LPG संकट के बीच IRCTC का बड़ा फैसला, इंडक्शन चूल्हों पर पकेगा यात्रियों का भोजन
IRCTC News: एलपीजी की किल्लत के चलते रेलवे का बड़ा फैसला। LHB पैंट्री कारों में बिजली के इंडक्शन चूल्हों पर पकेगा खाना। रोजाना 17 लाख यात्रियों को मिलेगी सेवा।
भारतीय रेलवे के यात्रियों के लिए खानपान सेवाओं से जुड़ी एक बड़ी और महत्वपूर्ण खबर आ रही है। पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में ईरान और अमेरिका के बीच जारी युद्ध के कारण देश में पैदा हुए एलपीजी (LPG) सिलेंडर के संकट को देखते हुए इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन (IRCTC) ने एक बड़ा नीतिगत फैसला लिया है। आईआरसीटीसी अब चलती ट्रेनों के भीतर फिर से खाना पकाने की शुरुआत करने जा रही है। हालांकि, इस बार खाना पकाने के लिए गैस सिलेंडरों का नहीं, बल्कि आधुनिक इलेक्ट्रिक इंडक्शन स्टोव (Electric Induction Stoves) का इस्तेमाल किया जाएगा।
LHB पैंट्री कारों में बिजली से तैयार होगा खाना
इकोनॉमिक टाइम्स (ET) की रिपोर्ट के अनुसार, आईआरसीटीसी ट्रेनों के आधुनिक लिंक हॉफमैन बुश (LHB) पैंट्री कारों के भीतर बिजली की मदद से भोजन तैयार करने की योजना बना रही है। इस कदम के जरिए रोजाना लगभग 1400 ट्रेनों में सफर करने वाले यात्रियों को कैटरिंग सेवाएं दी जाएंगी, जिसके तहत हर दिन करीब 17 लाख (1.7 मिलियन) मील सर्व किए जाते हैं।
यह फैसला वैश्विक ऊर्जा संकट (Global Energy Crisis) के कारण लिया गया है। ईरान-अमेरिका युद्ध की वजह से 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' के बंद होने से दुनिया भर की ऊर्जा आपूर्ति खतरे में है, क्योंकि वैश्विक कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का 20 से 30 प्रतिशत हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है। भारत अपनी जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है, जिसके चलते देश भर में एलपीजी सिलेंडरों की किल्लत महसूस होने लगी है।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम और बड़े स्टेशनों पर भी शुरुआत
आईआरसीटीसी के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक (CMD) संजय कुमार के अनुसार वेंडर्स को पैंट्री कारों के भीतर खाना पकाने की अनुमति दे दी गई है, क्योंकि ये कारें पूरी तरह से अत्याधुनिक सुरक्षा बुनियादी ढांचे (Safety Infrastructure) से लैस हैं। इसके साथ ही उन्होंने जानकारी दी कि बड़े रेलवे स्टेशनों पर भी अब इंडक्शन कुकिंग की शुरुआत कर दी गई है। आपको बता दें कि राजधानी, शताब्दी, दुरंतो और वंदे भारत जैसी प्रीमियम ट्रेनें LHB कोच के साथ ही संचालित होती हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, आईआरसीटीसी के क्लस्टर किचन, बेस किचन और अन्य खाद्य सेवाओं को सुचारू रूप से चलाने के लिए रोजाना लगभग 1000 कमर्शियल सिलेंडरों की आवश्यकता होती है, जिसकी कमी को अब इलेक्ट्रिक कुकिंग से पूरा किया जाएगा।
सालों पहले क्यों बंद हुआ था ट्रेनों में खाना पकाना?
