Aaj Ka Panchang 26 March 2025: आज 26 मार्च, 2025 को चैत्र माह के कृष्ण पक्ष का बारहवां दिन है और आज इस माह की द्वादशी तिथि है। आज दिनमान यानी दिन की लंबाई 12 घंटे 17 मिनट 38 सेकंड की है, जबकि रात्रिमान 11 घंटे 41 मिनट 12 सेकंड की होगी। वैदिक ज्योतिष के अनुसार, यह वसंत ऋतु है और सूर्य वर्तमान में उत्तरायण में गोचर कर रहे हैं।
आइए जानते हैं, 26 मार्च के पंचांग के पांचों अंग यानी तिथि, नक्षत्र, वार, योग और करण की क्या स्थितियां हैं? आज का कौन-सा समय आपके लिए शुभ सिद्ध होने के योग दर्शा रहा है और आज का राहु काल का समय क्या है?
आज का पंचांग
तिथि: आज चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि है, जो 27 मार्च की 01:42 AM तक व्याप्त रहेगी। इसके बाद चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि शुरु हो जाएगी। द्वादशी तिथि एक भद्रा तिथि है, जिसके स्वामी भगवान विष्णु हैं और इस दिन का स्वभाव यशप्रद होता है। यह तिथि शुभ मुहूर्तों में स्वीकृत है।
नक्षत्र: आज दिन भर धनिष्ठा नक्षत्र कायम रहेगी, जो 27 मार्च की 02:30 AM तक व्याप्त रहेगी। इसके बाद शतभिषा नक्षत्र शुरू होगी। ये दोनों ही नक्षत्र शुभ नक्षत्र हैं।
दिन/वार: बुधवार का दिन हिंदू धर्म में विशेष धार्मिक महत्व रखता है। इस दिन को मुख्य रूप से भगवान गणेश की उपासना के लिए समर्पित माना जाता है। इसके साथ ही, बुधवार को ग्रहों के राजकुमार बुध का दिन भी माना जाता है। इस दिन बुध ग्रह की अनुकूलता और शांति के लिए विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान और उपाय किए जाते हैं।
योग: आज 12:26 PM तक सिद्ध योग व्याप्त रहेगा, जो कि एक शुभ योग है। इसके बाद साध्य योग की शुरुआत होगी, यह भी एक शुभ योग है।
करण: आज 02:49 PM तक कौलव करण का प्रभाव रहेगा, इसके बाद तैतिल करण की शुरुआत होगी, जो 27 मार्च की 01:42 AM व्याप्त रहेगी। इसके बाद गर करण की शुरुआत होगी।
सूर्य-चंद्र गोचर
आज के पंचाग के उपर्युक्त इन 5 अंगों के साथ ही आज सूर्य और चंद्र गोचर की स्थिति इस प्रकार रहने के योग हैं:
सूर्य गोचर: सूर्य मीन राशि में गोचर कर रहे हैं, जिसके स्वामी देवगुरु बृहस्पति हैं।
चन्द्र गोचर: चंद्रमा आज मकर राशि में गोचर कर रहे हैं, जिसके स्वामी शनि हैं। इस राशि में वे 27 मार्च की 03:14 PM तक रहेंगे और फिर कुंभ राशि में प्रवेश कर जाएंगे।
शुभ-अशुभ काल
आज शुभ मुहूर्तों की स्थितियां इस प्रकार रहने के योग हैं:
ब्रह्म मुहूर्त: 04:44 AM से 05:31 AM
प्रातः सन्ध्या: 05:08 AM से 06:18 AM
अभिजित मुहूर्त: आज कोई मुहूर्त नहीं है.
