Kaalchakra: बच्चा गलत संगत में पड़ गया है? पंडित सुरेश पांडेय से जानें स्वभाव सुधारने के असरदार ज्योतिष उपाय
Kaalchakra Today: बच्चे का गुस्सा, जिद, डर या गलत संगत केवल आदत नहीं, ज्योतिष के अनुसार ग्रहों से भी जुड़ी मानी जाती है. कालचक्र प्रोग्राम में पंडित सुरेश पांडेय ने बच्चों के स्वभाव सुधारने के कुछ पारंपरिक ज्योतिष उपाय बताए हैं. आइए जानते हैं, ये असरदार उपाय क्या हैं?
Written By: Shyamnandan|Updated: Jul 24, 2026 12:26
Edited By : Shyamnandan|Updated: Jul 24, 2026 12:26
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Kaalchakra Today: हर माता-पिता चाहते हैं कि उनका बच्चा समझदार, शांत और अच्छे संस्कारों वाला बने. लेकिन कई बार बच्चा अचानक जिद्दी हो जाता है. बात-बात पर गुस्सा करता है. पढ़ाई से दूरी बनाने लगता है. स्कूल, कॉलेज, गली-मुहल्ले की गलत संगत में पड़ जाता है या छोटी-छोटी बातों से डरने लगता है. ऐसे में माता-पिता या परिवार के लोगों को अक्सर वजह समझ नहीं आता है. कालचक्र कार्यक्रम में ज्योतिषाचार्य पंडित सुरेश पांडेय ने बताया कि कई बार बच्चे के स्वभाव का संबंध उसकी कुंडली के लग्न और ग्रहों की स्थिति से भी जुड़ा होता है. उन्होंने ऐसे मामलों में कुछ पारंपरिक ज्योतिष उपाय भी बताए, जिन्हें लोग अपनी आस्था के अनुसार अपना सकते हैं. आइए जानते हैं, बच्चों के स्वभाव में सुधार के असरदार ज्योतिष उपाय क्या हैं?
कुंडली की लग्न का असर
पंडित सुरेश पांडेय के अनुसार, जन्म कुंडली का लग्न व्यक्ति के शरीर, स्वास्थ्य, व्यक्तित्व और स्वभाव का महत्वपूर्ण आधार माना जाता है. लगभग हर दो घंटे में लग्न बदलता है. इसलिए हर बच्चे का लग्न अलग हो सकता है. उनका कहना है कि ग्रहों का प्रभाव जरूर रहता है, लेकिन अच्छे कर्म और सही परवरिश से सकारात्मक बदलाव भी संभव है.
अगर लग्न में सूर्य मेष या सिंह के अलावा किसी दूसरी राशि में हो, तो बच्चा जिद्दी या जल्दी गुस्सा करने वाला हो सकता है. ऐसे बच्चों को गायत्री मंत्र की दीक्षा लाभकारी मानी गई है. जबकि, लग्न में मंगल कमजोर हो या राहु के साथ अशुभ स्थिति बना रहा हो, तो बच्चा झगड़ालू, जल्दबाज या ज्यादा आक्रामक स्वभाव का हो सकता है. मंगल-राहु की युति को अंगारक योग भी कहा जाता है. वहीं, लग्न में बृहस्पति शुभ माना जाता है. लेकिन यदि वह अस्त हो या मकर राशि में कमजोर स्थिति में हो, तो उसका सकारात्मक प्रभाव कम हो सकता है.
बच्चे के गुस्से का उपाय
अगर बच्चा गलत संगत में चला गया है या बहुत क्रोध करता है, तो मंगलवार और शनिवार को उसे हनुमान मंदिर ले जाने की सलाह दी गई है. वहां हनुमान जी के चरणों का सिंदूर माथे पर लगाने की बात कही गई है. जो बच्चे पढ़ सकते हैं, उन्हें रोज एक बार हनुमान चालीसा का पाठ करने के लिए प्रेरित करें. माथे पर सफेद चंदन का तिलक भी लगाया जा सकता है. बच्चे को चांदी के गिलास में पानी पिलाने और उसके हाथ से चींटियों को आटा-शक्कर डालने का उपाय भी बताया गया है. साथ ही लाल रंग के कपड़े, कमरे में अधिक लाल रंग और मसालेदार भोजन से बचाने की सलाह दी गई है. इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स का इस्तेमाल भी सीमित रखने को कहा गया है.
अगर बच्चा अंधेरे से डरता है, अकेले नहीं रह पाता या रात में घबराकर उठ जाता है, तो इसे भी कमजोर मंगल से जोड़ा गया है. ऐसी स्थिति में मंगलवार को हनुमान मंदिर में चांदी का एक छोटा यंत्र ले जाने की सलाह दी गई है. मंदिर के पुजारी से हनुमान जी के दाहिने चरण का सिंदूर और तेल उस यंत्र में भरवाकर उसे लाल धागे में बांधकर बच्चे को धारण कराया जा सकता है. पंडित सुरेश पांडेय के अनुसार, यह पारंपरिक उपाय भय कम करने में सहायक माना जाता है.
