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US Green Card Rules: अमेरिका में ग्रीन कार्ड पाना होगा और मुश्किल! ट्रंप के नए नियम से क्यों बढ़ी H-1B वीजा धारक भारतीयों की टेंशन

US Public Charge Immigration Rule: ट्रंप प्रशासन ने अमेरिका में पब्लिक चार्ज नियम को दोबारा बहाल कर दिया है. जानिए क्या मेडिकेड और फूड स्टैम्प जैसी सरकारी मदद लेने से भारतीयों का ग्रीन कार्ड रिजेक्ट हो सकता है और इसके नए नियम क्या हैं.

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नई दिल्ली: अमेरिका में रह रहे और वहां ग्रीन कार्ड (Green Card) का इंतजार कर रहे हजारों भारतीयों के लिए एक बड़ी खबर है. डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने एक बार फिर अपने पुराने और विवादित पब्लिक चार्ज (Public Charge Rule) नियम को लागू कर दिया है. इस नियम के तहत अब अमेरिकी वीजा और ग्रीन कार्ड देते समय इस बात की कड़ी जांच होगी कि कहीं आवेदक अमेरिकी सरकार की आर्थिक मदद या सरकारी योजनाओं पर निर्भर तो नहीं है.

इस फैसले के बाद अमेरिका में रह रहे प्रवासी समुदायों, खासकर भारतीय प्रोफेशनल्स के बीच चिंता बढ़ गई है. आइए आसान बोलचाल की भाषा में समझते हैं कि यह ‘पब्लिक चार्ज’ नियम क्या है और इससे भारतीयों पर क्या असर पड़ेगा.

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क्या है यह ‘पब्लिक चार्ज’ (Public Charge) नियम?

अमेरिकी डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) के मुताबिक, इस नियम का सीधा मकसद यह पक्का करना है कि जो लोग अमेरिका में परमानेंट रेजिडेंस (ग्रीन कार्ड) चाहते हैं, वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हों. वे टैक्सपेयर्स के पैसे पर चलने वाले सरकारी वेलफेयर प्रोग्राम्स पर निर्भर रहने के बजाय अपना खर्च खुद उठा सकें.

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यह नियम नया नहीं है: ट्रंप के पिछले कार्यकाल (2019) में भी इसे लागू किया गया था, लेकिन बाद में जो बाइडन प्रशासन ने इसे वापस ले लिया था. अब ट्रंप प्रशासन ने इसे दोबारा बहाल कर दिया है.

किन सरकारी सुविधाओं (Benefits) पर पड़ेगा असर?
अगर कोई आवेदक नीचे दी गई सरकारी योजनाओं का लाभ ले रहा है या भविष्य में ले सकता है, तो अधिकारी उसकी फाइल को रोक सकते हैं.

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मेडिकेड (Medicaid): सरकारी स्वास्थ्य बीमा योजना (कुछ अपवादों को छोड़कर).

फूड स्टैम्प (SNAP): मुफ्त या सस्ते राशन के लिए मिलने वाली सरकारी मदद.

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कैश असिस्टेंस: सरकार की तरफ से मिलने वाली किसी भी तरह की नकद वित्तीय मदद.

हाउसिंग असिस्टेंस: सरकारी आवास या किराये में मिलने वाली सब्सिडी.

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क्या हर भारतीय पर पड़ेगा इसका असर?
नहीं, ऐसा बिल्कुल नहीं है. यह नियम सभी भारतीयों पर एक जैसा लागू नहीं होता. यह नियम मुख्य रूप से उन लोगों को प्रभावित करेगा जो लॉफुल परमानेंट रेजिडेंस (Green Card) के लिए अप्लाई कर रहे हैं. अमेरिका में काम कर रहे ज्यादातर भारतीय H-1B, L-1 या F-1 (स्टूडेंट) वीजा पर हैं. सिर्फ इन वीजा पर होने से यह नियम आप पर सीधे लागू नहीं हो जाता.

इसके अलावा, अमेरिकी कानून के तहत कई श्रेणियों के प्रवासियों को इस पब्लिक चार्ज टेस्ट से छूट भी मिली हुई है.

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तो फिर भारतीय क्यों हैं परेशान?
अमेरिका में एम्प्लॉयमेंट-बेस्ड (रोजगार आधारित) ग्रीन कार्ड का सबसे लंबा इंतजार भारतीयों को ही करना पड़ता है. भारी बैकलॉग के कारण कई भारतीय सालों से वहां अस्थाई वीजा पर रह रहे हैं. भले ही अधिकांश भारतीय प्रोफेशनल्स ने कभी किसी सरकारी मदद का लाभ न लिया हो, लेकिन ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया में जांच का कोई भी नया और कड़ा नियम स्वाभाविक रूप से उनकी चिंता बढ़ा देता है.

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क्या मेडिकेड का इस्तेमाल करने पर ग्रीन कार्ड सीधे रिजेक्ट हो जाएगा?
जवाब है- नहीं. किसी सरकारी सुविधा का लाभ लेने का मतलब यह नहीं है कि आपका ग्रीन कार्ड तुरंत रिजेक्ट हो जाएगा. अमेरिकी अधिकारी फैसला लेते समय आपकी पूरी प्रोफाइल देखेंगे, जिसमें आपकी सालाना कमाई, कुल संपत्ति, रोजगार का इतिहास (Job History), शिक्षा, उम्र और स्वास्थ्य जैसी कई चीजों को परखा जाएगा. सरकारी मदद का इस्तेमाल केवल समीक्षा का एक हिस्सा होगा, न कि रिजेक्शन का एकमात्र कारण.

First published on: Jul 17, 2026 02:53 PM

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About the Author

Vandana Bharti

वन्‍दना भारती, BAG नेटवर्क के माल‍िकाना हक वाले News 24 के साथ स‍ितंबर 2025 से कार्यरत हैं। मौजूदा समय में बिजनेस डेस्‍क संभाल रही हैं। News 24 के लिए स्टॉक मार्केट, पर्सनल फाइनेंस, कमोडिटी मार्केट, सरकारी योजनाओं पर खबर लिखने के साथ-साथ एजुकेशन की भी जिम्मेदारी संभालती हैं। बी.कॉम की पढ़ाई द‍िल्‍ली यून‍िवर्स‍िटी से की है और YMCA, नई दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता की पढ़ाई की है।

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Vandana Bharti

वन्‍दना भारती, BAG नेटवर्क के माल‍िकाना हक वाले News 24 के साथ स‍ितंबर 2025 से कार्यरत हैं। मौजूदा समय में बिजनेस डेस्‍क संभाल रही हैं। News 24 के लिए स्टॉक मार्केट, पर्सनल फाइनेंस, कमोडिटी मार्केट, सरकारी योजनाओं पर खबर लिखने के साथ-साथ एजुकेशन की भी जिम्मेदारी संभालती हैं। बी.कॉम की पढ़ाई द‍िल्‍ली यून‍िवर्स‍िटी से की है और YMCA, नई दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता की पढ़ाई की है।

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