अल्जाइमर और उम्र के साथ होने वाली भूलने की आदत में क्या है अंतर? AIIMS के डॉक्टर ने बताया कैसे करें पहचान

Bhoolne Ki Bimari: अगर आप भी चीजें रखकर भूल जाते हैं तो यह बिल्कुल भी जरूरी नहीं है कि आपको अल्जाइमर या डिमेंशिया जैसी बीमारी हो. कई बार यह बढ़ती उम्र के साथ होने वाला एक नॉर्मल प्रोसेस होता है, जिसे अक्सर लोग अल्जाइमर जैसी बीमारी का संकेत समझ लेते हैं.  

what is the difference between alzheimer and age related forgetfulness

अल्जाइमर बढ़ती उम्र के साथ होने वाली भूलने की बीमारी से काफी अलग होता है. Image Credit- Magnific

उम्र बढ़ने के साथ चीजें भूलना काफी आम बात है. कई बार चश्मा या चाबी कहां रखी है, किसी इंसान का नाम या किसी काम को लेकर छोटी-सी बात याद नहीं रहती. लेकिन हर तरह की भूलने की समस्या को उम्र बढ़ने का हिस्सा मानना सही नहीं है. कई बार चीजें भूलना अल्जाइमर या डिमेंशिया जैसी बीमारी का संकेत भी हो सकता है. इसके लेकर एम्स की न्यूरोलॉजी विभाग की हेड डॉक्टर मंजरी त्रिपाठी का कहना है कि अल्जाइम में भी अक्सर लोगों को भूलने की बीमारी हो जाती है. ऐसा इसलिए क्योंकि यह डिमेंशिया का एक हिस्सा है. यह धीरे-धीरे बढ़ने वाली बीमारी है जो सीधे याददाश्त, सोचने-समझने पर असर डालता है. हालांकि, यह बढ़ती उम्र के साथ होने वाली भूलने की बीमारी से काफी अलग होता है. अगर वक्त पर इन दोनों के बीच में फर्क समझ लिया जाए तो इलाज करना आसान हो जाता है. 

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उम्र बढ़ने पर भूलना कितना नॉर्मल है?

उम्र बढ़ने के साथ दिमाग की प्रोसेसिंग स्पीड और याददाश्त में कुछ बदलाव आ सकते हैं. इंसान को किसी नाम या शब्द को याद करने में थोड़ा ज्यादा समय लग सकता है या कभी-कभी कोई चीज कहां रखी थी, यह याद करने में परेशानी हो सकती है. लेकिन आमतौर पर अगर इंसान को उससे रिलेटेड कुछ भी दिखता है तो याददाशत वापस आ जाती है. 

बीमारी की वजह से होने वाली भूलने की समस्या में क्या अंतर है?

अल्जाइमर जैसी बीमारी में याददाश्त की समस्या धीरे-धीरे बढ़ सकती है और इसका असर रोज के कामों पर पड़ने लगता है. इंसान हाल में हुई चीजों के बारे में बार-बार भूलने लगता है. एक ही सवाल कई बार पूछता है और अगर वक्त पर इसपर ध्यान न दिया जाए तो यह परेशानी काफी बढ़ जाती है. 

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अल्जाइमर और बढ़ती उम्र में भूलने में क्या है फर्क? 

नॉर्मल उम्र बढ़ने में किसी बात को कभी-कभार भूलना हो सकता है. लेकिन अगर कोई इंसान अभी हुई बातचीत, हाल की घटना या कुछ देर पहले दी गई जानकारी को बार-बार भूलने लगे तो यह चिंता का संकेत हो सकता है. 

  • अगर इंसान उन कामों को करने में भी परेशानी महसूस करने लगे, जिन्हें वह लंबे समय से आसानी से करता आया है तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है. उदाहरण के लिए बिल भरना, दवा समय पर लेना, खाना बनाना या रोज के जरूरी कामों को संभालना मुश्किल लगना. 
  • कभी-कभी किसी चीज का मतलब समझ न आना नॉर्मल हो सकता है, लेकिन अगर इंसान बातचीत के दौरान सही शब्द नहीं ढूंढ पाता या अपनी बात समझाने में लगातार परेशान होता है तो आपको डॉक्टर से जरूर बात करनी चाहिए.
  • याददाश्त की बीमारी का असर सिर्फ मेमोरी पर ही नहीं पड़ता. कुछ लोगों में समय के साथ मूड या बिहेवियर में बदलाव देखने को मिल सकता है. अगर ध्यान न दिया जाए तो चिड़चिड़ा या अजीब बातें करने जैसी परेशानी देखने को मिल सकती है.

कैसे कर सकते हैं पहचान?

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डॉक्टर का कहना है कि जब इंसान को यह याद रहता है कि उनसे गाड़ी की चाबी कहीं रखी है, लेकिन कहां याद नहीं आ रहा है तो यह बढ़ती उम्र के साथ होने वाली एक बीमारी है. वहीं, अगर इंसान को यह याद रहता है कि उसने गाड़ी की चाबी कहीं रखी भी थी तो यह संकेत अल्जाइमर का हो सकता है.

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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.

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लेखक के बारे में

Shadma Muskan

Shadma Muskan

शादमा मुस्कान न्यूज 24 डिजिटल में सीनियर सब एडिटर हैं और हेल्थ व लाइफस्टाइल बीट कवर करती हैं. शादमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के डॉ. भीमराव अंबेडकर कॉलेज से BJMC और दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस से पीजी डिप्लोमा किया है. उन्होंने गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय, हिसार से MJMC की पढ़ाई भी की है. शादमा को पत्रकारिता के क्षेत्र में 5 साल से ज्यादा का अनुभव है. शादमा ने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका और हरिभूमि में इंटर्नशिप से की. इसके बाद, उन्होंने जागरण न्यू मीडिया की वेबसाइट हरज़िंदगी के साथ 4 साल से अधिक समय तक काम किया, जहां उन्होंने हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लेखन किया. इस दौरान उन्होंने ब्यूटी, फैशन, फूड, होम रेमेडीज, गार्डनिंग, होम डेकोर और पेरेंटिंग जैसे विषयों पर भी काम किया. इस अनुभव के दौरान शादमा ने अलग-अलग क्षेत्रों के कई विशेषज्ञों के साथ काम किया है. एक्सपर्ट ओपीनियन के आधार पर वह रीडर्स तक सटीक और आसान शब्दों में चीजों को पहुंचाने का काम कर रही हैं. कुल अनुभव - 5 साल पिछला अनुभव- शादमा ने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की. इसके बाद तहजीब टीवी, हरिभूमि और जागरण न्यू मीडिया की वेबसाइट के साथ चार साल तक हेल्थ और लाइफस्टाइल पर लिखा. किस क्षेत्र में महारत शादमा मुस्कान को लाइफस्टाइल, ट्रैवल, फूड और हेल्थ से जुड़े विषयों के बारे में काफी अच्छी जानकारी है. इसके अलावा शादमा को फूड रिव्यू, किचन गाइड, फैशन टिप्स, शॉपिंग गाइड, ब्यूटी, रिलेशनशिप और इंटीरियर पर वह विशेषज्ञों से बातचीत के आधार पर लिखती हैं.
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