अगर आपका या आपके परिवार के किसी सदस्य का खाता पोस्ट ऑफिस (डाकघर) में है, तो यह खबर आपके लिए बहुत जरूरी है. पोस्ट ऑफिस ने अपनी बचत योजनाओं में मिलने वाले ब्याज के एडजस्टमेंट (Interest Adjustment Rules) से जुड़ा एक बेहद अहम नियम बदल दिया है.
अब पोस्ट ऑफिस के कर्मचारी अपनी मर्जी से या सिर्फ एक ही स्तर पर जांच करके आपके खाते के ब्याज में कोई बदलाव नहीं कर पाएंगे. इसके लिए सरकार ने सख्त मेकर-चेकर सिस्टम (Maker-Checker System) लागू कर दिया है, ताकि किसी भी तरह की इंसानी गलती या गड़बड़ी को रोका जा सके.
किन-किन योजनाओं पर पड़ेगा इस नए नियम का असर?
डाकघर की लगभग सभी लोकप्रिय छोटी बचत योजनाओं (Small Savings Schemes) पर यह नया नियम लागू होगा:
- PPF (पब्लिक प्रोविडेंट फंड)
- SSY (सुकन्या समृद्धि योजना)
- POSA (पोस्ट ऑफिस सेविंग्स अकाउंट)
- MIS (मंथली इनकम स्कीम)
- SCSS (सीनियर सिटीजन्स सेविंग्स स्कीम)
- NCS/NSC (नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट/स्कीम)
पहले क्या था नियम और अब क्या बदल गया?
पहले SBCO सुपरवाइजर सक्षम प्राधिकारी (Competent Authority) की मंजूरी मिलने के बाद सीधे सिस्टम में ब्याज बदलने की एंट्री कर देता था. अब एक अधिकारी ब्याज में बदलाव की एंट्री करेगा (Maker) और दूसरे उच्च अधिकारी से जांच के बाद ही वह सिस्टम में मान्य होगा. पहले सिस्टम में दोबारा किसी दूसरे अधिकारी से जांच की जरूरत नहीं होती थी. लेकिन अब बिना डबल-वेरिफिकेशन के कोई भी ब्याज एडजस्ट नहीं किया जा सकेगा.
कैसे काम करेगा नया मेकर-चेकर सिस्टम?
अगर किसी वजह से आपके खाते में मिले ब्याज की रकम को सुधारने या बदलने की जरूरत पड़ती है, तो अब यह प्रक्रिया इन चरणों से गुजरेगी:
- सबसे पहले हेड पोस्टमास्टर मामले और उससे जुड़े कागजात की पूरी जांच करेंगे.
- इसके बाद मामला डिविजनल हेड के पास भेजा जाएगा, जो इसे मंजूरी या खारिज कर सकते हैं.
- मंजूरी मिलने पर हेड ऑफिस का SBCO सुपरवाइजर सिस्टम (HIARM मेन्यू) में एंट्री करेगा, और सर्किल का CPC सुपरवाइजर उसकी अंतिम जांच करके उसे अप्रूव करेगा.
ध्यान दें कि यह बदलाव केवल खाते में जमा ब्याज की रकम (Interest Amount) को सुधारने के लिए है. इस सिस्टम के जरिए खाते के मूलधन (Principal Amount) में कोई बदलाव नहीं किया जा सकता.
5 लाख रुपये तक की सीमा और विशेष तारीखों के नियम
नए नियमों के तहत HIARM के जरिए एक बार में अधिकतम 5 लाख रुपये तक का ही ब्याज एडजस्टमेंट किया जा सकता है. अगर रकम 5 लाख रुपये से अधिक है, तो मामला सीधे CPRC, चेन्नई को भेजा जाएगा.
तारीख (Date) का नियम:
SCSS और MIS खाते में ब्याज सुधार के लिए केवल BOD (Beginning of Day) तारीख का इस्तेमाल होगा.
सेविंग्स अकाउंट में BOD या पिछले वित्तीय वर्ष की 31 मार्च की तारीख का इस्तेमाल किया जा सकेगा.
इस नए नियम से पोस्ट ऑफिस की व्यवस्था में पारदर्शिता (Transparency) आएगी और खाताधारकों का पैसा और ब्याज पूरी तरह सुरक्षित रहेगा. अब कोई भी कर्मचारियों की लापरवाही से गलत ब्याज मिलने या गलत एंट्री होने की गुंजाइश खत्म हो जाएगी.