11 सितंबर को होने वाली देशव्यापी बैंक हड़ताल (Bank Strike) से ठीक पहले सरकारी बैंक कर्मचारियों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है. केंद्र सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSBs) के अधिकारियों के लिए प्रस्तावित परफॉर्मेंस-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम पर फिलहाल रोक लगा दी है.
बैंक यूनियनों ने सरकार की इस योजना के मौजूदा स्ट्रक्चर पर कड़ा विरोध जताया था. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) के साथ हुई बैठक के बाद वित्त मंत्रालय ने 2025-26 के लिए इस स्कीम के क्रियान्वयन को तुरंत प्रभाव से रोकने का फैसला किया है.
विवाद की जड़: क्यों भड़कीं बैंक यूनियंस?
सरकार द्वारा तैयार किए गए PLI ढांचे में जूनियर और सीनियर अधिकारियों के बीच भारी अंतर था, जिसे यूनियनों ने भेदभावपूर्ण बताया. नए नियम के तहत स्केल-4 और उससे ऊपर के बड़े अधिकारियों को उनकी व्यक्तिगत परफॉर्मेंस के आधार पर 365 दिनों (1 साल) की बेसिक पे के बराबर इंसेंटिव मिलने का प्रावधान था. दूसरी ओर, स्केल-3 तक के अधिकारियों और वर्कमैन (क्लर्क व अन्य कर्मचारियों) को अधिकतम सिर्फ 15 दिनों का बेसिक पे और महंगाई भत्ता (DA) ही देने की बात कही गई थी.
यूनियनों का तर्क था कि यह इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) के साथ हुए द्विपक्षीय समझौते के खिलाफ है. समझौते के अनुसार, PLI को बैंक के कुल प्रदर्शन से जोड़ा जाना चाहिए था और यह स्केल-7 तक के सभी कर्मचारियों के लिए एक समान होना चाहिए था.
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वित्त मंत्री से मुलाकात के बाद लिया गया फैसला
भारतीय मजदूर संघ (BMS) के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात कर अपनी चिंताएं रखी थीं. यूनियनों ने PLI के अलावा एक्स-ग्रेशिया राशि और रिटायर कर्मचारियों के लिए मेडिकल सुविधाओं की समीक्षा की भी मांग उठाई.
मामले की गंभीरता को देखते हुए वित्त मंत्रालय ने 19 नवंबर 2024 को जारी PLI गाइडलाइंस को फिलहाल टाल दिया है. सरकार ने स्पष्ट किया है कि अब इस मुद्दे पर चल रही द्विपक्षीय बातचीत (Bipartite Talks) और संयुक्त चर्चा के दौरान फिर से विचार किया जाएगा.
क्या 11 सितंबर की बैंक हड़ताल टलेगी?
यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) द्वारा 11 सितंबर को प्रस्तावित हड़ताल की मुख्य मांगों में PLI स्कीम की समीक्षा शामिल थी. इस मोर्चे पर सरकार का रुख सकारात्मक रहने से यूनियनों को अपनी बड़ी जीत दिख रही है.
हालांकि, सप्ताह में 5 दिन काम, 2 दिन छुट्टी (5-Day Work Week) लागू करने और पेंशन अपडेशन जैसे बड़े मुद्दे अभी भी पेंडिंग हैं. ऐसे में देखना होगा कि सरकार के इस फैसले के बाद बैंक यूनियंस अपनी हड़ताल वापस लेती हैं या नहीं.