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बिजनेस

Air Ticket Price Alert: अमेरिका-ईरान युद्धविराम के बाद क्‍या घटने वाला है एयरफेयर? IATA ने द‍िया जवाब

अगर आप ये सोच रहे हैं क‍ि अमेर‍िका और ईरान के बीच युद्ध व‍िराम के बाद सब कुछ सामान्‍य हो जाएगा और बढ़ा हवाई क‍िराया भी कम हो जाएगा, तो आपको IATA की ये चेतावनी जरूर पढ़नी चाह‍िए। जान‍िये एयरफेयर को कम करने के बारे में IATA ने क्‍या कहा है।

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Written By: Vandana Bharti Updated: Apr 8, 2026 16:26

भले ही अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम (Ceasefire) और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को खोलने पर सहमति बन गई हो, लेकिन आपकी हवाई यात्रा की टिकटें अभी सस्ती होने वाली नहीं हैं। अंतरराष्ट्रीय हवाई परिवहन संघ (IATA) ने चेतावनी दी है कि वैश्विक विमानन क्षेत्र (Aviation Sector) में जेट फ्यूल (ATF) का संकट आने वाले कई महीनों तक जारी रह सकता है। आइए जानते हैं कि युद्ध रुकने के बावजूद हवाई किराए क्यों कम नहीं हो रहे हैं और सप्लाई चेन में कहां अड़चन आ रही है।

सप्लाई बहाल होने में हफ्तों नहीं, लगेंगे महीने

IATA के महानिदेशक विली वॉल्श ने स्पष्ट किया है कि कच्चे तेल (Crude Oil) का प्रवाह शुरू होने का मतलब यह नहीं है कि विमान का ईंधन तुरंत उपलब्ध हो जाएगा। उन्होंने कहा क‍ि मिडिल ईस्ट में रिफाइनिंग क्षमता (Refining Capacity) को जो नुकसान पहुंचा है, उसे पटरी पर लाने में हफ्तों नहीं बल्कि महीनों का समय लगेगा।

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हवाई किराए बढ़ना क्यों है जरूरी?
विमानन कंपनियों के लिए जेट फ्यूल उनके परिचालन खर्च (Operating Cost) का दूसरा सबसे बड़ा हिस्सा है, जो कुल खर्च का लगभग 27% होता है। युद्ध के दौरान जेट फ्यूल की कीमतें कच्चे तेल की तुलना में दोगुनी तेजी से बढ़ी हैं। विली वॉल्श के अनुसार, एयरलाइंस के लिए बढ़े हुए खर्च को यात्रियों पर डालना जरूरी (Inevitable) हो गया है। इसका मतलब है कि आने वाले समय में ग्लोबल एयरफेयर में और बढ़ोत्तरी देखी जा सकती है।

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COVID-19 जैसा संकट नहीं, पर रिकवरी में लगेगा समय
IATA ने इस संकट की तुलना महामारी (Pandemic) से करने से इनकार किया है। वॉल्श ने ऐतिहासिक उदाहरण देते हुए बताया क‍ि 9/11 हमले के बाद रिकवरी में लगभग 4 महीने लगे थे। वहीं 2008-09 की मंदी से सुधार में 10 से 12 महीने लगे थे। अभी के संकट में भी एयरलाइंस को अपने पुराने रूट और क्षमता बहाल करने में समय लगेगा। खाड़ी देशों की एयरलाइंस (Gulf Carriers) द्वारा छोड़े गए गैप को भरना फिलहाल मुश्किल दिख रहा है।

क्या भारत और नाइजीरिया बनेंगे संकटमोचक?
मिडिल ईस्ट की रिफाइनरियों में आई बाधा को देखते हुए अब दुनिया की नजरें भारत और नाइजीरिया पर टिकी हैं। इन देशों के पास बड़ी रिफाइनिंग क्षमता मौजूद है। जैसे ही कच्चे तेल का प्रवाह शुरू होगा, भारत और एशिया की अन्य रिफाइनरियां सप्लाई को स्थिर करने में मदद कर सकती हैं, लेकिन इसमें थोड़ा समय लगेगा।

अगर आप आने वाले महीनों में विदेश यात्रा या घरेलू उड़ान की योजना बना रहे हैं, तो ऊंचे किराए और सीमित फ्लाइट्स के लिए तैयार रहें। युद्धविराम से शांति का रास्ता तो खुला है, लेकिन विमानन क्षेत्र के लिए आर्थिक लैंडिंग अभी भी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।

First published on: Apr 08, 2026 04:22 PM

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