UPI MDR charges: यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लेकर सोशल मीडिया और आम लोगों के बीच फैली अफवाहों पर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और सरकार की ओर से अहम स्पष्टीकरण सामने आया है. नियामक ने साफ कर दिया है कि यूपीआई पर प्रस्तावित एमडीआर केवल मर्चेंट पेमेंट इकोसिस्टम का आंतरिक शुल्क है. इसका भुगतान करने वाले आम ग्राहकों से कोई लेना-देना नहीं है और उनके लिए यूपीआई पहले की तरह पूरी तरह मुफ्त रहेगा. वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के MD और CEO आशीषकुमार चौहान ने PTI को बताया कि 2,000 रुपए से अधिक के लेन-देन पर व्यापारियों से शुल्क वसूले जाने से अल्पकाल में लेन-देन की मात्रा पर शुरुआत में कुछ असर पड़ सकता है, लेकिन कुछ समय बाद स्थिति फिर से सामान्य होने की उम्मीद है.”
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ग्राहकों पर नहीं पड़ेगा कोई बोझ
आरबीआई ने स्पष्ट किया कि एमडीआर का चार्ज व्यापारियों और बैंकों के बीच का तंत्र है. बैंकों और पेमेंट सेवा प्रदाताओं को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि इस शुल्क का बोझ ग्राहकों पर न डाला जाए. यूपीआई ऐप कंपनियों पर किसी भी प्रकार का छिपा हुआ शुल्क या अतिरिक्त प्लेटफॉर्म फीस लगाने पर पूरी तरह रोक लगाई गई है. यानी अगर आप किसी दुकान पर क्यूआर कोड स्कैन करके सामान खरीदते हैं तो आपको केवल वास्तविक बिल की रकम ही चुकानी होगी. आरबीआई का मानना है कि इस कदम से देश के डिजिटल पेमेंट इन्फ्रास्ट्रक्चर, साइबर सुरक्षा और नवाचार को लंबे समय तक आत्मनिर्भर और टिकाऊ बनाए रखने में मदद मिलेगी. यह नई व्यवस्था 15 अक्टूबर से प्रभावी होगी.
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96% यूपीआई लेन-देन रहेंगे बिल्कुल मुफ्त: फोनपे CEO
फोनपे के सीईओ समीर निगम ने एनपीसीआई के 0.4% एमडीआर फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि इससे डिजिटल पेमेंट इंडस्ट्री का घाटा कम होगा. इस नए नियम से आम जनता पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि देश में होने वाले लगभग 96 फीसदी यूपीआई लेन-देन पहले की तरह पूरी तरह मुफ्त ही रहेंगे. समीर निगम ने बताया कि पिछले छह सालों से यूपीआई पूरी तरह एमडीआर-मुक्त था. इस वजह से पूरी पेमेंट इंडस्ट्री हर साल भारी वित्तीय नुकसान उठा रही थी. उन्होंने कहा, “हम इस मुद्दे को लगातार सरकार और आरबीआई के सामने उठाते रहे हैं. दुनिया भर के 200 से ज्यादा देशों में डिजिटल पेमेंट सिस्टम काम करते हैं, लेकिन भारत ही इकलौता ऐसा देश था जहां यूपीआई लेन-देन पर कोई एमडीआर नहीं था.” फोनपे प्रमुख के अनुसार, इस सीमित शुल्क से जो राजस्व मिलेगा, उससे पेमेंट कंपनियां कम से कम अपनी संचालन लागत निकाल सकेंगी.
किन पर और कितना लगेगा MDR?
नए नियमों के मुताबिक, व्यापारियों को किए जाने वाले 2,000 रुपए से अधिक के भुगतान (P2M) पर 0.4 प्रतिशत की दर से एमडीआर लागू होगा. व्यापारियों की सहूलियत के लिए बड़े भुगतानों पर कैपिंग तय की गई है; 75,000 रुपए या उससे अधिक के लेन-देन पर अधिकतम शुल्क सिर्फ ₹300 सीमित रखा गया है. वहीं रेलवे, बिजली-पानी के बिल, ईंधन और जरूरी सेवाओं के भुगतान पर प्रतिशत के बजाय महज 5 रुपए का फ्लैट शुल्क तय किया गया है.
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