गाड़ियों की हाई बीम पर लगेगी लगाम! बदलने वाले हैं हेडलाइट के नियम, क्या है सरकार का नया रूल ड्राफ्ट?

रात में गाड़ियों की तेज हाई बीम से होने वाली परेशानी और हादसों को कम करने के लिए सरकार नियमों में बड़ा बदलाव करने की तैयारी कर रही है. नए नियमों में हेडलाइट की ब्राइटनेस से लेकर हाई बीम अलार्म जैसे कई बदलाव प्रस्तावित हैं.

high beam rules

गाड़ियों की लाइट को लेकर सरकार नए नियम लाने की तैयारी कर रही है. (Image Credit-Ai)

रात में सड़क पर चलते समय सामने से आने वाली गाड़ी की तेज हाई बीम लाइट कई बार कुछ सेकंड के लिए आंखों के सामने अंधेरा कर देती है. इससे ड्राइवर को सड़क और सामने मौजूद वाहन दिखाई देना मुश्किल हो जाता है और हादसे का खतरा बढ़ जाता है. इसी समस्या को कम करने के लिए सड़क परिवहन एंव राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) मोटर वाहन नियमों में कई बड़े बदलाव की तैयारी कर रहा है. प्रस्तावित ड्राफ्ट में दोपहिया वाहनों की हेडलाइन से लेकर हाई बीम की ब्राइटनेस और भारी वाहनों की विजिबिलिटी तक कई चीजों को शामिल किया गया है.

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कब लागू हो सकते हैं नियम?

हाई बीम के गलत इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए MoRTH ने केंद्रीय मोटर वाहन नियमों में संशोधन का प्रस्ताव रखा है. रिपोर्ट के मुताबिक, इन नए सेफ्टी नॉर्म्स को अगले साल अप्रैल से लागू किया जा सकता है. मंत्रालय की ओर से जागरूकता अभियान चलाए जाने के बावजूद हाई बीम का गलत इस्तेमाल जारी है. ऐसे में अब नियमों के जरिए इस समस्या पर लगाम लगाने की तैयारी है.

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टू-व्हीलर्स में सिर्फ लो बीम पर चलेगी हेडलाइट

नए नियमों में दोपहिया वाहनों के Automatic Headlamp On (AHO) में बदलाव का प्रस्ताव है. अभी कुछ वाहनों में AHO सिस्टम सेटिंग के हिसाब से लो बीम या हाई बीम पर हेडलाइट चालू कर सकता है. नए नियम लागू होने के बाद नए बनने वाल दोपहिया वाहनों में AHO सिस्टम एक्टिव होने पर हेडलाइन सिर्फ लो बीम मोड में ही रहेगी. यह नियम पहले से सड़क पर चल रही गाड़ियों पर लागू नहीं होगा.

हेडलाइट की ब्राइटनेस भी होगी सीमित

सामने से आने वाले ड्राइवर की आंखों में ज्यादा रोशनी न पड़े, इसके लिए हेडलाइटी की अधिकतम लाइट इंटेंसिटी कम करने का प्रस्ताव है. दोपहिया वाहनों के लिए अधिकतम स्वीकार्य तीव्रता को 1.5 लाख कैंडेला से घटाकर 1 लाख करने की बात कही गई है. वहीं कार और दूसरे चार पहिया वाहनों के लिए यह सीमा 2.25 लाख cd से घटाकर 1.5 लाख cd की जा सकती है.

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ज्यादा सफेद रोशनी पर भी लगाम

ड्राफ्ट नियमों में हेडलाइट और फॉग लैंप की रोशनी के कलर टेम्परेचर को भी सीमित करने का प्रस्ताव है. रिसर्च के मुताबिक, बहुत ज्यादा सफेद और हाई कलर टेंपरेचर वाली लाइट से ज्यादा चकाचौंध हो सकती है. इसे ध्यान में रखते हुए वाहनों की लाइट का अधिकतम कलर टेम्परेचर 6,500K तय करने का प्रस्ताव रखा गया है.

