मिडिल ईस्ट में सीजफायर के बाद इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत बेनतीजा रही है। इसके बाद से ईरान और अमेरिका एक दूसरे पर वार्ता फेल होने का आरोप लगा रहे हैं। अमेरिका-ईरान वार्ता की विफलता पर भारत में ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने कहा कि शुरू से ही हमें इन वार्ताओं पर संदेह था, क्योंकि हमें पूरा विश्वास है कि अमेरिकी प्रशासन इसे गंभीरता से नहीं ले रहा है। वे समय खरीदना चाहते थे लेकिन हम दुनिया को दिखाना चाहते थे कि हम युद्धप्रिय लोग नहीं हैं हम शांतिप्रिय लोग हैं।
युद्ध शुरू होने पर बात करते हुए डॉ. अब्दुल मजीद ने कहा कि हम इस युद्ध के सूत्रधार नहीं हैं, उन्होंने हम पर यह युद्ध थोपा है और हमने आत्मरक्षा शुरू कर दी है। हम दो, तीन या पांच साल तक भी अपनी रक्षा करेंगे, लेकिन हम आत्मसमर्पण नहीं करेंगे और अपने देश और अधिकारों को दूसरे पक्ष को नहीं सौंपेंगे।
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हुए डॉ. अब्दुल मजीद ने बयान से साफ है कि ईरान आसानी से पीछे हटने वाला नहीं है। कई देशों का ईरान को समर्थन मिल रहा है। पश्चिम एशिया संघर्ष पर भारत के रुख के बारे में डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने कहा कि मैं भारत सरकार का आभारी हूं। उन्होंने हमारा समर्थन किया और हमारे प्रति एकजुटता दिखाई। सरकार और राजनीतिक दलों के कई अधिकारियों ने अयातुल्ला खामेनेई की शहादत के 40वें दिन आयोजित इस सभा में भाग लिया। हम उन सभी के आभारी हैं।
हॉर्मुज स्ट्रेट पर क्या बोला ईरान?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के होर्मुज जलडमरूमध्य पर दिए गए बयान पर ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने कहा कि मुझे पूरा विश्वास है कि वे कुछ नहीं कर सकते। इस युद्ध से पहले होर्मुज जलडमरूमध्य खुला था, हम इसे बंद नहीं करना चाहते थे। हम आशा करते हैं कि होर्मुज जलडमरूमध्य के कारण दुनिया में किसी को भी कष्ट न हो, लेकिन उन्होंने (अमेरिका-इजराइल) जलडमरूमध्य में एक दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति पैदा कर दी है और आशा है कि इसका जल्द ही समाधान हो जाएगा और स्थिति पहले जैसी हो जाएगी। कहा कि यह सभी देशों का है, केवल अमेरिका का नहीं… हम चाहते हैं कि यह जलडमरूमध्य खुला रहे, लेकिन वर्तमान स्थिति ठीक नहीं है और कुछ जहाजों को इससे गुजरने की अनुमति दी जा रही है।
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'हम शांतिप्रिय लोग हैं…'
अमेरिका-ईरान वार्ता की विफलता पर सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने कहा कि हम वार्ता के लिए तैयार थे और इस्लामाबाद आए थे। हम जानते थे कि दूसरा पक्ष उतना गंभीर नहीं था, लेकिन हम दुनिया को यह दिखाने आए थे कि हम शांतिप्रिय लोग हैं। यदि दूसरा पक्ष इस स्थिति से सबक लेता है और वार्ता के लिए आगे आता है, तो हम भी वार्ता के लिए आगे आएंगे।
मिडिल ईस्ट में सीजफायर के बाद इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत बेनतीजा रही है। इसके बाद से ईरान और अमेरिका एक दूसरे पर वार्ता फेल होने का आरोप लगा रहे हैं। अमेरिका-ईरान वार्ता की विफलता पर भारत में ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने कहा कि शुरू से ही हमें इन वार्ताओं पर संदेह था, क्योंकि हमें पूरा विश्वास है कि अमेरिकी प्रशासन इसे गंभीरता से नहीं ले रहा है। वे समय खरीदना चाहते थे लेकिन हम दुनिया को दिखाना चाहते थे कि हम युद्धप्रिय लोग नहीं हैं हम शांतिप्रिय लोग हैं।
युद्ध शुरू होने पर बात करते हुए डॉ. अब्दुल मजीद ने कहा कि हम इस युद्ध के सूत्रधार नहीं हैं, उन्होंने हम पर यह युद्ध थोपा है और हमने आत्मरक्षा शुरू कर दी है। हम दो, तीन या पांच साल तक भी अपनी रक्षा करेंगे, लेकिन हम आत्मसमर्पण नहीं करेंगे और अपने देश और अधिकारों को दूसरे पक्ष को नहीं सौंपेंगे।
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हुए डॉ. अब्दुल मजीद ने बयान से साफ है कि ईरान आसानी से पीछे हटने वाला नहीं है। कई देशों का ईरान को समर्थन मिल रहा है। पश्चिम एशिया संघर्ष पर भारत के रुख के बारे में डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने कहा कि मैं भारत सरकार का आभारी हूं। उन्होंने हमारा समर्थन किया और हमारे प्रति एकजुटता दिखाई। सरकार और राजनीतिक दलों के कई अधिकारियों ने अयातुल्ला खामेनेई की शहादत के 40वें दिन आयोजित इस सभा में भाग लिया। हम उन सभी के आभारी हैं।
हॉर्मुज स्ट्रेट पर क्या बोला ईरान?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के होर्मुज जलडमरूमध्य पर दिए गए बयान पर ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने कहा कि मुझे पूरा विश्वास है कि वे कुछ नहीं कर सकते। इस युद्ध से पहले होर्मुज जलडमरूमध्य खुला था, हम इसे बंद नहीं करना चाहते थे। हम आशा करते हैं कि होर्मुज जलडमरूमध्य के कारण दुनिया में किसी को भी कष्ट न हो, लेकिन उन्होंने (अमेरिका-इजराइल) जलडमरूमध्य में एक दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति पैदा कर दी है और आशा है कि इसका जल्द ही समाधान हो जाएगा और स्थिति पहले जैसी हो जाएगी। कहा कि यह सभी देशों का है, केवल अमेरिका का नहीं… हम चाहते हैं कि यह जलडमरूमध्य खुला रहे, लेकिन वर्तमान स्थिति ठीक नहीं है और कुछ जहाजों को इससे गुजरने की अनुमति दी जा रही है।
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‘हम शांतिप्रिय लोग हैं…’
अमेरिका-ईरान वार्ता की विफलता पर सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने कहा कि हम वार्ता के लिए तैयार थे और इस्लामाबाद आए थे। हम जानते थे कि दूसरा पक्ष उतना गंभीर नहीं था, लेकिन हम दुनिया को यह दिखाने आए थे कि हम शांतिप्रिय लोग हैं। यदि दूसरा पक्ष इस स्थिति से सबक लेता है और वार्ता के लिए आगे आता है, तो हम भी वार्ता के लिए आगे आएंगे।