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Lucky Gemstone: नीलम धारण करते ही इन 4 राशियों को मिलती है शनिदेव की कृपा, खुलते हैं सफलता और धन के नए अवसर

Lucky Gemstone: नीलम एक बहुत प्रभावशाली रत्न है, जिसे धारण करने से शनि की कृपा प्राप्त होती है। लेकिन, गलत राशि लोग या गलत समय में पहनने से नुकसान भी होता है। आइए जानते हैं, किन 4 राशियों के नीलम रत्न एक भाग्यशाली रत्न सिद्ध होता है और इसके धारण करने के नियम क्या हैं?

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Lucky Gemstone: जिंदगी में मेहनत के बाद भी जब काम अटकने लगें, धन रुक जाए और मन बेचैन रहने लगे, तो लोग अक्सर ज्योतिष की ओर रुख करते हैं। ज्योतिष शास्त्र मानता है कि कुंडली में ग्रहों की स्थिति हमारे जीवन पर गहरा असर डालती है। खास तौर पर शनि ग्रह का प्रभाव जीवन में संघर्ष, देरी और परीक्षा के रूप में सामने आता है। ऐसे में नीलम रत्न को शनि से जुड़ा सबसे प्रभावी उपाय माना गया है। सही राशि, सही समय और सही विधि से धारण किया गया नीलम जीवन की दिशा बदल सकता है।

नीलम क्यों माना जाता है शक्तिशाली

नीलम शनि ग्रह का प्रमुख रत्न है। इसे धारण करने से अनुशासन, धैर्य और स्थिरता आती है। यह करियर, व्यापार और धन से जुड़ी बाधाओं को धीरे-धीरे कम करता है। ज्योतिष के अनुसार नीलम तुरंत असर दिखाने वाला रत्न है, इसलिए इसे बिना सलाह के पहनना उचित नहीं माना जाता है।

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वृषभ राशि के लिए लाभकारी

वृषभ राशि का संबंध शुक्र और शनि दोनों से होता है। जिन जातकों की कुंडली में शनि कमजोर हो, उन्हें नीलम से लाभ मिल सकता है। यह नौकरी में स्थिरता लाता है और आर्थिक दबाव कम करता है। साथ ही मानसिक तनाव में भी राहत देता है।

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मकर राशि पर शनि की कृपा

मकर राशि शनि की ही राशि मानी जाती है। इस राशि के जातकों को नीलम पहनने से कार्यक्षेत्र में पहचान मिलती है। रुके हुए काम गति पकड़ते हैं और जिम्मेदारियों को निभाने की शक्ति बढ़ती है।

कुंभ राशि के लिए उत्तम रत्न

कुंभ राशि भी शनि के स्वामित्व वाली है। नीलम पहनने से कुंभ राशि के लोगों को नई योजनाओं में सफलता मिल सकती है। यह रत्न आय के नए स्रोत खोलने में सहायक माना जाता है।

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मिथुन राशि को कैसे होता है लाभ?

मिथुन राशि के लिए नीलम विशेष परिस्थितियों में शुभ माना जाता है। जब कुंडली में शनि शुभ स्थान पर हो, तब यह रत्न बुद्धि और निर्णय क्षमता को मजबूत करता है। करियर में स्थिरता और सम्मान मिलने की संभावना बढ़ती है।

नीलम धारण करने की सही विधि

नीलम पहनने से पहले इसे गंगाजल या कच्चे दूध से शुद्ध करना चाहिए। इसे अनामिका या मध्यमा उंगली में धारण करना शुभ माना जाता है। शनिवार के दिन शनि मंत्र का जाप करते हुए पहनने से इसके सकारात्मक फल बढ़ जाते हैं।

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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First published on: Jan 30, 2026 04:20 PM

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Shyamnandan

श्यामनंदन पिछले 20 से अधिक वर्षों से पत्रकारिता और कंटेंट क्रिएशन की दुनिया में सक्रिय हैं। वर्तमान में वे News24 में धर्म और ज्योतिष सेक्शन के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं, जहां उनकी कोशिश रहती है कि पाठकों को सटीक, सरल और उपयोगी जानकारी मिल सके। उन्होंने बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) से पत्रकारिता की पढ़ाई की है और भारतीय विद्या भवन, नई दिल्ली से ज्योतिष का सांगोपांग अध्ययन किया है। साल 2015 से वे धर्म और ज्योतिष विषय पर लगातार लिख रहे हैं और इस क्षेत्र में गहरी विशेषज्ञता रखते हैं। धार्मिक परंपराओं, वैदिक ज्योतिष, ग्रह-गोचर, राशिफल, अंक ज्योतिष, वास्तु, सामुद्रिक शास्त्र, व्रत-त्योहार, पूजा-पद्धति और आध्यात्मिक विषयों को आसान और भरोसेमंद भाषा में पाठकों तक पहुंचाना उनकी पहचान है। डिजिटल मीडिया, SEO और कंटेंट रणनीति की उन्हें गहरी और अच्छी समझ है।

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