भारत सरकार देश भर की जमीनों और प्रॉपर्टीज का डिजिटल ढांचा सुधारने के लिए एक विशेष व्यवस्था लागू कर रही है, जिसे आम बोलचाल में प्रॉपर्टी आधार कार्ड या भू-आधार (Bhu-Aadhaar) कहा जा रहा है. सरकारी भाषा में इसका असली नाम ULPIN (Unique Land Parcel Identification Number) यानी विशिष्ट भूमि खंड पहचान संख्या है. आइए, समझते हैं कि यह क्या है और इससे प्रॉपर्टी मालिकों को क्या फायदे होंगे.

क्या है प्रॉपर्टी आधार (ULPIN)?

जैसे भारत में हर नागरिक की पहचान के लिए 12 अंकों का यूनिक आधार कार्ड होता है न, ठीक वैसे ही अब देश की हर जमीन, प्लॉट या प्रॉपर्टी के टुकड़े को 14 अंकों का एक यूनिक अल्‍फान्यूमेरिक कोड (14-Digit Code) दिया जा रहा है. इसे ही भू-आधार या प्रॉपर्टी आधार कहा जा रहा है.

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सामान्य आधार कार्ड से यह कितना अलग है?
आधार कार्ड इंसानों की पहचान (Biometric & Identity) के लिए है. जबक‍ि भू-आधार या प्रॉपर्टी आधार जमीन या प्लॉट की पहचान के लिए है. सामान्‍य आधार कार्ड जहां व्यक्ति के नाम, फिंगरप्रिंट और आईरिस डेटा से बनता है. वहीं भू आधार जमीन के अक्षांश और देशांतर (Latitude & Longitude) यानी जियो-कोऑर्डिनेट्स के आधार पर बनता है. दोनों में एक अंतर यह भी है क‍ि सामान्‍य आधार व्यक्ति के साथ उसकी जगह बदल सकती है. लेक‍िन भू-आधार जमीन का भू-भाग अपनी जगह स्थिर रहता है, इसलिए कोड हमेशा यूनिक और परमानेंट रहता है.

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इसके मुख्य फीचर्स क्या हैं?

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  • हर एक प्लॉट, खेत या घर के टुकड़े का अपना एक अलग 14 अंकों का यूनिक कोड नंबर होगा.
  • यह नंबर सैटेलाइट, GPS और ड्रोन सर्वे से जमीन की सटीक सीमाओं का नक्शा (Geospatial Mapping) तैयार करके दिया जाता है.
  • यह कोड आपकी खतौनी/रजिस्ट्री (Land Records), राजस्व अदालत के केस, और मालिक के आधार कार्ड से डिजिटल रूप से लिंक रहता है.
  • यह पूरे देश के लिए एक ही फॉर्मेट में काम करता है, जिससे एक राज्य से दूसरे राज्य में डेटा देखना आसान हो जाता है.

इससे आम जनता को क्या फायदे होंगे?

जालसाजी और फर्जी रजिस्ट्री पर लगाम: अक्सर धोखाधड़ी में एक ही प्लॉट को दो या तीन अलग-अलग लोगों को फर्जी कागजात से बेच दिया जाता है. भू-आधार आने के बाद हर जमीन की डिजिटल पहचान होगी, जिससे डबल रजिस्ट्री या फर्जी डॉक्यूमेंट बनाना नामुमकिन हो जाएगा.

सीमा विवाद (Boundary Disputes) का खात्मा: गांवों या शहरों में अक्सर मेढ़ या जमीन के कब्जे को लेकर पड़ोसियों में झगड़े होते हैं. सैटेलाइट आधारित जियो-टैगिंग की वजह से जमीन का सही दायरा और सीमाएं डिजिटल रूप से तय रहेंगी.

प्रॉपर्टी खरीदना और बेचना आसान: अगर आप कोई नया प्लॉट या प्रॉपर्टी खरीद रहे हैं, तो सिर्फ 14 अंकों का भू-आधार डालकर ऑनलाइन चेक कर सकेंगे कि जमीन का असली मालिक कौन है, उस पर कोई कोर्ट केस या लोन तो नहीं है.

बैंक लोन मिलना आसान: जब जमीन के रिकॉर्ड पूरी तरह साफ और डिजिटल होंगे, तो बैंकों को लोन (Home Loan या Agri Loan) देने में समय नहीं लगेगा और वेरिफिकेशन तुरंत हो जाएगा.

सरकारी योजनाओं और मुआवजे का सीधा लाभ: किसानों को फसल नुकसान का मुआवजा या सरकारी योजनाओं (जैसे पीएम किसान) की राशि सीधे सही जमीन मालिक के खाते में आसानी से मिल सकेगी.