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पूरी दुनिया तेजी से बदल रही है…बहुत तेजी से . शायद इतनी तेजी से, जिसकी कल्पना हम और आप नहीं कर पा रहे हैं . इंटरनेट हमारी जिंदगी में इस तरह घुल-मिल और जुड़ चुका है, जिसे अलग करना नामुमकिन होता जा रहा है . हमें पूरी दुनिया के साथ जोड़ने से लेकर ड्राइविंग के दौरान रास्ता बताने तक, मुश्किल सवालों का जवाब तलाशने से लेकर मनोरंजन तक में इंटरनेट गुरु, गाइड और फिलोसफर की भूमिका में है. अब तक इंटरनेट पर बातचीत का तरीका कमांड आधारित रहा है. अगर इंटरनेट पर कुछ सर्च करना है तो Query टाइप करना पड़ता है या Smart Speaker के जरिए Voice Command देना पड़ता है . लेकिन, अब ये तरीका पुराना हो चुका है . Google के CEO सुंदर पिचाई ने ऐलान किया है कि अब गूगल सर्च को 24 घंटे काम करनेवाला एजेंट बना दिया गया है . मतलब, गूगल सर्च इंजन सिर्फ लिंक्स दिखाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि Gemini 3.5 Flash और एंटीग्रेविटी टेक्नोलॉजी की ताकत से लैस एक लाइव AI एजेंट के रूप में काम करेगा. आसान भाषा में कहा जाए तो Google AI के साथ आपकी न सिर्फ बातें सुनेगा, बल्कि आपकी ज्यादातर समस्याओं को सुलझाने में मदद करेगा. खुद आपकी जरूरत के हिसाब से सुझाव देगा . गूगल अब सर्च इंजन से सुपर स्मार्ट AI असिस्टेंट बन गया है . इसी तरह चीन और ताइवान ऐसे घरेलू स्मार्ट अप्लायंस बनाने की ओर बढ़ रहे हैं – जिनके भीतर हालात और जरूरत के मुताबिक निर्णय लेने की क्षमता हो . ऐसे में आज मैं आपको बताने की कोशिश करूंगी कि पिछले 10-15 वर्षों में इंटरनेट ने हमारी जिंदगी में किस तरह के बदलाव किए ? 2026 का कैलेंडर पलटने से पहले आपकी जिंदगी में किस तरह के हाईटेक डिजिटल गैजेट्स जुड़ सकते हैं – जो लोगों को हर कदम पर स्मार्ट तरीके से गाइड करेंगे ? आपके एक इशारे पर वीडियो रिकॉर्ड करने लगेंगे. किसी अनजान भाषा में लिखे साइन बोर्ड का आपकी भाषा में अनुवाद कर देंगे ? अगले 10 साल में एक आदमी की रोजमर्रा की जिंदगी में इंटरनेट से लैस सुपर स्मार्ट गैजेट्स किस तरह की भूमिका निभाएंगे.

इंटरनेट का ‘क्रांति’ काल, कितनी बदलेगी जिंदगी?

क्या आपने कभी सोचा है कि 10 साल बाद हमारी जिंदगी में इंटरनेट की अहमियत कितनी होगी? हमारी रोजमर्रा की जिंदगी चलाने में इंटरनेट किस तरह की भूमिका निभा रहा होगा ? हमारी किस तरह मदद कर रहा होगा ? हमारे फैसलों पर इंटरनेट की कितनी छाप होगी? सामान्य लोगों की जिंदगी में किस तरह इंटरनेट आंधी-तूफान की तरह आया और जिंदगी का अभिन्न हिस्सा बन गया . इंटरनेट अभी अपनी विकास यात्रा के चरम पर है या ढलान की ओर . इसे जानना और समझना भी जरूरी है . दरअसल, इंटरनेट की उम्र यही कोई 57 साल होगी . वो साल 1969 का था… महीना अक्टूबर का . ARPANET ने अपना पहला संदेश कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के लॉस एंजिल्स में एक कंप्यूटर से स्टैनफोर्ड में स्थिति दूसरे कंप्यूटर को संदेश भेजा . दोनों कंप्यूटरों के बीच दूरी करीब 500 किलोमीटर थी. वो पहला संदेश था LOGIN… लेकिन, दूसरे कंप्यूटर तक पहुंचा सिर्फ दो लेटर LO… यहीं से इंटरनेट की शुरुआत मानी जाती है. हमारे देश में आम लोगों के लिए इंटरनेट की शुरुआत हुई 15 अगस्त, 1995 को हुई लेकिन, देश के आम आदमी को इंटरनेट का असली मतलब समझ में आया इस अदृश्य ताकत के स्मार्टफोन में उतरने के साथ . आज की तारीख में भारत में इंटरनेट यूजर्स की संख्या करीब 90 करोड़ होने का अनुमान है . हमारे देश में करीब एक अरब स्मार्टफोन डिवाइस इस्तेमाल में हैं . इंटरनेट से लैस स्मार्टफोन लोगों की जिंदगी में इस तरह शामिल हो चुका है – जैसे इसके बगैर जिंदगी अधूरी हो . ऐसे में सबसे पहले ये समझते हैं कि इंटरनेट और गूगल सर्च की दुनिया में आखिर नया क्या हो रहा है?

