15 मई, 2026 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज से एक बेहद महत्वपूर्ण और रणनीतिक विदेश यात्रा की शुरुआत कर रहे हैं। 15 मई से 20 मई के बीच पीएम मोदी संयुक्त अरब अमीरात (UAE), नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली के आधिकारिक दौरे पर रहेंगे। इस यात्रा का उद्देश्य रक्षा, ऊर्जा, नई टेक्नोलॉजी और मजबूत सप्लाई चेन जैसे क्षेत्रों में वैश्विक साझेदारी को नई ऊंचाइयों पर ले जाना है। आइए, जानते हैं पीएम के इस 6 दिवसीय दौरे का पूरा खाका।
पहली मंजिल: अबू धाबी में ऊर्जा और रणनीति पर बात

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पीएम मोदी आज अबू धाबी में हैं जहां उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के साथ द्विपक्षीय मुद्दों और ऊर्जा सहयोग पर चर्चा होगी। इस दौरान व्यापक रणनीतिक साझेदारी को लेकर कई महत्वपूर्ण एमओयू (MoUs) पर हस्ताक्षर किए जाएंगे।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की नाकेबंदी के कारण कच्चे तेल की सप्लाई पर खतरा मंडरा रहा है। UAE भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है। पीएम मोदी यहां रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व और LPG सप्लाई को लेकर बड़े समझौते कर सकते हैं, ताकि युद्ध जैसी स्थिति में भी भारत में तेल का संकट न हो।
दूसरी मंजिल: नीदरलैंड में सेमीकंडक्टर और 'ग्रीन' भविष्य

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15 से 17 मई तक पीएम मोदी नीदरलैंड में रहेंगे। यह यात्रा वहां के पीएम रॉब जेटन के निमंत्रण पर हो रही है। यहां फोकस सेमीकंडक्टर, ग्रीन हाइड्रोजन, रक्षा सुरक्षा और पानी से जुड़ी रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने पर होगा। भविष्य की चिप टेक्नोलॉजी और साफ ऊर्जा के लिए नीदरलैंड भारत का एक महत्वपूर्ण संकटमोचक पार्टनर बन सकता है।
तीसरी मंजिल: स्वीडन में AI और स्टार्टअप्स पर जोर

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17 से 18 मई के बीच प्रधानमंत्री स्वीडन के गोथिनबर्ग में रहेंगे। स्वीडन के पीएम उल्फ क्रिस्टसन के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), नई टेक्नोलॉजी, स्टार्टअप्स, स्पेस और डिफेंस सेक्टर में सहयोग बढ़ाने पर लंबी चर्चा होगी।
चौथी मंजिल: नॉर्वे की ऐतिहासिक यात्रा और नॉर्डिक शिखर सम्मेलन

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18 से 19 मई तक पीएम नॉर्वे में रहेंगे। बता दें कि 43 साल बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह पहली नॉर्वे यात्रा है। पीएम मोदी यहां तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। वे नॉर्वे के राजा हेराल्ड वी और रानी सोजा से भी मुलाकात करेंगे।
43 साल बाद किसी भारतीय पीएम का नॉर्वे दौरा यह बताता है कि भारत अब नॉर्डिक देशों (Norway, Sweden, Denmark, Finland, Iceland) को कितनी गंभीरता से ले रहा है। ये देश AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस), ब्लू इकोनॉमी और आर्कटिक क्षेत्र की रिसर्च में दुनिया के लीडर हैं। चीन के बढ़ते प्रभाव के बीच, नॉर्डिक देशों के साथ भारत का गठबंधन 'रेज़िलिएंट सप्लाई चेन' (मजबूत सप्लाई चेन) बनाने में मदद करेगा।
पांचवीं मंजिल: इटली में मेलोनी के साथ रक्षा और सुरक्षा पर संवाद

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यात्रा के अंतिम चरण में 19 से 20 मई तक प्रधानमंत्री इटली में रहेंगे। पीएम मेलोनी के निमंत्रण पर हो रही इस यात्रा में इटली के राष्ट्रपति सर्जियो मेटेरेला से मुलाकात होगी। रक्षा और सुरक्षा संबंधों को और प्रगाढ़ बनाने पर जोर दिया जाएगा। पीएम मेलोनी और मोदी के बीच बढ़ती केमिस्ट्री के पीछे रक्षा और सुरक्षा के बड़े हित छिपे हैं। भारत इटली के साथ मिलकर डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग और क्लीन एनर्जी में साझेदारी बढ़ा रहा है। इटली यूरोप में भारत के लिए एक मजबूत दोस्त बनकर उभरा है जो वैश्विक मंचों पर भारत का पक्ष रखता है।
क्यों ये मुल्क हैं संकटमोचक?

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भारत-ईयू फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) और भारत-EFTA समझौते के बाद ये देश भारतीय निर्यातकों के लिए नए दरवाजे खोलेंगे। जब खाड़ी देशों में तनाव बढ़ता है, तब यूरोप के ये देश (विशेषकर नॉर्वे) ऊर्जा और नई टेक्नोलॉजी के मामले में भारत के बैकअप प्लान का हिस्सा बन सकते हैं। प्रधानमंत्री ने लोगों से सोना कम खरीदने की अपील की है, ताकि विदेशी मुद्रा बचे। वहीं इन देशों की यात्रा का मकसद भारत में विदेशी निवेश (FDI) लाना है, जिससे देश की इकोनॉमी और रुपया मजबूत हो सके।