भारत और भूटान की दोस्ती अब ऊर्जा (Energy) के क्षेत्र में एक नया इतिहास रचने जा रही है.भारत की दिग्गज प्राइवेट पावर कंपनी अदाणी पावर (Adani Power) और भूटान की सरकारी बिजली कंपनी ड्रुक ग्रीन पावर कॉर्पोरेशन (DGPC) के बीच 770 मेगावाट (MW) के चामखारछु-I जलविद्युत प्रोजेक्ट (Chamkharchhu-I Hydropower Project) को लेकर एक बड़ा समझौता (Shareholders Agreement) हुआ है.
6 अक्टूबर 2026 को थिम्पू/अहमदाबाद में हुए इस समझौते के दौरान भूटान के प्रधानमंत्री ल्योनचेन दाशो शेरिंग तोबगे भी मौजूद थे.
49:51 की हिस्सेदारी और 6 साल में तैयार होगा प्रोजेक्ट
इस प्रोजेक्ट की खास बातें बहुत ही दिलचस्प और महत्वपूर्ण हैं. इस प्रोजेक्ट में अदाणी पावर और DGPC के बीच 49:51 का इक्विटी शेयर होगा. यानी 51% हिस्सेदारी भूटान की सरकारी कंपनी की होगी और 49% अदाणी पावर की.
यह रन-ऑफ-द-रिवर (Run-of-the-river) प्रोजेक्ट मध्य भूटान के जेमगांग जिले में चामखारछु नदी पर बनाया जाएगा. काम 2027 की पहली छमाही (First Half) में शुरू होगा और शिलान्यास (Groundbreaking) के 6 साल के भीतर इसे पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है.
यह प्रोजेक्ट 30 साल की रियायत (Concession) के साथ बिल्ड, ओन, ऑपरेट एंड ट्रांसफर (BOOT) मॉडल पर चलाया जाएगा.
सर्दियों में भूटान को बिजली, गर्मियों में भारत को मिलेगी ग्रीन एनर्जी
यह प्रोजेक्ट भारत और भूटान दोनों के लिए विन-विन (Win-Win) सिचुएशन है. सर्दियों के महीनों में जब भूटान में नदियों का बहाव कम हो जाता है, तब यह प्रोजेक्ट भूटान की बिजली जरूरतों को पूरा करेगा और उनकी एनर्जी सिक्योरिटी को मजबूत बनाएगा.
गर्मियों के दिनों में जब भूटान में पानी का बहाव तेज होगा, तो वहां बनने वाली अतिरिक्त क्लीन और ग्रीन पावर को भारत में एक्सपोर्ट किया जाएगा. इससे भारत को भी सस्ती और पर्यावरण-अनुकूल बिजली मिलेगी.
अदाणी पावर के एमडी अनिल सरदाना के मुताबिक यह प्रोजेक्ट दक्षिण एशिया में स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में एक बड़ा कदम है. इससे दोनों देशों के बीच संबंधों को नई मजबूती मिलेगी और पर्यावरण सुरक्षा के लक्ष्यों को पाने में मदद मिलेगी.
5000 MW के विशाल मेगा-प्लान का हिस्सा
अदाणी समूह और भूटान सरकार के बीच यह कोई पहला समझौता नहीं है. मई 2025 में अदाणी ग्रुप और DGPC के बीच 5000 मेगावाट जलविद्युत विकास का एक बड़ा एमओयू (MoU) साइन हुआ था.
इससे पहले सितंबर 2025 में 570 मेगावाट के वांगछु हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट पर भी सहमति बनी थी. यह 770 MW का चामखारछु-I प्रोजेक्ट उसी 5000 MW वाले विशाल विजन की दूसरी बड़ी कड़ी है.
भारत और भूटान का यह गठजोड़ न केवल दोनों देशों के कूटनीतिक रिश्तों को गहरा कर रहा है, बल्कि दक्षिण एशिया में कार्बन उत्सर्जन को घटाकर क्लीन एनर्जी को बढ़ावा देने का एक बेहतरीन उदाहरण पेश कर रहा है. आने वाले सालों में जब यह प्रोजेक्ट शुरू होगा, तो भारत में भी ग्रीन पावर की उपलब्धता और बेहतर होगी.