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आज की तारीख में किसी को ये बताने की जरूरत नहीं है कि Google क्या काम करता है, Google से क्या-क्या किया जा सकता है? अगर कुछ जानना हो- तो गूगल. समझना हो तो गूगल, किसी संदेह को दूर करना हो तो गूगल…कहीं पहुंचना हो और रास्ता नहीं पता तो गूगल मैप. किसी की स्पीच सुननी हो तो गूगल…मनोरंजन करना हो तो गूगल . आज की तारीख में इंटरनेट से लैस हर स्मार्टफोन में मौजूद गूगल अलग – अलग तरीके से लोगों की जिंदगी से जुड़ा है. गूगल की एक कंपनी के तौर पर उम्र मुश्किल से 28 साल है … लेकिन, दुनिया जिस रफ्तार से बदल रही है- उसमें गूगल भी खुद को बदलने में लगा है और वो भी तेजी से…बहुत तेजी से. जिसे नाम दिया जा रहा है एजेंटिक ट्रांसफॉर्मेशन. मतलब, आने वाले समय में टेक्नोलॉजी हमारे कामकाज के तौर-तरीके में बड़ा बदलाव करने वाली है .

हाल में एक इंटरव्यू के दौरान गूगल के CEO सुंदर पिचाई ने कहा कि तीन साल बाद जब आप आज की तकनीक को पीछे मुड़कर देखेंगे तो महसूस करेंगे कि वो सब कितना शुरुआती और साधारण था . गूगल की पहचान एक समय सर्च कंपनी के तौर पर रही…फिर इंटरनेट कंपनी बन गयी…Youtube के साथ इंटरनेट वीडियो कंपनी बन गयी…अब गूगल एक AI कंपनी बनता जा रहा है . मतलब, गूगल अपने हर प्रोडक्ट में AI का लेटेस्ट वर्जन जोड़ने में लगा है…ऐसे में आने वाले समय में सर्च से लेकर वीडियो क्रिएशन तक में क्रांतिकारी बदलाव तय है . सुंदर पिचाई का साफ-साफ कहना है कि हम बड़े तकनीकी बदलाव के दौर से गुजर रहे हैं,जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस भविष्य की नींव बन रहा है . दरअसल, AI का विकास तीन चरणों में हुआ है .

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  1. AI से सवाल पूछते थे, जिसका जवाब आता था .
  2. AI से बातचीत करने लगे यानी Interactive हुआ
  3. AI खुद हमारे लिए काम करेगा और जिंदगी आसान बनाएगा .

गूगल के सालाना डेवलपर कॉन्फ्रेंस में सुंदर पिचाई ने एजेंटिक जेमिनी एरा का ऐलान किया . उनका दावा है कि जेमिनी सिर्फ चैटबॉट नहीं बल्कि Search, Youtube, Android और Workspace में काम करने वाला स्मार्ट AI एजेंट बन चुका है .गूगल सर्च अब सिर्फ एक सामान्य सर्च इंजन नहीं बल्कि एक सुपर स्मार्ट AI असिस्टेंट बन चुका है-जो ना सिर्फ आपकी बातें सुनेगा बल्कि जरूरत के हिसाब से काम भी करेगा . गूगल के नए Gemini 3.5 Flash मॉडल को बदलाव के बड़े सारथी के रूप में देखा जा रहा है . गूगल सर्च बॉक्स में जितना लंबा और उलझा हुआ सवाल रहेगा…ये बॉक्स उसी हिसाब से बड़ा होगा . फोटो, वीडियो, फाइल ही नहीं क्रोम के खुले टैब्स भी इनपुट के तौर पर डाला जा सकता है … समस्याओं का समाधान पूछा जा सकता है .

