News24 Bharat Nirman Summit 2026: सड़क, रेल और हवाई यातायात की तुलना में जलमार्ग (Waterways) परिवहन का सबसे किफायती और पर्यावरण-अनुकूल माध्यम है, लेकिन इसके बावजूद देश में इसकी चर्चा अपेक्षाकृत कम होती है. नई दिल्ली में आयोजित न्यूज 24 के Bharat Nirman Summit में केंद्रीय जलमार्ग, पोर्ट्स और शिपिंग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि देश के लोगों को जलमार्ग के फायदों के प्रति जागरूक करना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है, क्योंकि यह देश में माल ढुलाई (Freight Transport) का सबसे बड़ा और सस्ता माध्यम बनने की क्षमता रखता है.
जब भी बात होती है तो सड़क की चर्चा होती है, रेल की चर्चा होती है, हवाई मार्ग की चर्चा होती है, लेकिन जलमार्ग यानी वाटरवे की चर्चा बहुत कम होती है, जबकि सुनने में आता है कि परिवहन का सबसे सस्ता साधन यही है. क्या यह सही है?
न्यूज 24 के एग्जीक्यूटिव एडिटर मानक गुप्ता के इस सवाल का जवाब देते हुए पोर्ट एवं शिपिंग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने बताया कि जी हां, यह बिल्कुल सही बात है. देखिए, जलमार्ग के बारे में देश के लोगों को खास जानकारी देना और उनमें इसके प्रति जागरूकता पैदा करना, यह हमारा काम है. आप सभी जानते हैं कि हम देश में सबसे बड़ा माल ढुलाई करने वाला माध्यम हैं. शायद आपको पता न हो, लेकिन यहां मौजूद कई अनुभवी लोग इस बारे में बेहतर बता सकते हैं.
उन्होंने कहा कि मैं आपको बताऊं कि पिछले दिनों में अगर हम आगे नहीं बढ़ पाए तो इसका मूल कारण है ब्रिटिश का राज, मुगल का इन्वेशन और साथ-साथ कांग्रेस का राज. उनके कार्यकाल में भी जलमार्ग को बढ़वा देने के लिए कोई कदम नहीं उठाया. इसलिए इंडलैंड वाटरवे सिर्फ पास पर सीमित रहे.
आप अनुमान कीजिए देश में कन्याकुमारी से कश्मीर तक, गुजरात से अरुणाचल प्रदेश तक 400 से अधिक नदियां है. इस नदी के द्वारा हम कैसे जनता के जीवन को सजाए, नई पीढ़ियों को रोजगार दें और नदी का जो भी शक्ति है उसको हम पहचाने. इन विषय पर कोई ना ध्यान नहीं दे रहा था और ना ही अनुसंधान कर रहे थे. उन्होंने कहा कि परम आदरणीय प्रधानमंत्री जी ने रिफॉर्म परफॉर्म, ट्रांसफॉर्म एंड इनफॉर्म यह जो फोर पिलर उन्होंने हमें दी है, इसके आधारित आज जिस हिसाब से विकास हो रहा है, वह काबिले तारीफ है.
कोस्ट लाइन के बारे में बताएं. क्या हम अपना मेरिटाइम पोटेंशियल पूरी तरह से एक्सप्लइट कर पाए हैं?
केंद्रीय जलमार्ग, पोर्ट्स और शिपिंग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि हमारी कोस्ट लाइन 11,093 कि.मी. है. परम आदरणीय प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में जो फैसले लिए हैं इससे यह स्पष्ट की गई है कि हमें पोर्ट को आधुनिक रूप देना होगा. शक्ति बढ़ानी होगी. इसलिए पोर्ट लेड डेवलपमेंट पोर्ट के द्वारा देश की विकास यात्रा को हमको बढ़वा देना होगा. आगे बढ़ाना होगा. इसके लिए पोर्ट की कैपेसिटी बढ़ानी होगी और पोर्ट का निर्माण आधुनिक रूप से करना होगा. मॉडर्नाइजेशन, मैकेनाइजेशन, डिजिटाइजेशन करना होगा.
