RBI अगर अनल‍िम‍िटेड नोट छापने लगे तो क्‍या होगा? जानें, क्‍या होगा इकोनॉमी पर असर?

RBI के हाथ में नोट छापने की ताकत है. फ‍िर वह अनल‍िम‍िटेड नोट क्‍यों नहीं छापता है? क्‍या होगा अगर र‍िजर्व बैंक ऑफ इंड‍िया अनल‍िम‍िटेड नोट छापने लगे तो? ये सारे सवाल आपके मन में भी आते हैं तो इन सभी सवालों के जवाब यहां जान‍िये. आइये आपको बताते हैं क‍ि RBI अगर अनल‍िमि‍टेड नोट छापता है तो उसके क्‍या पर‍िणाम हो सकते हैं.

RBI printing indian notes

अनल‍िमि‍टेड नोट क्‍यों नहीं छापता आरबीआई ?

Can RBI Print Unlimited Money: आप सोच‍िए जरा आप क‍िसी द‍िन सोकर उठे और आपके पास पैसा ही पैसा हो. मतलब इतना पैसा क‍ि उसका कोई ह‍िसाब न हो. आप क्‍या करेंगे? ज्‍यादातर लोग, लग्‍जरी घर, गाड़ी, महंगे गैजेट, कपड़े, गहनें आद‍ि जैसी चीजें खरीदेंगे. लेक‍िन अब ये भी सोच‍िए क‍ि इतना ही पैसा देश के हर व्‍यक्‍ति‍ को म‍िला है. तो क्‍या होगा? ही चीज की कीमत आसमान छूने लगेगी, दुकानें खाली हो जाएंगी और ब‍िजनेस ठप हो जाएगा. हर तरफ अफरा तफरी मच जाएगी.

विज्ञापन

आपका ये जानना जरूरी है क‍ि आरबीआई नोट की वैल्यू के बराबर सोना या विदेशी संपत्ति संभाल कर रखता है. अगर आरबीआई रिजर्व से ज्यादा नोट छापना शुरू कर देगा तो उसके पास उन नोटों की कीमत चुकाने लायक गोल्ड और फॉरेन रिजर्व नहीं बचेंगे. इस स्थिति में देश आर्थिक संकट में डूब सकता है. कई देशों जैसे क‍ि जिम्बाब्वे और वेनेजुएला में ऐसा हो चुका है, जहां ज्‍यादा पैसे छापने से उनकी अर्थव्यवस्थाएं ढह गईं.

विज्ञापन

RBI अनल‍िम‍िटेड नोट छाप सकता है या नहीं ?

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) आर्थिक समस्याओं को हल करने के लिए अनलिमिटेड करेंसी नहीं छाप सकता. हालांकि पैसे छापना इकॉनमी को बूस्ट करने का एक आसान तरीका लग सकता है, लेकिन इससे महंगाई बढ़ती है, सप्लाई-डिमांड का बैलेंस बिगड़ता है और यहां तक कि आर्थिक संकट भी आ सकता है. तो अगर आपके मन में ये सवाल है क‍ि क्‍या RBI अनल‍िमि‍टेड नोट छाप सकता है? तो इसका जवाब है, नहीं. आइए जानते हैं कि भारत के लिए अनलिमिटेड पैसे छापना एक सही ऑप्शन क्यों नहीं है?

विज्ञापन

इसे समझने के लिए एक आसान उदाहरण लें. मान लीज‍िए आप 20 रुपये में पेन खरीदने एक दुकान पर जाते हैं. लेकिन वहां सिर्फ दो पेन बचे हैं और पांच ग्राहक उन्हें खरीदना चाहते हैं. दुकानदार कीमत बढ़ाकर 25 रुपये कर देता है. अब सोचिए कि सरकार ज्‍यादा पैसे छापती है और सभी को एक्स्ट्रा कैश देती है. अब पांचों ग्राहक पेन खरीद सकते हैं, लेकिन दुकानदार, डिमांड में बढ़ोतरी देखकर, कीमत बढ़ाकर 50 रुपये कर देता है. यह सिलसिला चलता रहता है, जिससे रोजमर्रा की जरूरी चीजें ज्‍यादातर लोगों के लिए महंगी हो जाती हैं.