ऑनलाइन समस्याओं को सुलझाने के काम पर भी लगाया जा सकता है . गूगल एक नया फीचर ला रहा है -जिसे नाम दिया जा रहा है Information Agents..ये एजेंट्स 24×7 इंटरनेट ब्लॉग, सोशल मीडिया, शॉपिंग साइट, शेयर मार्केट पर नजर रखेंगे… इसके पास यूजर्स के सवाल, समस्या और टास्क का पुराना लेखा-जोखा भी होगा . ऐसे एजेंट को जरूरत के हिसाब से 24×7 काम पर लगाया जा सकता है . Antigravity Technology की मदद से गूगल सर्च इंजन अब रियल टाइम कस्टमाइज्ड लेआउट टेबल और लाइव डैशबोर्ड तैयार कर देगा…किसी मुश्किल विषय पर जानकारी मांगने पर तुरंत लाइव विजुअल सिमुलेशन बना देगा . ऐसे में YouTube कंटेंट क्रिएशन की दुनिया में भी तेजी से बड़ा बदलाव तय है .

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लोगों के हाथों में जल्द Flow जैसे टूल्स होंगे- जिनकी मदद से लोग खुद अपना वीडियो एडिट कर सकेंगे…दुनिया के सामने अपनी कहानी को प्रभावशाली तरीके से रख सकेंगे . आने वाले दिनों में Google लोगों के हाथों में इतने हाईटेक टूल्स देने की तैयारी में है – जिससे वीडियो कंटेंट क्रिएशन की पूरी दुनिया बदल जाएगी…एक 15-16 साल का बच्चा भी अपनी उम्दा सोच को बेहतरीन फिल्म के रूप में दुनिया के सामने आसानी से रख सकेंगा . इतिहास, विज्ञान और मेडिकल साइंस के गूढ़ रहस्यों से जुड़े मुद्दों पर आसानी से वीडियो एक्सप्लेनर तैयार किए जा सकेंगा .

सुंदर पिचाई साफ-साफ कह चुके हैं कि गूगल सर्च का नया अवतार लोगों के सामने होगा . गूगल की नई Antigravity Technology की मदद से सर्च इंजन रियल टाइम कस्टमाइज्ड लेआउट, टेबल और लाइव डैशबोर्ड तैयार कर देगा . लोगों की जरूरत के हिसाब से मिनी ऐप्स बना सकता है . इंटरनेट और हाईटेक चीप से लैस स्मार्ट डिवाइस इतने आगे बढ़ चुके हैं – जो आपको कहीं अकेला नहीं छोड़ रहे . भले ही आपको लग रहा हो कि आपके अगल-बगल में कोई नहीं है…आप कमरे में या दफ्तर में अकेले हों…आपको कोई देख या सुन नहीं रहा है…तो ये आपकी गलतफहमी है . गूगल का सुपर स्मार्ट AI Assistant 24×7 आपके साथ है . वो आपकी पसंद-नापसंद पर पैनी नजर रखे हुए हैं… वो आपकी पुरानी चीजों को भी याद रखे हुए हैं . मान लीजिए आपको एक परफ्यूम खरीदना है – तो बता देगा कि आपकी जेब के हिसाब से कौन सा परफ्यूम बेहतर रहेगा? बाजार में उस रेंज में कौन-कौन परफ्यूम मौजूद हैं? अगर कहीं छुट्टी प्लान कर रहे हैं..तो आपके बजट के हिसाब से लोकेशन से लेकर टूर प्लान तय करने में एक स्मार्ट ट्रेवल एजेंट जैसी भूमिका निभाता दिख सकता है . जिस तरह हर हाथ में स्मार्टफोन ने इंटरनेट का फायदा आम आदमी तक पहुंचाया… उसी तरह इंटरनेट का एक अवतार AI Smart Glasses के विस्तार के साथ भी दिखना तय है .

