क्या आप जानते हैं कि अगर देश में पेट्रोल के साथ इथेनॉल की ब्लेंडिंग (E20 Fuel) न की जा रही होती, तो आज आपको 1 लीटर पेट्रोल के लिए 125 रुपये तक चुकाने पड़ सकते थे? जी हां, केंद्र सरकार ने संसद में इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल प्रोग्राम का बचाव करते हुए यह बड़ा दावा किया है. सरकार का कहना है कि वैश्विक संकट और कच्चे तेल (Crude Oil) की आसमान छूती कीमतों के बावजूद भारत में पेट्रोल के दाम नियंत्रण में रहे, तो इसका बड़ा श्रेय E20 पेट्रोल को जाता है.
आइए, बिल्कुल आसान और आम आदमी की बोलचाल की भाषा में समझते हैं कि सरकार ने संसद में क्या-क्या आंकड़े पेश किए हैं और आपकी गाड़ी के इंजन पर E20 फ्यूल का क्या असर पड़ रहा है.
125 रुपये का पेट्रोल 95 रुपये से कम में कैसे मिला?
लोकसभा में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी और केंद्रीय राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने लिखित जवाब में बताया. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की दरें तेजी से बढ़ी थीं. अगर सही समय पर देसी इथेनॉल का इस्तेमाल न बढ़ाया गया होता, तो भारत में पेट्रोल की बाजार कीमत लगभग 125 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच जाती.
सरकारी तेल विपणन कंपनियां (OMCs) इथेनॉल को लगभग 70 रुपये प्रति लीटर की दर से खरीद रही थीं. और इथेनॉल मिक्सिंग की वजह से दिल्ली में ग्राहकों को पेट्रोल के लिए केवल 94.77 रुपये प्रति लीटर ही चुकाने पड़े, जिससे आम जनता को हर लीटर पर बड़ी बचत हुई.
क्या E20 पेट्रोल से आपकी गाड़ी का इंजन खराब हो रहा है?
अक्सर सोशल मीडिया पर यह अफवाह सुनने को मिलती है कि इथेनॉल मिक्स पेट्रोल से गाड़ियों के इंजन में जंग लग रही है या माइलेज घट रहा है. इस पर सरकार ने लैब स्टडीज और फील्ड ट्रायल्स के आंकड़े रखकर स्थिति साफ की है.
वर्तमान में देश में 20 करोड़ से ज्यादा टू-वीलर्स (बाइक/स्कूटर) और 3 करोड़ से ज्यादा पेट्रोल कारें E15 और E20 ब्लेंडेड फ्यूल से चल रही हैं. एआरएआई (ARAI), सियाम (SIAM), आईओसी (IOC) और ऑटोमोबाइल कंपनियों के परीक्षणों में इंजन को असामान्य नुकसान पहुंचने, जंग लगने या गाड़ी की लाइफ घटने का कोई प्रमाण नहीं मिला है. ऑटो निर्माता कंपनियां E20 ईंधन का इस्तेमाल करने वाली गाड़ियों के लिए अपनी वारंटी की शर्तों को पूरा कर रही हैं.
वैज्ञानिक तरीके से लागू किया गया प्रोग्राम
सरकार के मुताबिक, E20 प्रोग्राम अचानक नहीं थोपा गया है. इसे नीति आयोग, ऑटोमोबाइल निर्माताओं, तकनीकी संस्थानों और तेल कंपनियों के साथ मिलकर चरणबद्ध और पूरी तरह वैज्ञानिक तरीके से लागू किया गया है. E15 प्लस ईंधन साढ़े तीन साल से और E19-E20 ईंधन पिछले ढाई साल से ज्यादा समय से सुरक्षित रूप से इस्तेमाल हो रहा है.