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कार की छत पर सामान रखने से कितना घटता है माइलेज? सिर्फ वजन नहीं, इससे भी पड़ता है असर

लंबी ट्रिप पर कार की छत पर रूफ कैरियर या सामान रखना आम बात है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इससे आपकी कार का माइलेज कितना कम हो सकता है?

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लंबी फैमिली ट्रिप पर जाते समय कार की डिक्की अक्सर छोटी पड़ जाती है. ऐसे में लोग रूफ कैरियर या रूफ रैक लगाकर बैग, कैपिंग गियर और बाकी समान कर की छत पर रख देते हैं. इससे भल ही कार के अंदर जगह बच जात हो लेकिन इसका सीधा असर गाड़ी के माइलेज पर पड़ सकता है. खास बात यह है कि माइलेज कम होेन की वजह सिर्फ ज्यादा वजन नहीं है. छत पर रखा सामान कार के एरोडायनामिक्स को भी बिगाड़ देता है, जिससे हाईवे पर फ्यूल की खपत काफी बढ़ सकती है.

माइलेज कम होने की सबसे बड़ी वजह क्या है?

कार के माइलेज पर रूफ कैरियर का असर मुख्य रूप से ड्रैग यानी हवा के प्रतिरोध की वजह से पड़ता है. जब कार सड़क पर चलती है तो सामने से आने वाली हवा गड़ी को पीछे की तरफ छकेलती है. कारों का डिजाइन इस तरह तैयार किया जाता है कि हवा आसानी से गाड़ी के ऊपर से निकल जाए. इसे एरोडायनामिक डिजाइन कहा जाता है.

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छत पर सामान रखने से क्या बदल जाता है?

जब कार की छत पर रूफ रैक, रूफ बाक्स या सामन रखा जाता है तो गाड़ी का मूल एरोडायानिकम डिजाइन बिगड़ जाता है. छत पर रखा सामना हवा के रास्ते में रुकावट पैदा करता है और हवा का प्रतिरोध बढ़ जाता है. इस बढ़े हुए रेजिस्टेंस को पार करने के लिए इंजन को सामान्य से ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है. इसका नतीजा फ्यूल की खपत बढ़ने के रूप में सामने आता है.

10 से 30 प्रतिशत तक कम हो सकता है माइलेज

पर्यावरण संरक्षण एजेंसी (EPA) और कंज्यूमर की रिपोर्ट के मुताबिक कार की छत पर सामान लादने से माइलेज औसतन 10 से 30 प्रतिशत तक कम हो सकता है. हालांकि यह कमी हर स्थिति में एक जैसी नहीं होती. इसका बड़ा असर कार की स्पीड और सफर की स्थिति पर निर्भर करता है.

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शहर में कम, हाईवे पर ज्यादा असर

अगर आप शहर में 40-50 किमी/घंटा की रफ्तार से कार चला रहे हैं तो रूप कैरियर की वजह से माइलेज पर असर काफी कम या न के बराबर हो सकता है. लेकिन हाईवे पर तस्वीर बदल जाती है. 80 और 100 किमी/घंटा या उससे ज्यादा की रफ्तार पर हवा का दबाव तेजी से बढ़ता है. ऐसे में छत पर रखा सामान इंजन पर ज्यादा दबाव डालता है और पेट्रोल, डीजल या सीएनजी की खपत बढ़ जाती है.

सिर्फ सामान ही नहीं, खाली रूफ रैक भी करता है असर

कई लोग सफर खत्म होने के बाद रूफ रैक को कार पर लगा छोड़ देते हैं, ऐसा करना भी माइलेज के लिए ठीक नहीं है. खाली रूफ रैक भी हवा के बहाव में रुकावट पैदा करता है और कार का ड्रैग बढ़ाता है. इसलिए जब इसकी जरूरत न हो तो रूफ रैख को कार से हटा देना बेहतर है.

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रूफ कैरियर लगाना जरूरी हो तो क्या करें?

अगर लंबी यात्रा के दौरान छत पर सामान रखना जरूरी है तो उसे खुले में बेतरतीब तरीके से रखने के बजाय एरोडायनामिक शेप वाल रूप बॉक्स का इस्तेमाल करना बेहतर रहता है. सामान को सही तरीके से पैक करने से हवा का प्रतिरोध कम किया जा सकता है. साथ ही कोशिश करनी चाहिए कि जितना संभव हो सामान कार की डिक्की में ही रखा जाए.

इन छोटी बातों से बचा सकते हैं फ्यूल

रूफ कैरियर का इस्तेमाल केवल जरूरत पड़ने पर करें और यात्रा खत्म होते ही उसे हटा दें. छत पर सामान रखते समय उसे व्यवस्थित तरीके से पैक करें और तेज रफ्तार पर अनावश्यक रूप से ज्यादा स्पीड से गाड़ी चलाने से बचें. इन छोटी-छोटी सावधानियों से हवा का प्रतिरोध कम किया जा सकता है और कार के माइलेज पर पड़ने वाले अतिरिक्त असर को भी कम किया जा सकता है.

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ये भी पढ़ें- आपकी कार का माइलेज अचानक हो गया कम? पेट्रोल को दोष देने से पहले चेक कर लें ये 5 जरूरी चीजें

First published on: Sep 15, 2026 08:30 AM

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About the Author

Mikita Acharya

मिकिता आचार्य News24 में ऑटो एंड टेक राइटर हैं. पत्रकारिता में उन्हें 6 साल से ज्यादा का अनुभव है. मूल रूप से मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले की रहने वाली मिकिता ने इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के स्कूल और जर्नलिज्म एंड मास कम्यनिकेशन (SJMC, DAVV) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म किया है. वहीं श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, इंदौर से बीएससी की डिग्री ली है. अपने करियर की शुरुआत मिकिता ने 2019 में ईटीवी भारत, हैदराबाद से की, जहां उन्होंने कई ऑटो, टेक के अलावा न्यूज के लिए कॉटेंट लिखा. इसके बाद दैनिक भास्कर सब-एडिटर के तौर पर उन्होंने न्यूज के साथ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म के लिए भी काम किया. साइंस बैकग्राउंड होने की वजह से ऑटोमोबाइल और टेक्नोलॉजी से जुड़ी खबरें लिखने में मिकिता की गहरी रूचि है. News24 में इस पद पर रहते हुए वे ऑटो और टेक्नोलॉजी से जुड़ी प्रोडक्ट लॉन्च, इंडस्ट्री ट्रेंड्स और रिव्यूज पर रोजाना लेख लिख रही हैं. मिकिता ने ऑटो और टेक से जुड़े कई बड़े इवेंट में ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है. वह ऑटो और टेक इंडस्ट्री से जुड़े एक्सपर्ट्स के संपर्क में रहती हैं. कितने साल का अनुभव: 6+ योग्यता : SJMC, DAVV से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में बीएससी पिछला अनुभव: दैनिक भास्कर, ETV भारत

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