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NHB Subsidy Rules: 35% सब्सिडी और नए नियमों के खिलाफ सड़कों पर उतरे किसान! जानें क्यों हो रहा है हंगामा

NHB Horticulture Subsidy Update 2026: नेशनल हॉर्टिकल्चर बोर्ड ने सब्सिडी 50% से घटाकर 35% कर द‍िया है और नए आवेदनों पर रोक भी लगा दी है, ज‍िसके बाद किसान नाराज हैं. जानिए NHB के नए नियम और किसानों की मांगें.

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अगर आप बागवानी (Horticulture), पॉलीहाउस (Polyhouse) या ग्रीनहाउस की खेती से जुड़े हैं या नया एग्री-बिजनेस शुरू करने की सोच रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बहुत जरूरी है. 15 सितंबर को देशभर के किसान और एग्री-इंटरप्रेन्योर्स राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB) के मुख्यालय के बाहर विरोध-प्रदर्शन करने के लिए इकट्ठा हुए.

किसानों की नाराजगी की मुख्य रूप से इस बात से है क‍ि NHB ने अचानक सब्सिडी के नियमों में बदलाव कर द‍िए हैं. सब्सिडी का 50% से घटकर 35% हो जाना और नए आवेदनों पर अस्थायी रोक लगाना क‍िसानों की नाराजगी की बड़ी वजह है. आइए इस बात को समझते हैं कि NHB के नए नियमों को लेकर किसान क्यों परेशान हैं और उनकी मुख्य मांगे क्या हैं.

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NHB के नए सर्कुलर से क्यों नाराज हैं किसान?

राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB) ने हाल ही में दो नए सर्कुलर जारी किए थे, जिससे पॉलीहाउस और संरक्षित खेती करने वाले किसानों पर बड़ा आर्थिक बोझ पड़ गया है. 21 अगस्‍त को जारी सर्कुलर 2101 के तहत सब्सिडी के नियमों को सख्त कर दिया गया. इसमें राजनीतिक पदों पर बैठे लोगों, सरकारी कर्मचारियों (ग्रुप D को छोड़कर) और 10000 रुपये से अधिक पेंशन पाने वाले पूर्व कर्मचारियों को सब्सिडी से बाहर कर दिया गया.

GoC नियम बदले, नए आवेदन पर रोक… NHB सब्सिडी के लिए किसानों के सामने दोहरी मुश्किल

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परिवार की परिभाषा भी बदल दी गई है. नई पर‍िभाषा में पति-पत्‍नी, माता-पिता और बच्चों को शामिल कर दिया गया है. अब एक परिवार में सिर्फ एक ही व्यक्ति को सब्सिडी मिल सकेगी, भले ही बालिग बच्चे अलग खेती करते हों और उनके पास अलग बैंक खाता या जमीन हो.

सबसे बड़ा झटका यह लगा कि पॉलीहाउस और संरक्षित खेती के लिए मिलने वाली सब्सिडी को 50% से घटाकर सामान्य क्षेत्रों में 35% और पहाड़ी/अनुसूचित क्षेत्रों में 50% से घटाकर 45% कर दिया गया.

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3 सितंबर 2026 को एनएचबी ने एक और सर्कुलर जारी क‍िया. सर्कुलर 146810, ज‍िसके तहत नए क्लीयरेंस (Grant of Clearance) आवेदनों की स्वीकृति पर 4 सितंबर से एक महीने के लिए अस्थायी रोक लगा दी गई.

किसानों और कारोबारियों की असली चिंता क्या है?
इंडियन ग्रीनहाउस मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (IGMA) और किसानों का कहना है कि वे सरकार की मंशा और पारदर्शिता का समर्थन करते हैं. लेकिन सबसे बड़ी समस्या यह है कि जो किसान 21 अगस्त से पहले बैंक से लोन ले चुके हैं, जमीन गिरवी रख चुके हैं या निर्माण कार्य शुरू कर चुके हैं, उन पर भी यह नियम लागू किए जा रहे हैं.

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लागत में अचानक 15% की कमी होने से जिन किसानों ने बैंक से भारी लोन लिया है, वे ब्याज के बोझ तले दब रहे हैं. किसानों का कहना है कि भविष्य के प्रोजेक्ट्स के लिए नियम बदलें, लेकिन जो निवेश पहले ही हो चुका है, उस पर पुराने नियम लागू रहने चाहिए.

किसानों की 5 प्रमुख मांगें

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  1. पुराने प्रोजेक्ट्स को सुरक्षा: 21 अगस्त 2026 से पहले के सभी पेंडिंग आवेदनों और चल रहे प्रोजेक्ट्स को पुरानी यानी 50% सब्सिडी दर पर ही क्लीयर किया जाए.
  2. परिवार की परिभाषा पर दोबारा व‍िचार करें : अगर परिवार के वयस्क सदस्य अलग खेती और फाइनेंस संभालते हैं, तो उन्हें अलग यूनिट माना जाए.
  3. सब्सिडी फिर से 50% की जाए: सब्सिडी को वापस 50% किया जाए या फिर पॉलीहाउस और फार्म पॉन्ड पर लगने वाले GST को 18% से घटाकर 5% किया जाए.
  4. फर्जीवाड़े पर व्यक्तिगत कार्रवाई हो: पूरे सेक्टर पर सख्ती करने के बजाय गड़बड़ी करने वाले व्यक्तियों पर कार्रवाई की जाए.
  5. स्टेकहोल्डर कमेटी का गठन: नीतिगत बदलाव करने से पहले किसानों, बैंकों, कृषि वैज्ञानिकों और निर्माताओं को शामिल करके एक स्थायी समिति बनाई जाए.

First published on: Sep 15, 2026 02:51 PM

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About the Author

Vandana Bharti

वन्‍दना भारती News 24 में बतौर ड‍िप्‍टी न्‍यूज एडिटर कार्यरत हैं और मौजूदा समय में बिजनेस डेस्‍क संभाल रही हैं. वन्दना News 24 के लिए स्टॉक मार्केट, पर्सनल फाइनेंस, कमोडिटी मार्केट, सरकारी योजनाओं पर खबरें लिखती हैं. वन्‍दना ने अपने करियर की शुरुआत दैन‍िक जागरण अखबार से की. इसके बाद देशबंधु अखबार में उन्होंने ब‍िजनेस रिपोर्टिंग में अपनी विशेषज्ञता विकसित की. साल 2010 में उन्होंने ह‍िन्‍दुस्‍तान अखबार में अपनी सेवाएं दीं, जहां उन्होंने ब‍िजनेस पेज के लिए 6 साल तक काम किया. वन्‍दना, आजतक डिजिटल, India.com और News18.com जैसे न्यूज प्लेटफॉर्म्स में बिजनेस डेस्क से जुड़ी रही हैं. वन्दना ने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीकॉम किया है. कॉमर्स बैकग्राउंड होने के कारण उनकी बिजनेस की खबरों में अच्छी पकड़ है और इन खबरों को वह आसान भाषा में यूजर्स तक पहुंचाती हैं. कितने साल का अनुभव: 18 साल योग्यता: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बी.कॉम और नई द‍िल्‍ली के YMCA संस्‍थान से पत्रकार‍िता में पीजीडीएमए की डिग्री प्राप्त की है.

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