क्या समुद्री क्षमता का पूरी तरह इस्तेमाल हो रहा है?
सोनोवाल ने कहा कि भारत सागरमाला प्रोग्राम के जरिए अपनी समुद्री क्षमता का पूरा इस्तेमाल करने पर ध्यान दे रहा है. इसके मुख्य क्षेत्रों में बंदरगाहों का आधुनिकीकरण, मशीनीकरण और डिजिटलीकरण के साथ-साथ बंदरगाह-आधारित औद्योगिक विकास शामिल है.
यह प्रोग्राम रेल और सड़क कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने, तटीय समुदायों का विकास करने, तटीय शिपिंग को बढ़ावा देने और इनलैंड वॉटरवेज़ (देश के भीतर जलमार्गों) को मज़बूत करने पर भी ध्यान देता है. इन सभी पहलों का मकसद एक इंटीग्रेटेड ट्रांसपोर्टेशन नेटवर्क बनाना और कार्गो की आवाजाही की क्षमता को बेहतर बनाना है.
मंत्री ने बताया कि पिछले 12 सालों में तटीय राज्यों के साथ बातचीत करके 8,835 प्रोजेक्ट्स की पहचान की गई है. इनमें से 1.14 लाख करोड़ रुपये की लागत वाले 272 प्रोजेक्ट्स पूरे भी हो चुके हैं.
सोनोवाल ने भारत के पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर और कार्गो-हैंडलिंग क्षमता में हुई बढ़ोतरी का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि 2014 में जो क्षमता लगभग 555 मिलियन मीट्रिक टन थी, उसमें काफी बढ़ोतरी हुई है. उन्होंने आगे कहा कि 2014 से पहले कार्गो का आवागमन लगभग 180 मिलियन मीट्रिक टन था, जो अब लगभग 260 मिलियन मीट्रिक टन तक पहुंच गया है और सरकार का लक्ष्य 2030 तक इसे 300 मिलियन मीट्रिक टन से ज्यादा करने का है.
सबसे सस्ता परिवहन साधन: सड़क और रेल परिवहन की तुलना में जलमार्ग से माल भेजना काफी सस्ता पड़ता है. एक अनुमान के अनुसार, सड़क मार्ग से प्रति किलोमीटर माल ढुलाई का खर्च जहां लगभग 2.28 रुपये आता है और रेल से 1.41 रुपये, वहीं जलमार्ग से यह लागत घटकर मात्र 60 पैसे से 80 पैसे प्रति किलोमीटर रह जाती है.
कम ईंधन और अधिक क्षमता: जलमार्ग से माल ले जाने में ईंधन की खपत बहुत कम होती है. एक सामान्य नौका या बार्ज (Barge) सैकड़ों ट्रकों के बराबर माल अकेले ले जा सकती है, जिससे लॉजिस्टिक्स लागत (Logistics Cost) में भारी कमी आती है.
पर्यावरण के अनुकूल: अन्य माध्यमों की तुलना में जलमार्ग से कार्बन उत्सर्जन (Carbon Emission) न के बराबर होता है, जो पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से भी अत्यंत प्रभावी है.
सड़क और रेल पर कम दबाव: जलमार्ग के माध्यम से भारी और बल्क कार्गो (जैसे कोयला, सीमेंट, खाद्यान्न और लोहा) की ढुलाई से राष्ट्रीय राजमार्गों और रेलवे नेटवर्क पर दबाव काफी कम होता है.
भारत में जलमार्ग विकास की स्थिति
भारत में 111 राष्ट्रीय जलमार्ग (National Waterways) घोषित किए जा चुके हैं, जिनमें से गंगा नदी पर बना राष्ट्रीय जलमार्ग-1 (NW-1) (हल्दिया से प्रयागराज) और ब्रह्मपुत्र नदी पर स्थित राष्ट्रीय जलमार्ग-2 (NW-2) व्यापारिक दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.
जलमार्गों का विस्तार देश के लॉजिस्टिक्स खर्च को जीडीपी के 14% से घटाकर सिंगल डिजिट में लाने के भारत सरकार के लक्ष्य को पूरा करने में अहम योगदान दे रहा है.