कालसर्प दोष का भ्रम
पंडित सुरेश पांडेय का कहना है कि बच्चे की हर समस्या को कालसर्प दोष से जोड़ना उचित नहीं है. उनके अनुसार, सही विश्लेषण लग्न, लग्नेश और उन पर पड़ने वाली ग्रह दृष्टि का होना चाहिए. तभी बच्चे के स्वभाव और व्यवहार को बेहतर ढंग से समझा जा सकता है और उसके अनुरूप उचित मार्गदर्शन दिया जा सकता है.
देखें वीडियो
कालचक्र प्रोग्राम की पूरी वीडियो को आप यूट्यूब पर यहां देख सकते हैं:
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है.News24इसकी पुष्टि नहीं करता है.
Kaalchakra Today: हर माता-पिता चाहते हैं कि उनका बच्चा समझदार, शांत और अच्छे संस्कारों वाला बने. लेकिन कई बार बच्चा अचानक जिद्दी हो जाता है. बात-बात पर गुस्सा करता है. पढ़ाई से दूरी बनाने लगता है. स्कूल, कॉलेज, गली-मुहल्ले की गलत संगत में पड़ जाता है या छोटी-छोटी बातों से डरने लगता है. ऐसे में माता-पिता या परिवार के लोगों को अक्सर वजह समझ नहीं आता है. कालचक्र कार्यक्रम में ज्योतिषाचार्य पंडित सुरेश पांडेय ने बताया कि कई बार बच्चे के स्वभाव का संबंध उसकी कुंडली के लग्न और ग्रहों की स्थिति से भी जुड़ा होता है. उन्होंने ऐसे मामलों में कुछ पारंपरिक ज्योतिष उपाय भी बताए, जिन्हें लोग अपनी आस्था के अनुसार अपना सकते हैं. आइए जानते हैं, बच्चों के स्वभाव में सुधार के असरदार ज्योतिष उपाय क्या हैं?
कुंडली की लग्न का असर
पंडित सुरेश पांडेय के अनुसार, जन्म कुंडली का लग्न व्यक्ति के शरीर, स्वास्थ्य, व्यक्तित्व और स्वभाव का महत्वपूर्ण आधार माना जाता है. लगभग हर दो घंटे में लग्न बदलता है. इसलिए हर बच्चे का लग्न अलग हो सकता है. उनका कहना है कि ग्रहों का प्रभाव जरूर रहता है, लेकिन अच्छे कर्म और सही परवरिश से सकारात्मक बदलाव भी संभव है.
अगर लग्न में सूर्य मेष या सिंह के अलावा किसी दूसरी राशि में हो, तो बच्चा जिद्दी या जल्दी गुस्सा करने वाला हो सकता है. ऐसे बच्चों को गायत्री मंत्र की दीक्षा लाभकारी मानी गई है. जबकि, लग्न में मंगल कमजोर हो या राहु के साथ अशुभ स्थिति बना रहा हो, तो बच्चा झगड़ालू, जल्दबाज या ज्यादा आक्रामक स्वभाव का हो सकता है. मंगल-राहु की युति को अंगारक योग भी कहा जाता है. वहीं, लग्न में बृहस्पति शुभ माना जाता है. लेकिन यदि वह अस्त हो या मकर राशि में कमजोर स्थिति में हो, तो उसका सकारात्मक प्रभाव कम हो सकता है.
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बच्चे के गुस्से का उपाय
अगर बच्चा गलत संगत में चला गया है या बहुत क्रोध करता है, तो मंगलवार और शनिवार को उसे हनुमान मंदिर ले जाने की सलाह दी गई है. वहां हनुमान जी के चरणों का सिंदूर माथे पर लगाने की बात कही गई है. जो बच्चे पढ़ सकते हैं, उन्हें रोज एक बार हनुमान चालीसा का पाठ करने के लिए प्रेरित करें. माथे पर सफेद चंदन का तिलक भी लगाया जा सकता है. बच्चे को चांदी के गिलास में पानी पिलाने और उसके हाथ से चींटियों को आटा-शक्कर डालने का उपाय भी बताया गया है. साथ ही लाल रंग के कपड़े, कमरे में अधिक लाल रंग और मसालेदार भोजन से बचाने की सलाह दी गई है. इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स का इस्तेमाल भी सीमित रखने को कहा गया है.
अगर बच्चा अंधेरे से डरता है, अकेले नहीं रह पाता या रात में घबराकर उठ जाता है, तो इसे भी कमजोर मंगल से जोड़ा गया है. ऐसी स्थिति में मंगलवार को हनुमान मंदिर में चांदी का एक छोटा यंत्र ले जाने की सलाह दी गई है. मंदिर के पुजारी से हनुमान जी के दाहिने चरण का सिंदूर और तेल उस यंत्र में भरवाकर उसे लाल धागे में बांधकर बच्चे को धारण कराया जा सकता है. पंडित सुरेश पांडेय के अनुसार, यह पारंपरिक उपाय भय कम करने में सहायक माना जाता है.
कालसर्प दोष का भ्रम
पंडित सुरेश पांडेय का कहना है कि बच्चे की हर समस्या को कालसर्प दोष से जोड़ना उचित नहीं है. उनके अनुसार, सही विश्लेषण लग्न, लग्नेश और उन पर पड़ने वाली ग्रह दृष्टि का होना चाहिए. तभी बच्चे के स्वभाव और व्यवहार को बेहतर ढंग से समझा जा सकता है और उसके अनुरूप उचित मार्गदर्शन दिया जा सकता है.
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