देश में महंगाई को लेकर नए आंकड़े सामने आ चुके हैं. वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा 14 सितंबर को जारी रिपोर्ट के मुताबिक, अगस्त महीने में थोक महंगाई दर बढ़कर 9.92 फीसदी पर पहुंच गई है. इससे ठीक पहले, जुलाई में यह दर 9.78 फीसदी दर्ज की गई थी. इस ताजा बढ़ोतरी के साथ ही थोक महंगाई अब पिछले 8 महीनों के उच्चतम स्तर पर आ खड़ी हुई है. अगस्त में थोक कीमतों में आई तेजी के पीछे तीन बड़े कारण रहे. पहला, खाद्य उत्पादों की थोक कीमतों में लगातार तेजी आई है. दूसरा, ईंधन और बिजली के खर्च में बड़ा उछाल देखा गया और कारखानों में तैयार होने वाले सामान महंगे होने से भी महंगाई का ग्राफ ऊपर चढ़ा है.
क्या होती है थोक महंगाई दर और कैसे होती है तय?
थोक महंगाई दर का सीधा मतलब उस मूल्य वृद्धि से है जो थोक बाजार यानी होलसेल लेवल पर दर्ज की जाती है. यह वह दर है जिस पर बड़े कारोबारी, थोक व्यापारी या फैक्ट्रियां आपस में सामान खरीदती-बेचती हैं. इसे तय करने के लिए सरकार थोक मूल्य सूचकांक (WPI) की एक निश्चित बास्केट तैयार करती है. इस बास्केट में जरूरी वस्तुएं जैसे फल, सब्जियां, अनाज, ईंधन-बिजली और मैन्युफैक्चर्ड गुड्स शामिल होते हैं. इनके थोक मूल्यों में पिछले साल के इसी महीने के मुकाबले आए बदलाव को प्रतिशत में मापा जाता है, जिससे मौजूदा थोक महंगाई दर तय होती है.
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आम उपभोक्ता की जेब पर इसका क्या असर पड़ता है?
इसे बहुत सरल गणित से समझा जा सकता है. पिछले साल इसी महीने जिस थोक सामान की कीमत 100 रुपये थी, उसी सामान के लिए अब थोक स्तर पर करीब 109 रुपये चुकाने पड़ रहे हैं. जब थोक मंडी या फैक्ट्री स्तर पर सामान महंगा होता है, तो आगे चलकर खुदरा विक्रेता भी उस अतिरिक्त लागत को आम खरीदारों पर डाल देते हैं. यानी थोक में बढ़ी महंगाई आने वाले दिनों में आम उपभोक्ता की थाली और महीने के घरेलू बजट पर सीधा दबाव बढ़ाती है.
साल 2026 की शुरुआत में 1.81% थी महंगाई दर
साल 2026 में थोक महंगाई के मोर्चे पर बड़ा उछाल देखने को मिला है. जनवरी से लेकर अगस्त 2026 के आंकड़ों के मुताबिक, थोक महंगाई दर में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है. जहां साल की शुरुआत में यह दर 2 फीसदी से भी नीचे थी, वहीं अगस्त तक आते-आते यह लगभग 10 फीसदी के स्तर को छूने लगी. साल 2026 की शुरुआत में जनवरी महीने में थोक महंगाई दर 1.81% दर्ज की गई थी. इसके बाद फरवरी में इसमें हल्की बढ़ोतरी हुई और यह 2.13% पर पहुंची. मार्च महीने से कीमतों पर दबाव बढ़ता दिखा और यह आंकड़ा बढ़कर 3.88% पर पहुंच गया.
अप्रैल में आया सबसे बड़ा उछाल
मार्च के बाद अप्रैल महीने में थोक महंगाई में जोरदार तेजी देखने को मिली. मार्च के 3.88% के मुकाबले अप्रैल में यह दर सीधे उछलकर 8.26% दर्ज की गई. इसके बाद मई में भी तेजी का रुख बना रहा और आंकड़ा 9.68% पर पहुंच गया. जून में महंगाई दर बढ़कर 9.87% तक पहुंच गई. जुलाई में मामूली राहत दिखी और यह घटकर 9.78% दर्ज हुई. अगस्त में एक बार फिर उछाल आया और यह 9.92% के साथ साल के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई.
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