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पहले इंटरनेट पर कुछ भी सर्च के लिए DeskTop पर जाना पड़ता था..फिर आया लैपटॉप. उसके बाद स्मार्टफोन . इससे हर व्यक्ति अपने साथ इंटरनेट की शक्ति जेब और हाथ में लेकर घूमने लगा. दुनिया से लोगों का कनेक्शन और मजबूत करने के लिए ऐसे गैजेट की जरूरत महसूस की जाने लगी- जो भाषा की खाई को पाट दें …जो आंखों के सामने जरूरत के हिसाब से हर तरह की जानकारी आती रहे . इस कमी को पूरा करने के लिए गूगल और सैमसंग मिलकर एक ऐसा चश्मा लाने की तैयारी में हैं-आपकी आवाज सुनेंगे, सामने की चीजें समझेंगे,उसे आपकी भाषा में अनुवाद कर बताएंगे… आपको रास्ता बताने से लेकर खाना ऑर्डर करने जैसा काम भी करेंगे . इतना ही नहीं, फोटो और वीडियो एडिट जैसा मुश्किल काम भी आसानी से करते दिख सकते हैं . अभी तक जो जानकारी सामने आ रही है – उसके मुताबिक, गूगल और सैमसंग दो तरह के चश्मे लाने की तैयारी में हैं .

  1. ऑडियो ग्वासेस..इनके फ्रेम में स्पीकर लगे होंगे – जो इस्तेमाल करने वाले शख्स के सवालों का बोलकर जवाब देंगे . ऐसे चश्मों के कुछ महीनों में ही बाजार में आने की संभावना है .
  2. दूसरा, डिस्प्ले ग्लासेस…इस कैटेगरी के स्मार्ट ग्लासेस में यूजर की आंखों के सामने स्क्रीन पर जानकारी टेक्सट के रूप में सामने आएगी .

जेमिनी AI की शक्ति से लैस ऐसे स्मार्ट ग्लासेस को इस्तेमाल करने के लिए जेब से पड़े फोन को टच करने की जरूरत नहीं पड़ेगी. दफ्तरों की कार्य संस्कृति को भी तेजी से बदलनी तय है . गूगल एक नया फीचर जोड़ने की तैयारी में है-जिसे Docs Live नाम दिया जा रहा है . इस फीचर के तहत यूजर जो भी बातचीत करेंगे – उसे जेमिनी एक प्रोफेशनल डॉक्यूमेंट में बदल देगा . अनुमान लगाया जा रहा है कि आने वाले समय में इस फीचर को Gmail में भी जोड़ा जा सकता है .

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पूरी दुनिया का सबसे बड़ा डिजिटल गुरु और गाइड खुद को तेजी से बदलने में लगा है … गूगल ने जिस तरह AI प्लेटफॉर्म जेमिनी को पूरी तरह अपने इंटेलिजेंट ग्लासेस के साथ जोड़ा है- उसमें माना जा रहा है कि दुनिया तेजी से बदलने वाली है . ऐसे में गूगल के स्मार्ट चश्मे दूसरी भाषाओं में लिखे साइन बोर्ड को रीयल टाइम बढ़कर बताएंगे . अगर कोई फ्रेंच, जर्मन, स्पेनिश या मंदारिन जैसी भाषा में बोल रहा है – जो उसे यूजर की भाषा में अनुवाद कर बताएगा… ऐसे में भविष्य के स्मार्ट गैजेट भाषा की खाई पाटने में बड़ी भूमिका निभाते दिख सकते हैं .

जरा सोचिए…एक साधारण से दिखने वाला चश्मा भी इतना हाईटेक और स्मार्ट होगा – जो बिना टच के किसी को मैसेज भेजने से लेकर कॉल करने जैसा काम कर सकेगा . एक कमांड पर बिना सामने वाले को भनक लगे – वीडियो और फोटो कैद करने लगेगा…एक कमांड पर कैप्चर वीडियो-फोटो को एटिड करना शुरू कर देगा . पहले ही मेटा और रे-बैन मिलकर स्मार्ट ग्लासेस बाजार में उतार चुके हैं – जो बिल्कुल किसी धूप चश्मे की तरह दिखते हैं . इसमें बेहतरीन कैमरे, इन-बिल्ट स्पीकर, माइक्रोफ़ोन और एआई तकनीक जुड़ी है…जो वॉयस कमांड पर तस्वीर क्लिक करने से लेकर मौसम का मिजाज जानने तक..हैंड्स-फ़्री कॉल से दूसरी भाषाओं से अनुवाद में मदद कर सकते हैं . ऐसे में हिसाब लगाइए कि तकनीक की दुनिया में कितनी तेजी से बदलाव हो रहा है…अभी तो स्मार्ट फोन, स्मार्ट वॉच से स्मार्ट ग्लासेस की ओर सफर की शुरुआत हुई है – आने वाले वर्षों में न जाने और कितने हाईटेक स्मार्ट गैजेट…सुपर इंटेलिजेंस और स्मार्ट गैजेट बाजार में होंगे .

