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अब गाड़ियां खुद देंगी एक-दूसरे को खतरे का अलर्ट! क्या आपकी पुरानी कार और बाइक में भी लग सकेगा V2V सिस्टम?

सरकार जल्द ही वाहनों में व्हीकल टू व्हीकल सिस्टम लागू करने की तैयारी में है. इस तकनीक से गाड़ियां आपस में खतरें की जानकारी एक दूसरे से साझा कर सकेंगी. लेकिन बड़ा सवाल है कि क्या पुरानी गाड़ियों में ये सिस्टम लग सकेगा?

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Vehicle to Vehicle Communication: देश में सड़क हादसों को कम करने और ड्राइविंग को पहले से ज्यादा सेफ बनाने के लिए केंद्र सरकार नई तकनीक लाने की तैयारी में कर रही है. ये तकनीक व्हीकल-टू-व्हीकल (V2V) कम्युनिकेशन सिस्टम है. इसके जरिए सड़क पर चल रहे वाहन आपस में रियल टाइम जानकारी साझा करेंगे, जिससे संभावित खतरे का पता पहले से चल जाएगा और ड्राइवर को समय रहते चेतावनी मिल सकेगी. अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह सुविधा सिर्फ नई गाड़ियों में मिलेगी या पुरानी कारों और बाइकों में भी इसे लगवाया जा सकेगा.

क्या पुरानी गाड़ियों में भी लग सकेगा V2V सिस्टम?

सरकार की शुरुआती योजना के मुताबिक V2V सिस्टम सबसे पहले नई गाड़ियों में अनिवार्य किया जाएगा. इसके बाद पुरानी गाड़ियों में भी इसे रेट्रोफिट के जरिए लाने की प्लानिंग है. जिन वाहनों में कंपनी की ओर से ये तकनीक पहले से नहीं होगी, उनमें बाद में ऑन बोर्ड यूनिट लगाकार इस सिस्टम का इस्तेमाल किया जा सकेगा.

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पुरानी गाड़ी में लगवाने का कितना आ सकता है खर्च?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, V2V तकनीक के लिए इस्तेमाल होने वाली ऑन-बोर्ड यूनिट की अनुमानित कीमत हर गाड़ी में करीब 5000 से 7000 रुपये हो सकती है. हालांकि ये फिलहाल संभावित लागत है. आखिरी कीमत तकनीकी मानको और वाहन निर्माता कंपनियों के इसे तैयार किए जाने पर निर्भर करेगी.

आखिर क्या है V2V कम्युनिकेशन सिस्टम?

V2V यानी व्हीकल-टू-व्हीकल कम्युनिकेशन ये ऐसी तकनीक है, जिसमें सड़क पर चल रहे वाहन आपस में रियल टाइम डेटा साझा करते हैं. इसके जरिए वाहन अपनी स्पीड लोकेशन, दिशा और ब्रेक लगाने जैसी अहम जानकारी आसपास मौजूद दूसरी गाड़ियों तक पहुंचाते हैं, जिससे संभावित खतरे का पहले ही पता चल सके.

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हादसों से कैसे बचाएगा यह सिस्टम?

अगर आगे चल रही कोई गाड़ी अचानक ब्रेक लगा दे, लेन बदल ले या सामने टक्कर की स्थिति बन जाए तो ये सिस्टम पीछे आने वाले वाहनों को तुरंत अलर्ट भेज देगा. इसके अलावा ये तकनीक धुंध, कम रोशनी, मोड के पीछे चल रहे वाहन, ट्रैफिक में छिटी गाड़ी और एंबुलेंस जैसे इमरजेंसी वाहनों की मौजूदगी की भी पहले से जानकारी दे सकेगी.

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ADAS से कितना अलग है V2V?

आज कई नई कारों में कैमरा और रडार बेस्ड ADAS (एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम) मिलता है. लेकिन इसकी लिमिट वहीं तक होती है, जहां तक कैमरा और सेंसर देख सकते हैं. वहीं V2V तकनीक ऐसी जानकारी भी साझा कर सकती है जो ड्राइवर या वाहन के सेंसर की पहुंच से बाहर होती है.

कब से लागू होगा नया नियम?

सरकार की प्लानिंग के मुताबिक 1 अक्टूबर 2027 के बाद बनने वाले जिन वाहनों में V2V सिस्टम होगा उन्हें AIS-230 मानक का पालन करना होगा. इसके बाद 1 अक्टूबर 2028 से बनने वाले सभी नए दोपहिया, कार, बस और मालवाहकों में इस तकनीक की अनिवार्य किया जाएगा.

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किन वाहनों में मिलेगा यह सिस्टम?

V2V तकनीक को L, M और N श्रेणी के वाहनों में लागू किया जाएगा। इसमें L श्रेणी के दोपहिया वाहन, M श्रेणी की कारें और बसें तथा N श्रेणी के मालवाहक वाहन शामिल हैं।

V2V सिस्टम के क्या होंगे फायदे?

इस तकनीक के बाद ड्राइवर्स को कई एडवांस सेफ्टी फीचर्स मिलेंगे. इसमें इमरजेंसी ब्रेक अलर्ट, फॉरवर्ड कोलिजन वार्निग, गलत दिशा में आ रहे वाहन की सूचना जैसी सुविधाएं शामिल होंगी. 

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First published on: Aug 06, 2026 03:09 PM

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About the Author

Mikita Acharya

Mikita Acharya (मिकिता आचार्य): इन्होंने पत्रकारिता की डिग्री देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर के स्कूल ऑफ जर्नालिज्म से 2019 में पूरी की। पत्रकारिता में 6 साल के अनुभव के साथ वर्तमान में ये News 24 में सीनियर कॉन्टेंट राइटर हैं और यहां ऑटो व टेक बीट को कवर करती हैं। तेज रफ्तार ऑटोमोबाइल दुनिया और बदलती टेक्नोलॉजी को सरल भाषा में पेश करना इनकी खासियत है।

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Mikita Acharya

Mikita Acharya (मिकिता आचार्य): इन्होंने पत्रकारिता की डिग्री देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर के स्कूल ऑफ जर्नालिज्म से 2019 में पूरी की। पत्रकारिता में 6 साल के अनुभव के साथ वर्तमान में ये News 24 में सीनियर कॉन्टेंट राइटर हैं और यहां ऑटो व टेक बीट को कवर करती हैं। तेज रफ्तार ऑटोमोबाइल दुनिया और बदलती टेक्नोलॉजी को सरल भाषा में पेश करना इनकी खासियत है।

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