कभी एक-दूसरे के दुश्मन थे जापान-अमेरिका, फिर कैसे बने करीबी दोस्त? अब ओकिनावा की घटना से क्यों बढ़ा तनाव

जापान और अमेरिका कभी द्वितीय विश्व युद्ध में एक-दूसरे के दुश्मन थे. जानिए पर्ल हार्बर से ओकिनावा विवाद तक दोनों देशों के रिश्ते कैसे बदले और आज फिर तनाव क्यों बढ़ा.

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ओकिनावा में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी के बीच बढ़ा तनाव (Photo-ANI)

जापान और अमेरिका आज दुनिया के सबसे करीबी रणनीतिक साझेदारों में गिने जाते हैं. लेकिन करीब 80 साल पहले दोनों देश द्वितीय विश्व युद्ध में एक-दूसरे के खिलाफ लड़ रहे थे. जापान ने अमेरिका के पर्ल हार्बर पर हमला किया था, तो जवाब में अमेरिका ने हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम गिराए. अब ओकिनावा में एक जापानी महिला की हत्या के आरोप में अमेरिकी मरीन की गिरफ्तारी के बाद दोनों देशों के रिश्तों में फिर तनाव बढ़ गया है. जापानी प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने घटना को बेहद गंभीर बताते हुए अमेरिका से अपने सैनिकों में अनुशासन सुनिश्चित करने और जांच में पूरा सहयोग करने की मांग की है. आरोपी मरीन ने आरोपों से इनकार किया है.

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क्या है ओकिनावा का ताजा मामला?

जापानी पुलिस के मुताबिक, 20 वर्षीय अमेरिकी मरीन डेविन जैकब बैलार्ड पर ओकिनावा के नाहा शहर में 39 वर्षीय जापानी महिला अन्ना यागी की हत्या और सामान लूटने का आरोप है. महिला का शव एक होटल के कमरे में मिला था. पुलिस को आशंका है कि उसकी गला दबाकर हत्या की गई. आरोपी जापानी हिरासत में है और आरोपों से इनकार कर रहा है. घटना के बाद जापान में विरोध प्रदर्शन हुए हैं. ताकाइची ने अमेरिका से ऐसे मामलों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने को कहा है. अमेरिकी सेना ने भी मामले को गंभीर बताते हुए जांच में सहयोग की बात कही है. अब अमेरिकी सैनिकों के लिए ओकिनावा में एक महीने का कर्फ्यू और शराब पर रोक जैसे कदम भी उठाए गए हैं. साथ ही सैनिकों को अनुशासन और व्यवहार से जुड़ी ट्रेनिंग दी जा रही है.

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कभी पर्ल हार्बर पर हमला, फिर परमाणु बम

दोनों देशों की दुश्मनी की सबसे बड़ी वजह द्वितीय विश्व युद्ध था. 7 दिसंबर 1941 को जापान ने अमेरिका के पर्ल हार्बर नौसैनिक अड्डे पर हमला किया. इस हमले में 2,400 से ज्यादा अमेरिकी सैनिक और आम लोग मारे गए. इसके बाद अमेरिका पूरी ताकत के साथ युद्ध में उतरा. अगस्त 1945 में उसने जापान के हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम गिराए. दोनों शहरों में भारी तबाही हुई और बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई. कुछ ही समय बाद जापान ने आत्मसमर्पण कर दिया.

दुश्मन से दोस्ती की शुरुआत कैसे हुई?

युद्ध खत्म होने के बाद अमेरिका के नेतृत्व में जापान पर कब्जा हुआ. अमेरिकी जनरल डगलस मैकआर्थर को जापान में मित्र देशों की सर्वोच्च कमान दी गई. लेकिन अमेरिका ने जापान को हमेशा कमजोर रखने के बजाय उसकी राजनीतिक और आर्थिक व्यवस्था बदलने पर जोर दिया. 1947 में जापान का नया संविधान लागू हुआ. इसके अनुच्छेद 9 में युद्ध को राष्ट्रीय नीति के साधन के रूप में त्यागने की व्यवस्था की गई. यानी युद्ध से तबाह जापान ने सैन्य ताकत के बजाय आर्थिक विकास पर ध्यान देना शुरू किया.