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गूगल और सैमसंग ने मिलकर इस तरह के Smart Glasses तैयार किए हैं, जिससे लोगों को हर छोटी-बड़ी चीज के लिए स्मार्टफोन निकालने की जरूरत नहीं पड़ेगी…Gemini AI से लैस इस तरह के Glasses रास्ता बताने से लेकर लाइव ट्रांसलेशन का काम आसानी से करेंगे . मतलब, आने वाले वर्षों में भाषा का गैप बहुत हद तक खत्म हो जाएगा . अगर कोई हिंदी भाषी तमिलनाडु या केरल के किसी गांव में जाता है – तो वहां की स्थानीय भाषा में लिखे साइन बोर्ड या होर्डिंग का हिंदी में अनुवाद आंखों के सामने होगा. ये भी मुमकिन है कि Voice Command पर वीडियो रिकॉर्डिंग से लेकर फोटो खींचने तक काम मुमकिन हो…ये भी मुमकिन है कि आने वाले दिनों में Smart Glasses सामने वाले के साथ हर मेल-मुलाकात, बातचीत का पूरा वीडियो रिकॉर्ड कर ले और दूसरे को इसकी भनक ही न हो . इंटरनेट की दुनिया में जिस रफ्तार से विकास हो रहा है – उसमें टेक्स्ट सर्च के दिन तो खत्म होते दिख रहे हैं . अब तेजी से फोटो और वीडियो दिखाकर समस्याओं का समाधान खोजने का चलन तेजी से बढ़ने वाला है . सर्च इंजन से अब Answer Engine की ओर तकनीक बढ़ रही है . अब तक Google का सारा Traffic Websites पर जाता है…लेकिन, जिस रफ्तार से बदलाव हो रहा है . उसमें बहुत हद तक मुमकिन है कि AI Summary लोगों के बुनियादी सवालों का जवाब दे दे…ऐसे में लोग मूल Website तक जाएं ही न? इंटरनेट पर सर्च संस्कृति में आते बदलावों का साइड इफेक्ट तीन क्षेत्रों में दिखना तय है . पहला, SEO Industry… दूसरा, Website का Business Model और तीसरा, AI Content का नया Standard… दफ्तर से लेकर घरेलू जिंदगी तक पर इंटरनेट का बहुत गहरा असर होना तय है . ऐसे में एक और बात समझना बहुत जरूरी है कि अगले 10 साल में हमारी रोजमर्रा की जिंदगी को इंटरनेट किस हद तक प्रभावित कर रहा होगा?

विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में पिछले 200 साल में जितना बदलाव हुआ… उससे अधिक 20 वर्षों में हुआ . जितना 20 वर्षों में हुआ, उससे अधिक बदलाव 2 वर्षों में हुआ . कभी बिजली के आविष्कार ने मानव सभ्यता के तौर-तरीकों में अमूलचूल बदलाव हुआ. फिर इंटरनेट क्रांति ने . अब AI सबकी जिंदगी में बदलाव की स्क्रिप्ट तैयार करने में लगा है. अब सवाल उठता है कि जिस रफ्तार से तकनीक में बदलाव हो रहा है – वैसी स्थिति में अगले 10 वर्षों में घर और दफ्तर किस तरह के होंगे. सामान्य लोगों के रोजमर्रा की जिंदगी के फैसलों में तकनीक और इंटरनेट का कितना असर होगा . आने वाले समय में शहरी घरों में सिर्फ Alexa या Google Assistant नहीं होगा…घर का अपना डिजिटल ब्रेन होगा . जो हालात के मुताबिक, खुद फैसले लेने में सक्षम होगा…मतलब

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  • AC खुद मौसम और बिजली रेट देखकर चलेगा
  • फ्रिज खाने की कमी पहचानकर ऑर्डर सुझा सकता है
  • किचन, खान-पान और हेल्थ हाइजीन को लेकर अलर्ट करेगा
  • कैमरे सिर्फ रिकॉर्डिंग नहीं करेंगे,संदिग्ध गतिविधियां समझेंगे
  • इमरजेंसी में मदद मांगने जैसा फैसला खुद लेते दिख सकता है
  • बुजुर्गों की सेहत की मॉनिटरिंग लगातार हो सकती है

