क्या ग्राहकों को देना होगा UPI का चार्ज, नए MDR शुल्क पर RBI, NSE और Phonepe का पहला बयान

UPI transaction charges: 2,000 रुपए से अधिक के यूपीआई भुगतान पर व्यापारियों से 0.4% शुल्क लिए जाने के फैसले पर एनएसई और आरबीआई का रुख सामने आया है. एनएसई प्रमुख ने कहा कि शुरुआत में लेन-देन की संख्या पर अल्पकालिक असर दिखेगा पर जल्द स्थिति सामान्य होगी. RBI ने स्पष्ट किया है कि यह शुल्क केवल मर्चेंट पेमेंट इकोसिस्टम के लिए है, आम ग्राहकों से इसका कोई लेना-देना नहीं है. जानिए नए नियमों से जुड़ी हर जरूरी बात.

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2,000 रुपए से अधिक के यूपीआई भुगतान पर व्यापारियों से 0.4% शुल्क लिए जाने के फैसले पर एनएसई और आरबीआई का रुख सामने आया है. Credit: Meta AI

UPI MDR charges: यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लेकर सोशल मीडिया और आम लोगों के बीच फैली अफवाहों पर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और सरकार की ओर से अहम स्पष्टीकरण सामने आया है. नियामक ने साफ कर दिया है कि यूपीआई पर प्रस्तावित एमडीआर केवल मर्चेंट पेमेंट इकोसिस्टम का आंतरिक शुल्क है. इसका भुगतान करने वाले आम ग्राहकों से कोई लेना-देना नहीं है और उनके लिए यूपीआई पहले की तरह पूरी तरह मुफ्त रहेगा. वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के MD और CEO आशीषकुमार चौहान ने PTI को बताया कि 2,000 रुपए से अधिक के लेन-देन पर व्यापारियों से शुल्क वसूले जाने से अल्पकाल में लेन-देन की मात्रा पर शुरुआत में कुछ असर पड़ सकता है, लेकिन कुछ समय बाद स्थिति फिर से सामान्य होने की उम्मीद है.”

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UPI New Rules: 2000 से ज्यादा के भुगतान पर क्या हैं नए नियम? किन ट्रांजेक्शन पर लगेगा MDR चार्ज

ग्राहकों पर नहीं पड़ेगा कोई बोझ

आरबीआई ने स्पष्ट किया कि एमडीआर का चार्ज व्यापारियों और बैंकों के बीच का तंत्र है. बैंकों और पेमेंट सेवा प्रदाताओं को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि इस शुल्क का बोझ ग्राहकों पर न डाला जाए. यूपीआई ऐप कंपनियों पर किसी भी प्रकार का छिपा हुआ शुल्क या अतिरिक्त प्लेटफॉर्म फीस लगाने पर पूरी तरह रोक लगाई गई है. यानी अगर आप किसी दुकान पर क्यूआर कोड स्कैन करके सामान खरीदते हैं तो आपको केवल वास्तविक बिल की रकम ही चुकानी होगी. आरबीआई का मानना है कि इस कदम से देश के डिजिटल पेमेंट इन्फ्रास्ट्रक्चर, साइबर सुरक्षा और नवाचार को लंबे समय तक आत्मनिर्भर और टिकाऊ बनाए रखने में मदद मिलेगी. यह नई व्यवस्था 15 अक्टूबर से प्रभावी होगी.

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96% यूपीआई लेन-देन रहेंगे बिल्कुल मुफ्त: फोनपे CEO

फोनपे के सीईओ समीर निगम ने एनपीसीआई के 0.4% एमडीआर फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि इससे डिजिटल पेमेंट इंडस्ट्री का घाटा कम होगा. इस नए नियम से आम जनता पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि देश में होने वाले लगभग 96 फीसदी यूपीआई लेन-देन पहले की तरह पूरी तरह मुफ्त ही रहेंगे. समीर निगम ने बताया कि पिछले छह सालों से यूपीआई पूरी तरह एमडीआर-मुक्त था. इस वजह से पूरी पेमेंट इंडस्ट्री हर साल भारी वित्तीय नुकसान उठा रही थी. उन्होंने कहा, “हम इस मुद्दे को लगातार सरकार और आरबीआई के सामने उठाते रहे हैं. दुनिया भर के 200 से ज्यादा देशों में डिजिटल पेमेंट सिस्टम काम करते हैं, लेकिन भारत ही इकलौता ऐसा देश था जहां यूपीआई लेन-देन पर कोई एमडीआर नहीं था.” फोनपे प्रमुख के अनुसार, इस सीमित शुल्क से जो राजस्व मिलेगा, उससे पेमेंट कंपनियां कम से कम अपनी संचालन लागत निकाल सकेंगी.

किन पर और कितना लगेगा MDR?

नए नियमों के मुताबिक, व्यापारियों को किए जाने वाले 2,000 रुपए से अधिक के भुगतान (P2M) पर 0.4 प्रतिशत की दर से एमडीआर लागू होगा. व्यापारियों की सहूलियत के लिए बड़े भुगतानों पर कैपिंग तय की गई है; 75,000 रुपए या उससे अधिक के लेन-देन पर अधिकतम शुल्क सिर्फ ₹300 सीमित रखा गया है. वहीं रेलवे, बिजली-पानी के बिल, ईंधन और जरूरी सेवाओं के भुगतान पर प्रतिशत के बजाय महज 5 रुपए का फ्लैट शुल्क तय किया गया है.

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लेखक के बारे में

Vijay Jain

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विजय कुमार न्यूज 24 में बतौर सीनियर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. विजय कुमार ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत प्रिंट मीडिया के साथ की. अपने 23 साल के करियर में वह दैनिक जागरण, अमर उजाला और दैनिक भास्कर जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं. विजय कुमार राजनीति, चुनाव, क्राइम और करंट अफेयर्स जैसे विषयों पर तथ्यपरक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. विजय कुमार ने दैनिक भास्कर में रिपोर्टिंग के दौरान स्टिंग ऑपरेशन भी किए. 23 साल के अनुभव के दौरान विजय कुमार ने करियर के शुरुआती दौर में डेस्क जर्नलिस्ट रहते हुए की. विजय कुमार को 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के अलावा बिहार, यूपी, बंगाल, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के विधानसभा चुनाव की ग्राउंड कवरेज का अनुभव है. ग्रामीण उद्योगीकरण में स्नातक की डिग्री होने के कारण विजय कुमार को ग्रामीण इलाकों की समस्याओं और उनसे जुड़ी कवरेज का खासा अनुभव है. अपने लेख के माध्यम से उन्होंने ग्रामीण इलाकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है. पत्रकारिता में अनुभव: 23 साल योग्यता, डिग्री / अन्य उपलब्धियां: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से ग्रामीण उद्योगीकरण विषय में बीए की डिग्री प्राप्त की है. विजय कुमार को पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए 2017 में 'श्रीफल जर्नलिज्म नेशनल अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया.
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