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शीत युद्ध ने बदल दिया अमेरिका का नजरिया

कुछ ही साल में एशिया की स्थिति बदल गई. 1949 में चीन में कम्युनिस्ट क्रांति और 1950 में कोरियाई युद्ध के बाद अमेरिका को एशिया में सोवियत संघ और चीन के बढ़ते प्रभाव की चिंता होने लगी. अब अमेरिका के लिए जापान को कमजोर रखना फायदेमंद नहीं था. उसने जापान को आर्थिक और रणनीतिक रूप से मजबूत करने की नीति अपनाई, जिसे इतिहास में ‘रिवर्स कोर्स’ कहा जाता है. 1951 में सैन फ्रांसिस्को शांति संधि हुई, जो 1952 में लागू हुई और जापान की संप्रभुता बहाल हो गई. इसी दौर में दोनों देशों के बीच सुरक्षा समझौता हुआ. जापान को अमेरिकी सुरक्षा मिली और अमेरिका को जापान में सैन्य अड्डे रखने की अनुमति.

कोरियाई युद्ध बना जापान के लिए टर्निंग पॉइंट

1950 का कोरियाई युद्ध जापान की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा मोड़ साबित हुआ. अमेरिकी और संयुक्त राष्ट्र सेनाओं के लिए जापान एक अहम सप्लाई और मरम्मत केंद्र बन गया. जापानी कंपनियों को ट्रक, कपड़े, धातु के सामान, संचार उपकरण और दूसरी चीजों के बड़े ऑर्डर मिलने लगे.बंद पड़ी फैक्ट्रियां फिर चलने लगीं, रोजगार बढ़ा और उद्योगों को नया बाजार मिला. यही दौर आगे चलकर जापान के आर्थिक चमत्कार की नींव बना. युद्ध के बाद जापान ने अपनी सुरक्षा का बड़ा हिस्सा अमेरिका पर छोड़ दिया. इसे आगे चलकर ‘योशिदा सिद्धांत’ कहा गया. जापान ने सैन्य खर्च सीमित रखते हुए पैसा उद्योग, शिक्षा, तकनीक और निर्यात बढ़ाने में लगाया. इसका फायदा दोनों को मिला. जापान तेजी से आर्थिक ताकत बना, जबकि अमेरिका को एशिया में एक मजबूत सैन्य ठिकाना और भरोसेमंद सहयोगी मिल गया.

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फिर ओकिनावा में क्यों बढ़ता रहा गुस्सा?

आज भी जापान में करीब 18 हजार अमेरिकी मरीन हैं और उनमें से ज्यादातर ओकिनावा में तैनात हैं. द्वितीय विश्व युद्ध के बाद ओकिनावा अमेरिकी प्रशासन में रहा और 1972 में जापान को वापस मिला, लेकिन अमेरिकी सैन्य अड्डे यहां बने रहे. शोर, सैन्य विमानों से जुड़ी घटनाओं और अमेरिकी सैनिकों से जुड़े अपराधों को लेकर स्थानीय लोगों में लंबे समय से नाराजगी है. 1995 में तीन अमेरिकी सैनिकों पर एक 12 वर्षीय लड़की के साथ बलात्कार का आरोप लगा था, जिसके बाद बड़े विरोध प्रदर्शन हुए थे. इसलिए मौजूदा हत्या का मामला सिर्फ एक आपराधिक घटना नहीं है. इसने फिर वही पुराना सवाल खड़ा कर दिया है जापान अपनी सुरक्षा के लिए अमेरिका पर कितना निर्भर रहे और इस सैन्य साझेदारी की कीमत ओकिनावा के लोगों को कितनी चुकानी पड़े?

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