घर की ज्यादातर चीजें आपस में जुड़ी हो सकती है . मसलन, स्मार्ट टीवी, लाइट, फैन, एसी, गीजर, गाड़ी, लॉक सब एक Ecosystem में दिख सकते हैं…सभी स्मार्ट गैजेट जरूरत के हिसाब से खुद ऑन और ऑफ जैसा फैसला लेते दिख सकते हैं
ऐसे में अगले कुछ वर्षों में आज के साधारण वाईफाई नेटवर्क की जगह हाईस्पीड इंटरनेट स्मार्ट घर की बुनियादी जरूरतों में से एक होगा . अगले कुछ वर्षों में हाई स्पीड इंटरनेट तो हर जगह बुनियादी आधारभूत संरचना की तरह होगा . उससे भी अधिक Smart Intelligence भी घर से दफ्तर तक हर जगह दिखना तय है . मतलब,

  • घर के स्मार्ट गैजेट खुद फैसला लेंगे
  • ज्यादातर दफ्तर Automate होंगे
  • AI से लैस स्मार्ट गैजट इंसानों की तरह हालात समझने और फैसला लेने में सक्षम होंगे .
  • AI अदृश्य आधारभूत संरचना की कैटगरी में पहुंच सकता है .

माना जा रहा है 2035 तक इंटरनेट और AI लोगों के रोजमर्रा के फैसले में दमदार भूमिका निभाते दिख सकते हैं . बेडरूम में नींद से लेकर सेहत की मॉनिटरिंग तक और दफ्तर में काम के प्रेशर से लेकर अंदर-बाहर के माहौल और मिजाज के हिसाब से सुझाव देते दिख सकते हैं. इंटरनेट और AI आने वाले समय में सुबह से लेकर शाम तक कदम-कदम पर लोगों की एक ईमानदार और कर्मठ कर्मयोगी सहायक की तरह मदद करता दिख सकता है . घर को स्मार्ट तरीके से संभालने से लेकर बच्चों की पढ़ाई में मदद तक..दफ्तर और बिजनेस के काम में मदद से लेकर फायदेमंद बनाने तक में दमदार भूमिका निभाता दिख सकता है . रात पर बिस्तर पर जाने से पहले दिनभर का लेखा-जोखा और अगली सुबह का प्लान ऑफ एक्शन सुझाता दिख सकता है .

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आने वाले समय में तकनीक इस हद तक एडवांस हो चुकी होगी – जो यूजर की जेब, जरूरत और मिजाज के हिसाब से Personalize सुझाव देने से लेकर जरूरी फैसला लेते दिख सकती है…भविष्य में आम आदमी ठीक उसी तरह इंटरनेट और AI पर निर्भर होता दिख रहा है…जैसे आज की तारीख में कहीं आने-जाने के लिए ड्राइविंग के दौरान गूगल मैप का इस्तेमाल हो रहा है .

वो दिन दूर नहीं जब इंटरनेट से लैस सुपर स्मार्ट तकनीक Search, Decision और Execution तीनों एक फ्लो में करने लगेगी . बहुत हद तक मुमकिन है कि Science & Technology इतनी विकसित हो जाए कि 2035 में हमारे नींद से जागने से पहले हमारा AI Super Smart Assistant हमारा सुबह का पूरा प्लान तैयार रखे…हमारे बेडरूम या बॉथरूम में लगा आइना ही सुपर स्मार्ट आइना में बदल जाए…हमारे चेहरे को देखकर बीपी, शुगर, हार्ट बीट, ब्लड फ्लो और कोलेस्ट्रॉल लेबल की जानकारी देने लगे . हमें बताए कि आज सेहत को लेकर कितनी सतर्कता बरतने की जरूरत है . सुबह नाश्ते की टेबल पर बैठते ही – इंटरनेट से लैस सुपर स्मार्ट टीवी ऑन हो जाए और वही खबरें आने लगें – जिसे आप देखना चाहते हैं . ये भी संभव है कि आपका AI Super Smart Assistant बाहर के मौसम और मिजाज का Analysis कर बता दे कि आज बारिश के आसार हैं, जिससे ट्रैफिक जाम से जूझना पड़ सकता है . और सुझाव दे समय से कितना पहले ऑफिस के लिए निकलना ठीक रहेगा . अगले कुछ वर्षों में इंटरनेट लोगों की जिंदगी में इतना दाखिल हो चुका होगा कि हर चेहरा, चर्चा और खर्चा पर नजर रखेगा . ऐसे में लोगों की निजी जानकारियां लीक होने, साइबर फ्रॉड, फेक न्यूज़ और डीपफेक बड़ी चुनौती होंगे .

