Arif Khan
आरिफ खान मंसूरी को डिजिटल मीडिया में करीब 15 वर्षों का अनुभव है . वर्तमान में न्यूज24 की डिजिटल विंग में कार्यरत हैं. इससे पहले देश के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं.
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त्योहार के वक्त लोग जमकर खरीदारी करते हैं, लेकिन इस बार तस्वीर थोड़ी बदली हुई है. कपड़े और फैंसी चीजों को तो छोड़ ही दें, लोग सामान्य जरूरत की चीजें खरीदने के बारे में भी सोच रहे हैं. ताजा उदाहरण चीनी का है, जिसकी कीमतों में करीब 40 फीसदी का इजाफा हुआ है. चीनी के अलावा प्याज, चावल, दालें, सब्जियां, खाने का तेल और अन्य खाद्य चीजों के भी दाम बढ़े हैं. इसका सीधा असर लोगों की जेब पर पड़ रहा है.
RBI की अगस्त की मंथली रिपोर्ट के मुताबिक, 1 से 21 अगस्त के बीच जरूरी चीजों के दाम में काफी इजाफा हुआ है. इस दौरान प्याज की कीमत 11% से ज्यादा बढ़ी है. RBI ने इस बढ़ोतरी के पीछे कई वजहें बताई हैं, जिनमें गल्फ क्राइसिस, होर्मुज स्ट्रेट, खराब मौसम और अल नीनो का असर शामिल है. त्योहारों के मौसम की मांग को पूरा करने के सरकारी कोशिशों के बावजूद चीनी करीब 70 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई हैं.
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चावल, दाल, सब्जियां और खाने वाले तेल की कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई है. RBI के डेटा से पता चलता है कि खाने-पीने की कई दूसरी चीजों की कीमतें भी बढ़ी हैं. चावल की कीमतों में 0.1 फीसदी और दालों की कीमतों में 0.6 फीसदी का इजाफा हुआ है. अलग-अलग दालों की बात करें तो चना दाल 0.5 फीसदी और अरहर दाल 0.4 फीसदी महंगी हुई है. महंगाई का असर खाने वाले तेल की कीमतों पर भी देखा गया है. सरसों के तेल की कीमतों में 1.6 फीसदी और मूंगफली के तेल की कीमतों में 1 फीसदी का इजाफा हुआ है. सूरजमुखी तेल और पाम ऑयल की कीमतों में करीब 0.9 फीसदी की बढ़ोतरी हुई.

मिडिल ईस्ट क्राइसिस के बीच संयुक्त राष्ट्र ने ग्लोबल फूड सिक्योरिटी को लेकर चिंता जाहिर की है. होर्मुज स्ट्रेट में आवागमन सामान्य नहीं होने की वजह से सामान की कीमतों पर असर पड़ रहा है. इसी रूट्स की वजह से खाद की सप्लाई पर भी बड़ा असर पड़ा है, क्योंकि भारत काफी मात्रा में खाद खाड़ी देशों से इंपोर्ट करता है.
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इसके अलावा होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते दक्षिण अमेरिका से भारत पाम, सूरजमुखी और सोयाबीन जैसे खाने वाले तेलों का बड़े पैमाने पर इंपोर्ट करता है. यह रूट पूरी तरह से खुला नहीं होने की वजह से चीजों की कीमतों पर इसका असर देखने को मिल रहा है.
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, एथेनॉल की वजह से चीनी के साथ-साथ अंडों के दाम भी बढ़े हैं. भारत में 75 फीसदी एथेनॉल का प्रोडेक्शन मक्का और टूटे हुए चावल से किया जा रहा है. इन्हीं मक्का और टूटे हुए चावल का इस्तेमाल पोल्ट्री के चारे के तौर पर होता है. इनकी मांग बढ़ने की वजह से चारे की लागत बढ़ गई है, जिससे घरेलू बाजार में अंडों के दाम बढ़ गए हैं.
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अमेरिका-ईरान में जारी जंग के बीच कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं. इस वजह से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 7 रुपये प्रति लीटर से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है. इसका असर अब लॉजिस्टिक्स की लागत पर पड़ रहा है. इसका बोझ ग्राहकों पर पड़ रहा है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर युद्ध जारी रहा, तो महंगाई और ज्यादा बढ़ेगी.
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