होर्मुज खुलते ही मिली गुड न्यूज, LPG का बैकलॉग घटकर 3.1 दिन हुआ, जानिए आम जनता को क्या होगा फायदा?

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए बड़े पैमाने पर वैश्विक बाजारों पर निर्भर है. देश अपनी आवश्यकता का लगभग 85% कच्चा तेल, 50% एलएनजी (LNG) और 60% एलपीजी का आयात करता है, जिसका एक बड़ा हिस्सा मध्य पूर्व के रास्ते स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर आता था.

LPG Cylinder Crisis

Credit: Social Media

ईरान और अमेरिका के बीच शांति समझौते की राह साफ होने और ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ के दोबारा खुलने के बाद केंद्र सरकार ने देश की जनता को एक बड़ी राहत दी है. पेट्रोलियम मंत्रालय ने घोषणा की है कि देश में एलपीजी (LPG) का बैकलॉग अब घटकर मात्र 3.1 दिन रह गया है. इसके साथ ही पेट्रोल, डीजल, एलपीजी और नेचुरल गैस की देशव्यापी आपूर्ति पूरी तरह से सामान्य हो गई है और सभी रिटेल आउटलेट्स पर कामकाज सुचारू रूप से चल रहा है. पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने आधिकारिक तौर पर यह जानकारी साझा करते हुए स्पष्ट किया कि अब देश की किसी भी गैस एजेंसी पर एलपीजी की कोई किल्लत नहीं है.

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क्या कम होंगी पेट्रोल-डीजल और एलपीजी की कीमतें?


होर्मुज जलमार्ग के खुलने और आपूर्ति सामान्य होने के बाद अब जनता के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या युद्ध के दौरान बढ़ी हुई कीमतों में कटौती की जाएगी? हालांकि, मंत्रालय की ओर से मिले आंकड़े फिलहाल किसी तत्काल राहत की ओर इशारा नहीं करते. संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता के कारण तेल कंपनियों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है. वर्तमान में हर एलपीजी सिलेंडर पर ‘अंडर-रिकवरी’ (लागत के मुकाबले कम वसूली) आज भी 700 रुपये बनी हुई है.

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इसी तरह, तेल कंपनियों को प्रति लीटर डीजल पर 27 रुपये और प्रति लीटर पेट्रोल पर 3 रुपये की अंडर-रिकवरी हो रही है. साफ है कि कीमतों में कई बार बढ़ोतरी के बाद भी सरकारी तेल कंपनियों का घाटा कम नहीं हुआ है.

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वैश्विक बाजारों पर निर्भर भारत


भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए बड़े पैमाने पर वैश्विक बाजारों पर निर्भर है. देश अपनी आवश्यकता का लगभग 85% कच्चा तेल, 50% एलएनजी (LNG) और 60% एलपीजी का आयात करता है, जिसका एक बड़ा हिस्सा मध्य पूर्व के रास्ते स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर आता था. 28 फरवरी 2026 को मिडिल ईस्ट में युद्ध के कारण पिछले 108 दिनों के दौरान वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला बुरी तरह चरमरा गई थी. इस संकट से निपटने के लिए भारत सरकार ने तेल कंपनियों के साथ मिलकर आयात के सोर्सेज को बदला और नए बाजारों से स्टॉक मंगवाया.

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लेखक के बारे में

Akarsh Shukla

Akarsh Shukla

आकर्ष शुक्ला न्यूज 24 के साथ बतौर चीफ सब एडिटर जुड़े हुए हैं. मूल रूप से नोएडा, उत्तर प्रदेश के रहने वाले आकर्ष ने पत्रकारिता का सफर 2016 में प्रिंट मीडिया से शुरू हुआ, बाद में उन्होंने डिजिटल मीडिया का रुख किया. आकर्ष शुक्ला ने गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री हासिल की. आकर्ष ने दिल्ली के अखबार वूमेन एक्सप्रेस में काम किया. इसके बाद नवोदय टाइम्स, ओपेरा न्यूज, वनइंडिया, इंडिया डॉट कॉम (जी मीडिया ग्रुप) में विभिन्न पदों पर कार्य किया. आकर्ष शुक्ला अक्टूबर, 2025 से न्यूज24 से जुड़े हुए हैं, जहां वो मुख्य रूप से राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय और राजनीति से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं. इसके साथ ही आकर्ष शिफ्ट हेड के तौर पर टीम का नेतृत्व भी करते हैं. आकर्ष ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव के अलावा संसद से जुड़ी खबरों को कवर किया है. उनकी राजनीति में गहरी रुचि है, इस कारण वह राजनीति से जुड़ी खबरों को आसान शब्दों में लिखने में माहिर हैं. डिग्री और डिप्लोमा: आकर्ष शुक्ला ने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक (BA) की डिग्री के बाद गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. आकर्ष शुक्ला ने DICS इंस्टीट्यूट से कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर में 2 साल का डिप्लोमा भी किया है. पत्रकारिता में अनुभव: 10 वर्ष से अधिक
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