गौरतलब है कि आईआरसीटीसी ने कई साल पहले चलती ट्रेनों के भीतर पूरा भोजन पकाने की प्रक्रिया को बंद कर दिया था और बेस किचन मॉडल को अपनाया था। इसके तहत केंद्रीयकृत (Centralized) रसोई में खाना तैयार कर ट्रेनों में लोड किया जाता था। पुराना नियम लागू करने के पीछे मुख्य उद्देश्य ये थे:
खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता: भोजन की गुणवत्ता और सफाई को बेहतर बनाए रखना। आग का खतरा कम करना: गैस सिलेंडरों के कारण होने वाले अग्निकांड और परिचालन संबंधी जोखिमों (Fire Risks) को न्यूनतम करना। एक जैसी गुणवत्ता: सभी सेवाओं में यात्रियों को एक समान और मानक गुणवत्ता का भोजन सुनिश्चित कराना।
लेकिन मौजूदा अंतरराष्ट्रीय संकट और एलपीजी की भारी कमी के कारण रेलवे को एक बार फिर सुरक्षा मानकों का ध्यान रखते हुए ट्रेनों में इंडक्शन के जरिए कुकिंग की शुरुआत करनी पड़ रही है।
भारतीय रेलवे के यात्रियों के लिए खानपान सेवाओं से जुड़ी एक बड़ी और महत्वपूर्ण खबर आ रही है। पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में ईरान और अमेरिका के बीच जारी युद्ध के कारण देश में पैदा हुए एलपीजी (LPG) सिलेंडर के संकट को देखते हुए इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन (IRCTC) ने एक बड़ा नीतिगत फैसला लिया है। आईआरसीटीसी अब चलती ट्रेनों के भीतर फिर से खाना पकाने की शुरुआत करने जा रही है। हालांकि, इस बार खाना पकाने के लिए गैस सिलेंडरों का नहीं, बल्कि आधुनिक इलेक्ट्रिक इंडक्शन स्टोव (Electric Induction Stoves) का इस्तेमाल किया जाएगा।
LHB पैंट्री कारों में बिजली से तैयार होगा खाना
इकोनॉमिक टाइम्स (ET) की रिपोर्ट के अनुसार, आईआरसीटीसी ट्रेनों के आधुनिक लिंक हॉफमैन बुश (LHB) पैंट्री कारों के भीतर बिजली की मदद से भोजन तैयार करने की योजना बना रही है। इस कदम के जरिए रोजाना लगभग 1400 ट्रेनों में सफर करने वाले यात्रियों को कैटरिंग सेवाएं दी जाएंगी, जिसके तहत हर दिन करीब 17 लाख (1.7 मिलियन) मील सर्व किए जाते हैं।
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यह फैसला वैश्विक ऊर्जा संकट (Global Energy Crisis) के कारण लिया गया है। ईरान-अमेरिका युद्ध की वजह से ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ के बंद होने से दुनिया भर की ऊर्जा आपूर्ति खतरे में है, क्योंकि वैश्विक कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का 20 से 30 प्रतिशत हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है। भारत अपनी जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है, जिसके चलते देश भर में एलपीजी सिलेंडरों की किल्लत महसूस होने लगी है।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम और बड़े स्टेशनों पर भी शुरुआत
आईआरसीटीसी के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक (CMD) संजय कुमार के अनुसार वेंडर्स को पैंट्री कारों के भीतर खाना पकाने की अनुमति दे दी गई है, क्योंकि ये कारें पूरी तरह से अत्याधुनिक सुरक्षा बुनियादी ढांचे (Safety Infrastructure) से लैस हैं। इसके साथ ही उन्होंने जानकारी दी कि बड़े रेलवे स्टेशनों पर भी अब इंडक्शन कुकिंग की शुरुआत कर दी गई है। आपको बता दें कि राजधानी, शताब्दी, दुरंतो और वंदे भारत जैसी प्रीमियम ट्रेनें LHB कोच के साथ ही संचालित होती हैं।
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रिपोर्ट के मुताबिक, आईआरसीटीसी के क्लस्टर किचन, बेस किचन और अन्य खाद्य सेवाओं को सुचारू रूप से चलाने के लिए रोजाना लगभग 1000 कमर्शियल सिलेंडरों की आवश्यकता होती है, जिसकी कमी को अब इलेक्ट्रिक कुकिंग से पूरा किया जाएगा।
सालों पहले क्यों बंद हुआ था ट्रेनों में खाना पकाना?
गौरतलब है कि आईआरसीटीसी ने कई साल पहले चलती ट्रेनों के भीतर पूरा भोजन पकाने की प्रक्रिया को बंद कर दिया था और बेस किचन मॉडल को अपनाया था। इसके तहत केंद्रीयकृत (Centralized) रसोई में खाना तैयार कर ट्रेनों में लोड किया जाता था। पुराना नियम लागू करने के पीछे मुख्य उद्देश्य ये थे:
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खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता: भोजन की गुणवत्ता और सफाई को बेहतर बनाए रखना। आग का खतरा कम करना: गैस सिलेंडरों के कारण होने वाले अग्निकांड और परिचालन संबंधी जोखिमों (Fire Risks) को न्यूनतम करना। एक जैसी गुणवत्ता: सभी सेवाओं में यात्रियों को एक समान और मानक गुणवत्ता का भोजन सुनिश्चित कराना।
लेकिन मौजूदा अंतरराष्ट्रीय संकट और एलपीजी की भारी कमी के कारण रेलवे को एक बार फिर सुरक्षा मानकों का ध्यान रखते हुए ट्रेनों में इंडक्शन के जरिए कुकिंग की शुरुआत करनी पड़ रही है।