5 मेंबर्स से शुरू हुआ था ब्रिक्स, 20 साल में कैसे बढ़ गया कुनबा; दुनिया पर जमा रहा धाक

शुरुआत में ब्रिक्स में सिर्फ 4 सदस्य शामिल थे, जो बाद में बढ़कर 5 हो गए. इनमें ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका थे. आज 20 साल बाद ब्रिक्स में 11 स्थायी सदस्य देश हैं और 10 सहयोगी सदस्य हैं.

BRICS Summit 2026

ब्रिक्स के सदस्य कैसे बढ़े? (Photo: AI)

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18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आयोजन नई दिल्ली में आज हो रहा है. दो दिन तक चलने वाले इस समिट में कई देशों के प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं. शुरुआत में ब्रिक्स में सिर्फ 4 सदस्य शामिल थे, जो बाद में बढ़कर 5 हो गए. इनमें ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका थे. आज 20 साल बाद ब्रिक्स में 11 स्थायी सदस्य देश हैं और 10 सहयोगी सदस्य हैं. 2024 में विस्तार के बाद से ब्रिक्स में मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब को शामिल किया गया.

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कैसे बढ़ा कुनबा?

2025 में इंडोनेशिया भी इनके साथ मिल गया. बेलारूस, बोलीविया, कजाकिस्तान, क्यूबा, ​​मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम पिछले साल ब्रिक्स के साझेदार देश बने. शुरुआत में इसका नाम BRIC था, लेकिन 2010 में दक्षिण अफ्रीका के शामिल होने के बाद ये BRICS बन गया. 2012 में भारत ने नई दिल्ली में ब्रिक्स समिट की मेजबानी की. इस बार नई दिल्ली में चौथी बार ब्रिक्स का आयोजन हो रहा है. भारत अब सिर्फ ऐसा देश नहीं है जो इस ग्रुप में अपनी जगह को सही साबित करने की कोशिश कर रहा हो. अब भारत एक तेजी से उभरती हुई अर्थव्यवस्था वाला देश बन गया है.

क्यों अहम है ब्रिक्स सम्मेलन?

ब्रिक्स ग्रुप अब दुनिया की आबादी और अर्थव्यवस्था के एक बड़े हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है. ये सिर्फ एक नाम से आगे बढ़कर, उभरते और विकासशील देशों के लिए एक बड़ा राजनीतिक और कूटनीतिक मंच बन गया है. इस विस्तार ने BRICS में भारत की स्थिति को और भी अहम बना दिया है. भारत नहीं चाहता कि ब्रिक्स को पश्चिमी देशों के खिलाफ किसी गठबंधन की तरह पेश किया जाए. इसके बजाय नई दिल्ली ने हमेशा से ब्रिक्स को एक मंच के तौर पर ऐसे दिखाया है, जहां अलग-अलग राजनीतिक सिस्टम और विदेश नीति की प्राथमिकताओं वाले देश विकास से जुड़ी आम चुनौतियों पर मिलकर काम कर सकें. युद्ध, प्रतिबंध, संरक्षणवाद और जरूरी सप्लाई चेन में रुकावटों की वजह से ग्लोबल ट्रेड पर खतरा बढ़ता जा रहा है. नई दिल्ली का मकसद व्यापार को ज्यादा अनुमानित बनाना और जरूरी सामान, टेक्नोलॉजी और कच्चे माल के रिसोर्स में डायवर्सिटी लाना है.

क्या है मकसद?

फाइनेंशियल सपोर्ट भारत के ब्रिक्स सम्मेलन का एक और अहम हिस्सा है. इस ग्रुप ने पुराने वक्त से चले आ रहे फाइनेंशियल तरीकों पर निर्भरता कम करने और नेशनल करेंसी के ज्यादा इस्तेमाल को बढ़ावा देने पर चर्चा की हैं. 18वें ब्रिक्स सम्मेलन में क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट, फिनटेक और डिजिटल फाइनेंशियल इंफ्रास्ट्रक्चर पर खास तौर पर विचार-विमर्श हो सकता है. वहीं भारत के लिए बड़ा मकसद ये है कि उभरती अर्थव्यवस्थाएं सिर्फ दूसरी जगहों पर विकसित टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल ना करें, बल्कि वो नियम तय करने और टेक्नोलॉजी बनाने में भी हिस्सा लें.

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लेखक के बारे में

Varsha Sikri

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वर्षा सिकरी News24 हिंदी डिजिटल में सीनियर सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. जर्नलिज्म में 9 साल का अनुभव रखने वाली वर्षा सिकरी राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. वर्षा सिकरी ने सितंबर 2017 में इंडिया टीवी से अपने करियर की शुरुआत की थी, जिसके बाद से उन्होंने रिपब्लिक टीवी, जी न्यूज, आज तक जैसे चैनलों में काम किया. फिलहाल वो News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 9 साल के करियर में वर्षा सिकरी ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. वर्षा सिकरी का पत्रकारिता में अनुभव: 9 साल योग्यता: NRAI स्कूल ऑफ मास कम्यूनिकेशन से ग्रेजुएशन करने के बाद वर्षा सिकरी ने मीडिया में अपने करियर की शुरुआत की. उन्होंने बतौर एंकर और रिपोर्टर भी काम किया है.
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