8th Pay Commission: इस तारीख को होगी फाइनल फिटमेंट फैक्टर की घोषणा, आएगा नए वेतन आयोग का फैसला; जानिए

पुराने अनुभवों को देखें तो सटीक वित्तीय आंकड़े सामने आने में 2027 तक का समय लग सकता है। इससे पहले 7वें वेतन आयोग का गठन 28 फरवरी, 2014 को हुआ था। इसे अपनी सिफारिशें तय करने और रिपोर्ट सौंपने में लगभग 21 महीने का लंबा समय लगा, जिसके बाद 19 नवंबर, 2015 को रिपोर्ट पेश की गई थी।

8th pay commission latest update (7)

7वें वेतन आयोग में फ‍िटमेंट फैक्‍टर पर मुहर लगने में 21 महीनों का वक्‍त लगा था

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देश के लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के बीच इन दिनों 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) को लेकर उत्सुकता चरम पर है। हर कोई यह जानना चाहता है कि नए वेतन आयोग के तहत उनका ‘फिटमेंट फैक्टर’ कितना होगा और उनकी सैलरी में कितनी बढ़ोतरी होगी। आमतौर पर केंद्र सरकार हर 10 साल में एक बार कर्मचारियों के वेतन और पेंशन में संशोधन के लिए वेतन आयोग का गठन करती है। आइए, पिछले वेतन आयोगों के ट्रेंड और इतिहास के जरिए समझते हैं कि बढ़ी हुई सैलरी आपकी जेब तक कब तक पहुंचेगी और इसका पूरा टाइमलाइन और गणित क्या है।

कब तक आएगी रिपोर्ट? पुराने ट्रेंड से समझें टाइमलाइन

अगर आप सोच रहे हैं कि 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें बहुत जल्द लागू हो जाएंगी, तो आपको थोड़ा इंतजार करना पड़ सकता है। पुराने अनुभवों को देखें तो सटीक वित्तीय आंकड़े सामने आने में 2027 तक का समय लग सकता है। इससे पहले 7वें वेतन आयोग का गठन 28 फरवरी, 2014 को हुआ था। इसे अपनी सिफारिशें तय करने और रिपोर्ट सौंपने में लगभग 21 महीने का लंबा समय लगा, जिसके बाद 19 नवंबर, 2015 को रिपोर्ट पेश की गई थी।

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8वें वेतन आयोग का गठन 3 नवंबर, 2025 को किया गया था। यानी आयोग को अपनी रिपोर्ट सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है। इस लिहाज से इसकी आधिकारिक समय सीमा मई 2027 बैठती है। लेकिन यदि पिछले आयोगों की तरह इसमें थोड़ा और समय लगता है, तो उम्मीद है कि यह अंतिम रिपोर्ट 25 जुलाई, 2027 के आसपास जमा की जा सकती है।

क्या है फिटमेंट फैक्टर और कैसे काम करता है इसका फॉर्मूला?

नए कर्मचारियों के लिए यह जानना बेहद जरूरी है कि फिटमेंट फैक्टर वह गणितीय गुणांक (Coefficient) है जो पुराने मूल वेतन (Basic Pay) को नए वेतन ढांचे में बदल देता है। इसका सीधा और सरल फॉर्मूला इस प्रकार है:

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वर्तमान मूल वेतन (Current Basic Pay)×फिटमेंट फैक्टर (Fitment Factor)=नया मूल वेतन (New Basic Pay)
7वें वेतन आयोग का गणित: पिछले वेतन आयोग में 2.57 का फिटमेंट फैक्टर लागू किया गया था। इसके परिणामस्वरूप केंद्रीय कर्मचारियों की न्यूनतम बेसिक सैलरी ₹7,000 (6ठे वेतन आयोग के तहत) से सीधे बढ़कर ₹18,000 हो गई थी।

8वें वेतन आयोग से क्या है उम्मीद?:

क्‍योंक‍ि यह बड़ा वेतन संशोधन दशक में केवल एक बार होता है, इसलिए इसका महत्व बहुत अधिक है। हालांकि सरकार की तरफ से अभी कोई आधिकारिक फिटमेंट फैक्टर तय नहीं हुआ है, लेकिन विशेषज्ञों और विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार इस बार यह मल्टीप्लायर 2.28 से लेकर 3.83 के बीच कुछ भी हो सकता है।

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पहले कैसे तय होती थी सैलरी? अब बदल चुका है तरीका

आज भले ही वेतन वृद्धि का मुख्य आधार फिटमेंट फैक्टर बन गया है, लेकिन पहले ऐसा नहीं था। पहले से लेकर पांचवें वेतन आयोग तक सैलरी बढ़ाने का कोई एक समान फॉर्मूला नहीं था। पहले के समय में वेतन संशोधन के लिए अधिक जटिल तरीके अपनाए जाते थे, जिसमें वेतन का युक्तिकरण (Pay Rationalization), महंगाई भत्ते (DA) का मूल वेतन में विलय और आवश्यकता-आधारित मजदूरी की गणना (Need-based Wage Calculation) शामिल थी। हालांकि तरीके अलग थे, लेकिन मुख्य उद्देश्य हमेशा एक ही रहा—कर्मचारियों के वेतन को तत्कालीन आर्थिक परिस्थितियों और प्रशासनिक जरूरतों के अनुकूल बनाना।

1.1 करोड़ से अधिक लोग होंगे सीधे प्रभावित

इस वेतन आयोग के फैसलों का देश की अर्थव्यवस्था और समाज पर बहुत बड़ा असर पड़ेगा। 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों से देश के 1.1 करोड़ (11 मिलियन) से अधिक लाभार्थी सीधे प्रभावित होंगे। इसमें न केवल वर्तमान केंद्रीय कर्मचारी और पेंशनभोगी शामिल हैं, बल्कि उनके परिवार भी जुड़े हुए हैं। भारत में पहले वेतन आयोग की स्थापना जनवरी 1946 में हुई थी और तब से अब तक कुल सात वेतन आयोग आ चुके हैं। अब, 8वें वेतन आयोग की अंतिम रिपोर्ट अगले एक दशक के लिए कर्मचारियों की वित्तीय स्थिति तय करेगी।

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लेखक के बारे में

Vandana Bharti

Vandana Bharti

वन्‍दना भारती News 24 में बतौर ड‍िप्‍टी न्‍यूज एडिटर कार्यरत हैं और मौजूदा समय में बिजनेस डेस्‍क संभाल रही हैं. वन्दना News 24 के लिए स्टॉक मार्केट, पर्सनल फाइनेंस, कमोडिटी मार्केट, सरकारी योजनाओं पर खबरें लिखती हैं. वन्‍दना ने अपने करियर की शुरुआत दैन‍िक जागरण अखबार से की. इसके बाद देशबंधु अखबार में उन्होंने ब‍िजनेस रिपोर्टिंग में अपनी विशेषज्ञता विकसित की. साल 2010 में उन्होंने ह‍िन्‍दुस्‍तान अखबार में अपनी सेवाएं दीं, जहां उन्होंने ब‍िजनेस पेज के लिए 6 साल तक काम किया. वन्‍दना, आजतक डिजिटल, India.com और News18.com जैसे न्यूज प्लेटफॉर्म्स में बिजनेस डेस्क से जुड़ी रही हैं. वन्दना ने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीकॉम किया है. कॉमर्स बैकग्राउंड होने के कारण उनकी बिजनेस की खबरों में अच्छी पकड़ है और इन खबरों को वह आसान भाषा में यूजर्स तक पहुंचाती हैं. कितने साल का अनुभव: 18 साल योग्यता: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बी.कॉम और नई द‍िल्‍ली के YMCA संस्‍थान से पत्रकार‍िता में पीजीडीएमए की डिग्री प्राप्त की है.
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