Rajesh Bharti
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PayU Gets RBI Nod as Payment Aggregator Business : फिनटेक कंपनी PayU का 15 महीने लंबा इंतजार आखिरकार खत्म हो गया। रिजर्व बैंक ने कंपनी के ऊपर लगे उस बैन को हटा है जिसके तहत उसे पेमेंट एग्रीगेटर (PA) के रूप में काम करने और नए मर्चेंट को अपने साथ जोड़ने पर रोक लगी थी। अब कंपनी फिर से न केवल पेमेंट एग्रीगेटर के रूप में काम कर सकेगी, बल्कि नए मर्चेंट भी जोड़ सकेगी। हाल ही में पेटीएम पर भी इसी तरह का बैन लगा है।
पिछले साल जनवरी में रिजर्व बैंक ने PA के रूप में काम करने की PayU की एप्लीकेशन को स्वीकार नहीं किया था। बैंक ने कहा था कि कंपनी का कॉर्पोरेट स्ट्रक्चर काफी जटिल है। इसलिए वह फिर से आवेदन करे। इसके बाद कंपनी ने अपने ऑनलाइन पेमेंट एग्रीगेशन बिजनेस के लिए नए मर्चेंट को जोड़ना बंद कर दिया था।
इस तरह का बैन Paytm पर भी लगा है। इससे पहले Razorpay और Cashfree पर भी ऐसा ही बैन लगा था। इन दोनों कंपनियों को पिछले साल दिसंबर में ही मंजूरी मिल गई थी। हालांकि Paytm का मामला अभी भी लटका हुआ है।
PayU के अलावा एक और फिनटेक कंपनी को पेमेंट एग्रीग्रेटर के रूप में काम करने की अनुमति मिल गई है। यह कंपनी Cred है। अब Cred भी मर्चेंट को अपने साथ जोड़ सकेगी।
कंपनी अपने रेवेन्यू में लगातार वृद्धि कर रही है। कंपनी का वित्त वर्ष 2022-23 में 40 करोड़ डॉलर का रेवेन्यू था। यह वित्त वर्ष 2021-22 से 31 फीसदी ज्यादा है। PayU कंपनी अपना विस्तार करने के लिए IPO भी लाना चाहती है। कंपनी के वित्त वर्ष 2023-24 के आंकड़े अभी आए नहीं हैं।
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पेमेंट एग्रीगेटर ग्राहकों को ऑनलाइन पेमेंट और मर्चेंट पेमेंट के लेनदेन की सुविधा मुहैया कराते हैं। दरअसल, ये थर्ड पार्टी सर्विस प्रोवाइडर होते हैं। पेमेंट एग्रीगेटर डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड, कार्डलेस EMI, UPI, बैंक ट्रांसफर आदि सुविधाएं देते हैं।
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