विजय मुहूर्त: 02:30 PM से 03:19 PM
गोधूलि मुहूर्त: 06:34 PM से 06:58 PM
सायाह्न सन्ध्या: 06:36 PM से 07:46 PM
अमृत काल: 04:40 PM से 06:11 PM
निशिता मुहूर्त: 12:03 AM, मार्च 27 से 12:50 AM, मार्च 27
आज अशुभ मुहूर्तों की स्थितियां इस प्रकार रहने के योग हैं:
राहुकाल: आज राहु काल 12:27 PM से 01:59 PM तक रहने का योग है। हिन्दू धर्म में इस अवधि में कोई भी शुभ कार्य आरंभ करने की मनाही है।
यमगण्ड: 07:50 AM से 09:22 AM
गुलिक काल: 10:55 AM से 12:27 PM
वर्ज्य: 07:36 AM से 09:07 AM
दुर्मुहूर्त: 12:02 PM से 12:51 PM
पंचक: 03:14 PM से 06:17 AM, मार्च 27
26 मार्च 2025 के पर्व और त्योहार
आज चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि है और दिन बुधवार है। बुधवार का दिन हिंदू धर्म में विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व रखता है। बुधवार को विघ्नहर्ता गणेश की आराधना अत्यंत शुभ मानी जाती है। उनकी पूजा करने से कामकाज की बाधाएं, जीवन के विघ्न, भय, शारीरिक कष्ट और नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है। इसके साथ ही बुधवार को ग्रहों के राजकुमार बुध देव की पूजा का भी विशेष महत्व है।
वैष्णव पापमोचनी एकादशी: दृक पंचांग के अनुसार, गृहस्थ और वैष्णव साधकों की एकादशी व्रत के दिन में एक दिन का अंतर होता है. इस साल गृहस्थजन पापमोचिनी एकादशी का व्रत 25 मार्च को और वैष्णवजन 26 मार्च को इसका उपवास रखेंगे। वैष्णवजन इसका पारण 27 मार्च को करेंगे।
आज की यात्रा टिप्स: आज उत्तर दिशा में दिशाशूल होने के कारण, आपातकाल को छोड़कर आज इस दिशा में यात्रा करना शुभ नहीं है।
पंचांग का महत्व
पंचांग केवल तिथियों और त्योहारों का कैलेंडर नहीं है, बल्कि यह जीवन को सफलता और समृद्धि की ओर मार्गदर्शन करने वाला एक महत्वपूर्ण साधन है। यह ब्रह्मांड की प्राकृतिक लय और खगोलीय घटनाओं के अनुरूप चलने की प्रेरणा देता है, जिससे समय और परिस्थितियाँ अनुकूल बनाई जा सकती हैं।
पंचांग के 5 प्रमुख अंग
पंचांग के 5 मुख्य घटक होते हैं, जिनका ध्यान रखकर किए गए कार्यों में सफलता और समृद्धि की संभावना बढ़ जाती है। पंचांग एक ये घटक हैं:
वार: यह सप्ताह के सातों दिनों का महत्व और उनका प्रभाव को बतलाता है।
तिथि: इसके अनुसार चंद्र मास के अनुसार दिन की गणना का पता चलता है।
नक्षत्र: यह विशिष्ट नक्षत्रों की स्थिति और उनके प्रभाव बतलाता है।
योग: इससे विशेष खगोलीय संयोगों का महत्व का पता चलता है।
करण: आधे तिथि का सूचक को करण कहा जाता है, जो कार्यों की शुभता को प्रभावित करता है।
शुभ कार्यों में पंचांग का महत्व: हिंदू संस्कृति में पंचांग के आधार पर शुभ कार्य किए जाते हैं, जिससे सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है और इच्छित फल की प्राप्ति होती है। ये कार्य मुख्य रूप से हैं: विवाह, गृह प्रवेश, व्यवसाय की शुरुआत, यात्रा और अन्य मांगलिक कार्य।
पंचांग की जीवन में भूमिका: पंचांग केवल शुभ मुहूर्त जानने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति की निर्णय क्षमता को भी सुदृढ़ करता है। यह प्रकृति और ब्रह्मांड की ऊर्जा के साथ संतुलन स्थापित करने में सहायक होता है, जिससे जीवन में शांति, समृद्धि और सकारात्मकता का संचार होता है। अतः पंचांग का अनुसरण करके हम अपने जीवन को अधिक सफल और समृद्ध बना सकते हैं।
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। News26 इसकी पुष्टि नहीं करता है।
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