दिल्ली के जंतर-मंतर पर दाखिल होने के मामले में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं पर प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है. विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने बुधवार को फैसला सुनाते हुए पार्टी नेता सौरव दास और आशुतोष रांका को 5 दिनों की पुलिस हिरासत में भेज दिया है. जानकारी के मुताबिक, हिरासत की अवधि पूरी होने के बाद दोनों को तिहाड़ जेल भेजा जाएगा. दूसरी तरफ, इसी मामले में पार्टी के एक अन्य वरिष्ठ नेता अजिंक्य शिंदे को 5 हजार रुपये के निजी बॉन्ड और 6 महीने तक शांति बनाए रखने की शर्त पर रिहा कर दिया गया है. शिंदे को पार्टी प्रमुख अभिजीत दीपके का राजनीतिक मेंटर माना जाता है.
यह कार्रवाई उस समय हुई है जब पार्टी बड़े स्तर पर प्रदर्शन की तैयारी में जुटी थी. इस दौरान पार्टी प्रमुख अभिजीत दीपके अपनी दादी के निधन के चलते गृह नगर छत्रपति संभाजीनगर में हैं.
तिरंगा लहराने पर इस तरह की कठोर कार्रवाई क्यों?
रिहाई के बाद अजिंक्य शिंदे ने प्रशासन के फैसले पर कड़ा विरोध दर्ज कराया. उन्होंने कहा कि वे सभी शांतिपूर्ण तरीके से जंतर-मंतर की ओर गए थे, जहां केवल तिरंगा फहराया गया और भारत माता की जय के नारे लगाए गए. शिंदे ने आरोप लगाया कि आशुतोष के जन्मदिन के मौके पर उन्हें अवैध रूप से हिरासत में रखा गया और वकीलों से भी मिलने नहीं दिया गया. पार्टी ने सवाल उठाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन और तिरंगा लहराने पर इस तरह की कठोर कार्रवाई क्यों की जा रही है.
आशुतोष रांका और सौरव दास को क्यों भेजा गया जेल?
दिल्ली पुलिस ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी और उन्हें जेल भेजे जाने की मुख्य वजहों का खुलासा किया है. पुलिस का कहना है कि दोनों नेताओं को आधिकारिक प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाए जा चुके जंतर-मंतर पर अवैध रूप से दाखिल होने और शांति बनाए रखने के लिए भरे गए मुचलकों (बॉन्ड) की शर्तों का उल्लंघन करने के आरोप में पकड़ा गया है.
पुलिस के आधिकारिक बयान के मुताबिक, 13 अक्टूबर की सुबह सौरव दास, आशुतोष रांका, अजिंक्य शिंदे और पार्टी के 11 अन्य सदस्य एक निजी परिसर से अवैध तरीके से जंतर-मंतर में घुसे थे. वहां तैनात सुरक्षाकर्मियों ने जब उन्हें रोकने की कोशिश की, तो प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर पुलिस के काम में बाधा डाली. इसके बाद सभी 14 लोगों को हिरासत में लिया गया और कनॉट प्लेस व संसद मार्ग थानों में अलग-अलग धाराओं में केस दर्ज किए गए. पुलिस ने बताया कि रांका और दास ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 का सीधा उल्लंघन किया है. पुलिस रिकॉर्ड में दोनों नेताओं को ‘रिपीट ऑफेंडर’ करार दिया गया है. इसके अलावा, मजिस्ट्रेट के सामने उनके पिछले आचरण और पहले से तय बेल बॉन्ड की शर्तों को तोड़ने का मामला भी प्रमुखता से रखा गया.
पुलिस का यह भी आरोप है कि इन नेताओं ने सोशल मीडिया के जरिए अन्य लोगों को भी गैर-कानूनी गतिविधियों में शामिल होने के लिए उकसाया. स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के सामने पेश किए जाने के बाद यह देखते हुए कि दोनों लगातार नियमों की अनदेखी कर रहे हैं और बाहर रहने पर दोबारा कानून व्यवस्था बिगड़ने की आशंका है, अदालत ने सौरव दास और आशुतोष रांका को 5 दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेजने का आदेश दिया.