Kaalchakra: शनि का असर किन राशियों पर शुभ, किन पर अशुभ? पंडित सुरेश पांडेय से जानें साढ़ेसाती का पूरा सच
Kaalchakra Today: शनि देव को कर्म और न्याय का देवता माना जाता है, जिनका राशियों पर शुभ-अशुभ प्रभाव पड़ता है. खासकर, शनि की साढ़ेसाती में व्यक्ति को विभिन्न परेशानियों का सामना करना पड़ता है. आज शनि जयंती के खास मौके पर प्रश्न कुंडली विशेषज्ञ पंडित सुरेश पांडेय शनि की साढ़ेसाती और उसके प्रभाव के बारे में विस्तार से बताने जा रहे हैं.
Written By: Nidhi Jain|Updated: May 16, 2026 11:38
Edited By : Nidhi Jain|Updated: May 16, 2026 11:38
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Credit- Meta AI and Social Media
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Kaalchakra Today 16 May 2026: आज 16 मई 2026 को ज्येष्ठ माह की कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि रात 1 बजकर 30 मिनट तक रहेगी, जिसके बाद शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि शुरू हो जाएगी. ऐसे में केवल आज ही शनि जयंती मनाना शुभ रहेगा. इसके अलावा आज वट सावित्री व्रत और ज्येष्ठ अमावस्या भी है. साथ ही आज शाम 5 बजकर 30 मिनट तक भरणी नक्षत्र रहेगा, जिसके बाद कृत्तिका नक्षत्र शुरू होगा. राहुकाल की बात करें तो वो सुबह 9 बजे से लेकर 10 बजकर 30 मिनट तक था. वहीं, दोपहर 2 बजे से दोपहर 3 बजकर 42 मिनट तक यमगण्ड काल रहने वाला है.
गौरतलब है कि शनि जयंती पर शनि की साढ़ेसाती से छुटकारा पाने के लिए कुछ विशेष उपाय किए जाते हैं. आज 16 मई 2026 के कालचक्र में प्रश्न कुंडली विशेषज्ञ पंडित सुरेश पांडेय शनि जयंती के शुभ दिन शनि की साढ़ेसाती और उसके राशियों पर पड़ने वाले प्रभाव के बारे में विस्तार से बताने जा रहे हैं.
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शनि की साढेसाती का प्रभाव
एक दीर्घायु व्यक्ति के जीवन में शनि की साढ़ेसाती तीन बार आती है. पहली बार शनि की साढ़ेसाती शरीर और माता-पिता पर प्रभाव डालती है, जबकि दूसरी वाली साढ़ेसाती काम, रुचि, आर्थिक स्थिति और पत्नी पर असर डालती है. वहीं, तीसरी बार आने वाली साढ़ेसाती का प्रभाव सेहत पर पड़ता है. बता दें कि एक साढ़ेसाती खत्म होने के बाद दूसरी साढ़ेसाती करीब 30 साल बाद आती है. हालांकि, जन्मस्थ पर शनि के शुभ होने पर साढ़ेसाती कल्याणकारी सिद्ध होती है.
कर्क, सिंह, वृश्चिक, धनु, मीन और मेष राशि वालों को शनि की साढ़ेसाती सर्वाधिक कष्ट प्रदान कर सकती है, जबकि मिथुन और कन्या राशि वालों को शनि की साढ़ेसाती मध्यम फल देती है.
शनि का गोचर केवल वृषभ, तुला और कुंभ राशि वालों को ही शुभ फल देता है, जबकि वृषभ, तुला, मकर और कुंभ राशि वालों पर शनि की साढ़ेसाती का अशुभ प्रभाव नहीं पड़ता है.
दिल के बाद शनि देव का प्रभाव व्यक्ति के पैरों पर पड़ता है, जो कि करीब 10 महीने तक रहता है. बता दें कि दाहिने पैर पर शनि के प्रभाव से यात्रा के योग बनते हैं, जबकि बाएं पैर पर प्रभाव पड़ने से संघर्ष बढ़ता है.
यदि आप शनि जयंती और शनि की साढ़ेसाती आदि के बारे में और जानना चाहते हैं तो उसके लिए ये वीडियो देखें.
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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.