मेन बीम की ऊंचाई में भी बदलाव

प्रस्तावित नियमों में मेन बीम हेडलाइट की माउंटिंग हाइट को लेकर भी बदलाव की बात कही गई है. इसे पासिंग बीम हेडलाइट के समान लेवल पर रखने का प्रस्ताव है. इसका मकसद सामने से आने वाले वाहन के ड्राइवर की आंखों पर सीधे पड़ने वाली तेज रोशनी को कम करना है.

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शहर में हाई बीम और ज्यादा स्पीड करने पर बजेगा अलार्म

नए नियमों में हाई बीम के इस्तेमाल को लेकर एक और अहम बदला प्रस्तावित है. नई कारों और बाइक्स में स्पीड सेंसिटिव ऑडियो अलार्म सिस्टम दिया जा सकता है. अगर ड्राइवर शहर या भीड़भाड़ वाली सड़क पर मैनुअली हाई बीम ऑन करता है तो गाड़ी में बीप या साउंड वार्निंग सुनाई देगी. यह ड्राइवर को वापस लो बीम पर आने का संकेत देगी.

यह हाई बीम वार्निंग सिस्टम स्पीड के हिसाब से काम करेगा. अगर गाड़ी 60 किमी प्रति घंटे से ज्यादा की रफ्तार से हाईवे पर चल रही होगी तो अलार्म नहीं बजेगा. इसकी वजह यह है कि अंधेरे हाईवे पर ज्यादा दूरी तक सड़क देखने के लिए हाई बीम की जरूरत पड़ सकती है.

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मकसद सड़क हादसों को कम करना

प्रस्तावित बदलावों का सीधा मकसद रात में हाई बीम से होने वाली चकाचौंध को कम करना और सड़क पर विजिबिलिटी बेहतर करना है. अगर ये नियम लागू होते हैं तो नए वाहनों की हेडलाइट सेटिंग, रोशनी की तीव्रता और हाई बीम के इस्तेमाल को लेकर पहले से ज्यादा सख्ती देखने को मिल सकती है.

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लेखक के बारे में

Mikita Acharya

Mikita Acharya

मिकिता आचार्य News24 में ऑटो एंड टेक राइटर हैं. पत्रकारिता में उन्हें 6 साल से ज्यादा का अनुभव है. मूल रूप से मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले की रहने वाली मिकिता ने इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के स्कूल और जर्नलिज्म एंड मास कम्यनिकेशन (SJMC, DAVV) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म किया है. वहीं श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, इंदौर से बीएससी की डिग्री ली है. अपने करियर की शुरुआत मिकिता ने 2019 में ईटीवी भारत, हैदराबाद से की, जहां उन्होंने कई ऑटो, टेक के अलावा न्यूज के लिए कॉटेंट लिखा. इसके बाद दैनिक भास्कर सब-एडिटर के तौर पर उन्होंने न्यूज के साथ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म के लिए भी काम किया. साइंस बैकग्राउंड होने की वजह से ऑटोमोबाइल और टेक्नोलॉजी से जुड़ी खबरें लिखने में मिकिता की गहरी रूचि है. News24 में इस पद पर रहते हुए वे ऑटो और टेक्नोलॉजी से जुड़ी प्रोडक्ट लॉन्च, इंडस्ट्री ट्रेंड्स और रिव्यूज पर रोजाना लेख लिख रही हैं. मिकिता ने ऑटो और टेक से जुड़े कई बड़े इवेंट में ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है. वह ऑटो और टेक इंडस्ट्री से जुड़े एक्सपर्ट्स के संपर्क में रहती हैं. कितने साल का अनुभव: 6+ योग्यता : SJMC, DAVV से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में बीएससी पिछला अनुभव: दैनिक भास्कर, ETV भारत
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