शेयर बाजार आज गिरावट के साथ खुला है। मार्केट खुलते ही सेंसेक्स 361.40 अंक और निफ्टी 80 अंक लुढ़क गए थे। बाद में यह गिरावट और चौड़ी हो गई। सुबह करीब 11 बजे तक सेंसेक्स 800 अंकों से अधिक कमजोर हो गया। जबकि निफ्टी में 200 अंकों से अधिक की गिरावट आ गई थी। दरअसल, शेयर बाजार के लिए कल बड़ा दिन है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 2 अप्रैल से रेसिप्रोकल टैरिफ लागू कर रहे हैं। इस वजह से निवेशकों में घबराहट है और उसी का असर आज बाजार पर देखने को मिला है। पिछले सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन यानी शुक्रवार को बाजार गिरावट के साथ बंद हुआ था। हालांकि, उससे पहले मार्केट में अच्छी रिकवरी देखने को मिली थी।
इंडसइंड बैंक में उछाल
आज के गिरावट वाले बाजार में इंडसइंड बैंक के शेयरों में तेजी दिखाई दे रही है। खबर लिखे जाने तक यह 5% से अधिक की मजबूती हासिल कर चुका था। इसी तरह, भारती एयरटेल, महिंद्रा एंड महिंद्रा, नेस्ले, अडानी पोर्ट्स, SBI, ITC, टाटा मोटर्स और हिंदुस्तान यूनिलीवर भी उछाल के साथ कारोबार कर रहे हैं। वहीं, BSE पर गिरावट वाले शेयरों की बात करें, तो टाटा स्टील, अल्ट्राटेक, मारुति, NTPC रिलायंस और आईसीआईसीआई बैंक आदि लाल निशान पर कारोबार कर रहे हैं।
आशंका में गिरा फार्मा इंडेक्स
निफ्टी फार्मा इंडेक्स आज लाल है। दरअसल, डोनाल्ड ट्रंप फार्मा टैरिफ का भी ऐलान कर सकते हैं, जिसका असर भारतीय कंपनियों पर पड़ना लाजमी है। फार्मा एक्सपोर्ट में भारत की स्थिति मजबूत है। भारत दुनिया में सबसे ज्यादा जेनरिक दवाओं का एक्सपोर्ट करने वाले देशों में शुमार है। अमेरिका फार्मास्युटिकल्स उत्पादों के आयात पर जीरो ड्यूटी लगाता है, जबकि भारत में अमेरिकी फार्मा आयात पर करीब 10% फीसदी ड्यूटी है। रेसिप्रोकल टैरिफ के हिसाब से अमेरिका भी 10% टैरिफ लगा सकता है। इस वजह से फार्मा सेक्टर में आज नरमी दिखाई दे रही है। इसी तरह निफ्टी आईटी इंडेक्स में करीब 2.29% की गिरावट दर्ज हुई है।
बना रह सकता है दबाव
एक्सपर्ट्स का कहना है कि बाजार के लिए अब रेसिप्रोकल टैरिफ बड़ा मुद्दा बना हुआ है। अमेरिका भारत सहित अन्य देशों पर 15 से 20% टैरिफ लागू कर सकता है। उसके बाद मोलभाव की प्रक्रिया शुरू होगी। ऐसे में बाजार दबाव में बना रह सकता है। रिसर्च एंड इन्वेस्टमेंट फर्म एमके ग्लोबल की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर अमेरिका 10% टैरिफ लगाता है, तो भारत को लगभग 6 अरब डॉलर या अपने सकल घरेलू उत्पाद के 0.16% का नुकसान हो सकता है। अगर टैरिफ बढ़कर 25 प्रतिशत हो जाता है, तो फिर उसका प्रभाव काफी बड़ा हो सकता है। इससे भारत को अमेरिकी निर्यात में 31 अरब डॉलर तक का नुकसान उठाना पड़ सकता है।