विदेशी नेताओं और उनके भारी-भरकम दल का खर्च कौन उठाता है? समझिए मेजबान और अतिथि देश का पूरा बजट गणित

BRICS Summit: दिल्ली के भारत मंडपम में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को लेकर दुनिया भर के दिग्गज नेताओं का जमावड़ा लग रहा है, जहां दुनिया के कई दिग्गज नेता जुट रहे हैं. मेजबानी के भारी-भरकम खर्च से लेकर सुरक्षा व्यवस्था का पूरा वित्तीय भार किसके सिर होगा, मेजबान भारत और अतिथि देशों के बीच खर्च के इस अंतरराष्ट्रीय प्रोटोकॉल को आसान शब्दों में समझिए.

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नई दिल्ली में 11 से 13 सितंबर तक होने वाले 18वें BRICS शिखर सम्मेलन को लेकर राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था बेहद सख्त कर दी गई है. (फोटो- AI)

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BRICS Summit: राजधानी दिल्ली 12 और 13 सितंबर को होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी के लिए पूरी तरह तैयार है. रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग समेत 11 सदस्य देशों और 10 पार्टनर देशों के शीर्ष नेता इसमें शामिल हो रहे हैं. पुतिन के लिए आईटीसी मौर्या, शी जिनपिंग के लिए ताज पैलेस, यूएई के राष्ट्राध्यक्ष के लिए लीला पैलेस और मिस्र के दल के लिए शेरेटन होटल जैसे प्रमुख लग्जरी ठिकाने सज चुके हैं. ब्रिक्स जैसे विशाल अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में जब दुनिया भर के ताकतवर राष्ट्राध्यक्ष जुटते हैं तो उनके साथ सैकड़ों अधिकारियों, सुरक्षाकर्मियों और मीडिया का एक विशाल लश्कर भी आता है. ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि इन विदेशी मेहमानों और उनके साथ आए विशाल दल के ठहरने, खाने-पीने और सुरक्षा का भारी-भरकम खर्च आखिर कौन उठाता है?

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ब्रिक्स आयोजन का खर्च कौन उठाएगा?

ब्रिक्स संगठन की परंपरा के मुताबिक, शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने वाले देश पर ही इसके आयोजन का पूरा वित्तीय भार होता है. इस व्यवस्था के तहत भारत सरकार का विदेश मंत्रालय और संबंधित सरकारी विभाग बैठकों, वेन्यू प्रबंधन, विदेशी प्रतिनिधिमंडलों के स्वागत और जरूरी लॉजिस्टिक्स का खर्च वहन कर रहे हैं. वहीं सुरक्षा के कड़े व बहुस्तरीय बंदोबस्त की जिम्मेदारी दिल्ली पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियां संयुक्त रूप से संभाल रही हैं.
अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक प्रोटोकॉल के मुताबिक, यह पूरा खर्च दो हिस्सों में बंटा होता है-एक हिस्सा मेजबान देश उठाता है और दूसरा खुद अतिथि देश.

मेजबान देश के हिस्से आता है यह बुनियादी खर्च

सम्मेलन की मेजबानी कर रहा देश जैसे भारत अपने सरकारी खजाने और विदेश मंत्रालय के बजट से मुख्य व्यवस्थाएं करता है. इसके तहत मुख्य राष्ट्राध्यक्षों (राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री) और उनके कुछ गिने-चुने शीर्ष अधिकारियों के फाइव स्टार होटल के मुख्य सुइट और भोजन का खर्च मेजबान देश वहन करता है. इसके अलावा पूरे प्रतिनिधिमंडल को स्थानीय स्तर पर बुलेटप्रूफ गाड़ियां, सुरक्षा काफिला और 24 घंटे की पुख्ता सुरक्षा देना मेजबान की जिम्मेदारी होती है. एयरपोर्ट पर विदेशी विमानों की लैंडिंग, पार्किंग, मुख्य वेन्यू जैसे नई दिल्ली का भारत मंडपम और आधिकारिक रात्रिभोज का खर्च भी मेजबान ही भरता है.

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अतिथि देश के हिस्से में आता है कौन सा खर्च?

राष्ट्राध्यक्ष के साथ आने वाले सैकड़ों लोगों के दल का बाकी खर्च संबंधित देश खुद अपनी जेब से भरता है. अपने मुल्क से आने-जाने वाले विशेष विमानों या कमर्शियल उड़ानों का ईंधन और टिकट खर्च अतिथि देश देता है. मुख्य वीवीआईपी के अलावा बाकी सभी जूनियर अधिकारियों, कमांडो और मीडिया कर्मियों के लिए बुक किए गए अतिरिक्त होटल कमरों का भारी-भरकम बिल भी वही देश चुकाता है. इतना ही नहीं, अगर कोई देश अपनी निजी बख्तरबंद गाड़ियां, खुद के शेफ या विशेष संचार उपकरण साथ लाता है तो उनके रखरखाव और ढुलाई का खर्च भी उसी देश को देना होता है.

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Vijay Jain

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विजय कुमार न्यूज 24 में बतौर सीनियर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. विजय कुमार ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत प्रिंट मीडिया के साथ की. अपने 23 साल के करियर में वह दैनिक जागरण, अमर उजाला और दैनिक भास्कर जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं. विजय कुमार राजनीति, चुनाव, क्राइम और करंट अफेयर्स जैसे विषयों पर तथ्यपरक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. विजय कुमार ने दैनिक भास्कर में रिपोर्टिंग के दौरान स्टिंग ऑपरेशन भी किए. 23 साल के अनुभव के दौरान विजय कुमार ने करियर के शुरुआती दौर में डेस्क जर्नलिस्ट रहते हुए की. विजय कुमार को 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के अलावा बिहार, यूपी, बंगाल, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के विधानसभा चुनाव की ग्राउंड कवरेज का अनुभव है. ग्रामीण उद्योगीकरण में स्नातक की डिग्री होने के कारण विजय कुमार को ग्रामीण इलाकों की समस्याओं और उनसे जुड़ी कवरेज का खासा अनुभव है. अपने लेख के माध्यम से उन्होंने ग्रामीण इलाकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है. पत्रकारिता में अनुभव: 23 साल योग्यता, डिग्री / अन्य उपलब्धियां: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से ग्रामीण उद्योगीकरण विषय में बीए की डिग्री प्राप्त की है. विजय कुमार को पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए 2017 में 'श्रीफल जर्नलिज्म नेशनल अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया.
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