विज्ञापन

करेंसी की वैल्‍यू घट जाएगी
अगर कोई देश बहुत ज्‍यादा पैसे छापता है, तो उसकी करेंसी की वैल्यू कम हो जाती है. इसका मतलब है कि इंपोर्ट महंगा हो जाएगा. इससे ट्रेड डेफिसिट और खराब हो जाता है. विदेशी निवेशकों का भरोसा कम हो जाता है.

विज्ञापन

बेकाबू महंगाई
जब ज्‍यादा पैसा उतनी ही चीजों और सेवाओं के पीछे भागता है, तो कीमतें तेजी से बढ़ती हैं. इससे महंगाई बढ़ती है और पैसे की खरीदने की शक्ति कम होती है. कई देशों जैसे क‍ि जिम्बाब्वे और वेनेज़ुएला में ऐसा हो चुका है, जहां ज्‍यादा पैसे छापने से उनकी अर्थव्यवस्थाएं ढह गईं.

ज्‍यादा पैसा होगा तो काम नहीं करेंगे लोग
अगर लोगों को बिना काम किए मुफ्त में पैसा मिलता है, तो काम करने की इच्छा कम हो जाती है. अगर कम लोग प्रोडक्शन में योगदान करते हैं, तो सामान और सेवाओं की उपलब्धता कम हो जाती है, जिससे आर्थिक स्थिति और खराब हो जाती है. यह डिमांड और सप्लाई के नियम को बिगाड़ता है, जिससे महंगाई बढ़ती है.

विज्ञापन

डिमांड और सप्लाई में रुकावट
अगर प्रोडक्शन स्थिर भी रहता है, तो भी ज्‍यादा पैसे की सप्लाई से डिमांड बढ़ जाती है. जब डिमांड सप्लाई से ज्‍यादा हो जाती है, तो कीमतें बढ़ जाती हैं. इससे एक असंतुलन पैदा होता है, जहां कंज्यूमर प्रोडक्ट खरीद सकते हैं, लेकिन डिमांड को पूरा करना चुनौती बन जाता है.

न्यूज 24 पर पढ़ें देश,राष्ट्रीय समाचार (National News),खेल,मनोरंजन,धर्म,लाइफ़स्टाइल,हेल्थ,शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।

First published on:

और पढ़ें: हमारे संपादकीय दिशानिर्देश और मानक यहाँ देखें।

लेख समाप्त

लेखक के बारे में

Vandana Bharti

Vandana Bharti

वन्‍दना भारती News 24 में बतौर ड‍िप्‍टी न्‍यूज एडिटर कार्यरत हैं और मौजूदा समय में बिजनेस डेस्‍क संभाल रही हैं. वन्दना News 24 के लिए स्टॉक मार्केट, पर्सनल फाइनेंस, कमोडिटी मार्केट, सरकारी योजनाओं पर खबरें लिखती हैं. वन्‍दना ने अपने करियर की शुरुआत दैन‍िक जागरण अखबार से की. इसके बाद देशबंधु अखबार में उन्होंने ब‍िजनेस रिपोर्टिंग में अपनी विशेषज्ञता विकसित की. साल 2010 में उन्होंने ह‍िन्‍दुस्‍तान अखबार में अपनी सेवाएं दीं, जहां उन्होंने ब‍िजनेस पेज के लिए 6 साल तक काम किया. वन्‍दना, आजतक डिजिटल, India.com और News18.com जैसे न्यूज प्लेटफॉर्म्स में बिजनेस डेस्क से जुड़ी रही हैं. वन्दना ने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीकॉम किया है. कॉमर्स बैकग्राउंड होने के कारण उनकी बिजनेस की खबरों में अच्छी पकड़ है और इन खबरों को वह आसान भाषा में यूजर्स तक पहुंचाती हैं. कितने साल का अनुभव: 18 साल योग्यता: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बी.कॉम और नई द‍िल्‍ली के YMCA संस्‍थान से पत्रकार‍िता में पीजीडीएमए की डिग्री प्राप्त की है.
... और पढ़ें
विज्ञापन
होम पेज पर वापस जाएँ