि 1981 तक 4 साल की उम्र से ज्यादा के बच्चों को साक्षर माना जाता था.

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14वीं जनगणना (2001) में हुई थी, जिसमें जनगणना के डेटा को हाई स्पीड स्कैनर से स्कैन करके इंटेलिजेंट कैरेक्टर रीडिंग (ICR) के जरिए डिजिटलाइज किया गया था.

15वीं जनगणना (वर्ष 2011) में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान और ओडिशा में जनसंख्या में पहली बार गिरावट देखी गई थी.

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16वीं जनगणना (2021) में होनी थी, लेकिन कोविड-19 महामारी के कारण स्थगित कर दिया गया था. पहली डिजिटल जनगणना होगी, जिसमें स्वगणना का विकल्प भी दिया गया है. वहीं पहली बार जनगणना के फॉर्म में ट्रांसजेंडर का कॉलम भी रखा गया है.

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लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
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