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जिस रफ्तार से तकनीक का विस्तार और विकास हो रहा है – उसमें हर शख्स के घर-गृहस्थी से लेकर रोजी-रोजगार तक की जानकारियां वर्चुअल वर्ल्ड में होंगी. हर यूजर की पसंद-नापसंद और आर्थिक हैसियत से जुड़ी जानकारियां भी वर्चुअल वर्ल्ड में मौजूद होगी . साल 2025 में भारत में साइबर फ्रॉड की करीब 24 लाख शिकायतें आईं . डिजिटल अरेस्ट के नाम का साइबर फ्रॉड भी बहुत सुर्खियों में रहा . मतलब, लोगों की हर तरह की जानकारियां डाटा की शक्ल में डिजिटल तिजोरी में जा रही है – जिस पर हैकर्स की नजर है . अब सवाल उठता है कि डिजिटल तिजोरी की सुरक्षा का मैकेनिज्म कैसे बनेगा?

गलत और भ्रामक तथ्यों ने समाज में एक नए तरह का संकट पैदा कर दिया है…नए टूल्स की मदद से इतनी अच्छी क्वालिटी के वीडियो, ऑडियो और तस्वीरें बनाई जा रही हैं – जिसमें असली-नकली के बीच फर्क करना मुश्किल हो गया है . माना जा रहा है कि आनेवाले समय में इंटरनेट की मदद से आपके स्मार्ट गैजट में एक्टिव AI Agents और पर्सनलाइज्ड टूल्स असली-नकली में अंतर बताना शुरू कर देंगे . ये भी माना जा रहा है कि भविष्य में Verification नई करेंसी की तरह हो इस्तेमाल सकता है … जिसमें Verified Human identity सबसे मूल्यवान वस्तु बन सकती है .

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आज की तारीख में भारत में 50 करोड़ से अधिक UPI यूजर्स हैं . इंटरनेट से लैस मोबाइल फोन में लोग अपना पूरा बैंक खाता लेकर चलते हैं . ज्यादातर लोगों को स्मार्टफोन में निजी जिंदगी से जुड़ी जानकारी और तस्वीरों से लेकर पूरा दफ्तर समाया हुआ है . ऐसे में आने वाले दिनों में Cyber Fraud से बचना और निपटना बड़ी चुनौती होगी . इंटरनेट क्रांति के विस्तार के साथ एक और चुनौती इंसानी सभ्यता के सामने है – क्या इंसान पूरी तरह इंटरनेट पर निर्भर हो जाएगा ? क्या इंसान इंटरनेट से मिली जानकारी और विकल्पों के बीच अपने पसंद-नापसंद का इजहार करता रहेगा ? इंटरनेट की अदृश्य शक्ति से लैस दुनिया में ऐसे इंसानों की वैल्यू बहुत बढ़ जाएगी – जो Specific Knowledge यानी ऐसी Skill रखते हों – जिसे आसानी से कॉपी नहीं किया जा सके. अमेरिका के एक जाने-माने Entrepreneur और Investor हैं नवल रविकांत . वो कहते हैं कि पढ़ना, सोचना और खुद से सवाल करना हमेशा जारी रहना चाहिए . इंटरनेट से लैस स्मार्ट तकनीक का एक साइड इफेक्ट ये भी है कि ये ज्यादातर इंसानों को आलसी बनाती जा रही है . नवल रविकांत अक्सर कहा करते हैं कि सबसे पहले मेरी शारीरिक सेहत है. फिर मानसिक सेहत, उसके बाद आध्यात्मिक सेहत का नंबर आता है . फिर अपने परिवार की सेहत और परिवार की बेहतरी का नंबर आता है . इसके बाद दुनिया के दूसरे काम आते हैं . मतलब, इंटरनेट और स्मार्ट तकनीक हमारी जिंदगी को कितना भी आसान बना दें – खुद की शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक सेहत का ध्यान रखना बहुत जरूरी है…तभी इस कायनात में अपनी भूमिका दमदार तरीके से निभाई जा सकती है .

First published on: May 23, 2026 09:45 PM

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Anurradha Prasad

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Akarsh Shukla

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