RBI MPC Meeting August 2026: RBI ने GDP ग्रोथ अनुमान बढ़ाकर 6.7% किया, जानें रेपो रेट और महंगाई का हाल
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भारतीय अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर एक बहुत ही राहत भरी खबर आई है. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने अपनी तीसरी द्विमासिक मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठक में देश की आर्थिक सेहत को लेकर बड़ा और सकारात्मक अपडेट दिया है. गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में रेपो रेट को लगातार चौथी बार 5.25% पर स्थिर रखने का फैसला लिया गया है.
इसके साथ ही आरबीआई ने वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) के लिए भारत की जीडीपी ग्रोथ (GDP Growth) का अनुमान बढ़ा दिया है और कोर इंफ्लेशन (महंगाई दर) के अनुमान में कटौती की है. आइए, समझते हैं कि आरबीआई के इस फैसले के मुख्य बिंदु क्या हैं और इसका देश की अर्थव्यवस्था पर क्या असर होगा.
ग्लोबल मंदी और पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी तनाव के बावजूद घरेलू मांग के दम पर भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत स्थिति में दिख रही है. आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष (FY27) के लिए कुल जीडीपी ग्रोथ रेट के अनुमान को 6.6% से बढ़ाकर 6.7% कर दिया है. पहली तिमाही के ग्रोथ अनुमान को 6.6% से बढ़ाकर 7% कर दिया गया है. अगर बात करें Q2 यानी दूसरी तिमाही की तो इसे भी 6.3% से बढ़ाकर 6.4% किया गया है. वहीं Q3 और Q4 यानी तीसरी और चौथी तिमाही के लिए अनुमान को क्रमशः 6.5% और 6.8% पर बरकरार रखा गया है.
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महंगाई के मोर्चे पर राहत आम जनता और आर्थिक मोर्चे के लिए दूसरा बड़ा सकारात्मक कदम कोर इंफ्लेशन (महंगाई) के आंकड़ों में कटौती है. आरबीआई ने FY27 के लिए कोर इंफ्लेशन के अनुमान में 0.40% (40 बेसिस पॉइंट्स) की कटौती की है. अब कोर इंफ्लेशन का अनुमान 4.7% से घटाकर 4.3% कर दिया गया है, जो ये दिखाता है कि आने वाले दिनों में महंगाई का दबाव कम हो सकता है.
Repo Rate: 5.25% पर क्यों बरकरार रखी गई दरें? आरबीआई ने बेंचमार्क रेपो रेट को 5.25% पर ही बनाए रखा है. ऐसा उसने लगातार चौथी बार किया है. दिसंबर 2025 में रेपो रेट को 5.50% से घटाकर 5.25% किया गया था. उसके बाद से लगातार चौथी पॉलिसी समीक्षा बैठक में दरों को उसी स्तर पर रखा गया है. दरअसल, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, पश्चिम एशिया में तनाव और ग्लोबल आर्थिक अनिश्चितताओं को देखते हुए सतर्कता बरतने के लिए दरों को स्थिर रखा गया है.
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आरबीआई का यह कदम दिखाता है कि भले ही दुनिया भर में आर्थिक अनिश्चितता बनी हुई हो, लेकिन भारत की आंतरिक अर्थव्यवस्था मजबूत है. जीडीपी ग्रोथ के आंकड़े बढ़ना और महंगाई के अनुमान का घटना देश के विकास के लिए एक बहुत ही शुभ संकेत है.